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Monday, 23 June 2014

माइग्रेन के लिए कुछ आयुर्वेदिक औषधियों.......... माइग्रेन का घरेलू इलाज़

आधासीसी (माइग्रेन) -



आधासीसी या माइग्रेन दर्द अति कष्टकारी होता है | इसमें सिर के आधे भाग में दर्द होता है | माइग्रेन में रोगी की आँखों के सामने अँधेरा सा छा जाता है सुबह उठते ही चक्कर आने लगते हैं | जी मिचलाना,उल्टी होना,अरुचि पैदा होना आदि आधासीसी रोग के लक्षण हैं | मानसिक व शारीरिक थकावट,चिंता करना,अधिक गुस्सा करना,आँखों का अधिक थक जाना,अत्यधिक भावुक होना तथा भोजन का ठीक तरह से न पचना आदि माइग्रेन रोग के कुछ कारण हैं| आज हम आपको माइग्रेन के लिए कुछ आयुर्वेदिक औषधियों के विषय में बताएंगे -

१- एक चौथाई चम्मच तुलसी के पत्तों के चूर्ण को सुबह - शाम शहद के साथ चाटने से आधासीसी के दर्द में आराम मिलता है | 

२- दस ग्राम सौंठ के चूर्ण को लगभग ६० ग्राम गुड़ में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें | इन्हे सुबह शाम खाने से आधासीसी का दर्द दूर हो जाता है | 

३- सिर के जिस हिस्से में दर्द हो उस नथुने में ४-५ बूँद सरसों का तेल डालने से आधे सिर का दर्द ठीक हो जाता है | 

४- सुबह खाली पेट आधा सेब प्रतिदिन सेवन करने से माइग्रेन में बहुत लाभ होता है | 

५- सौंफ,धनिया और मिश्री सबको ५-५ ग्राम की मात्रा में लेकर पीस लें | इसे दिन में तीन बार लगभग ३-३ ग्राम की मात्रा में पानी के साथ लेने से आधासीसी का दर्द दूर हो जाता है | 

६- नियमित रूप से सातों प्राणायाम का अभ्यास करें , लाभ होगा |
माइग्रेन से पीड़ित रोगी को स्टार्च,प्रोटीन और अधिक चिकनाई युक्त भोजन नहीं करना चाहिए | फल,सब्जियां और अंकुरित दालों का सेवन लाभकारी होता है |
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Treatment as advised by Smt janki Meena on her blog
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1) बादाम 10-12 नग प्रतिदिन खाएं। यह माईग्रेन का बढिया उपचार है।

2) बन्ड गोभी को कुचलकर एक सूती कपडे में बिछाकर मस्तक (ललात) पर बांधें। रात को सोते वक्त या दिन में भी सुविधानुसार कर सकते हैं। जब गोभी का पेस्ट सूखने लगे तो नया पेस्ट बनाककर पट्टी बांधें। मेरे अनुभव में यह माईग्रेन का सफ़ल उपाय हैं।

3) अंगूर का रस 200 मिलि सुबह-शाम पीयें। बेहद कारगर नुस्खा है।

4) नींबू के छिलके कूट कर पेस्ट बनालें। इसे ललाट पर बांधें । जरूर फ़ायदा होगा।

5) गाजर का रस और पालक का रस दोनों करीब 300 मिलि पीयें आधाशीशी में गुणकारी है।

6) गरम जलेबी 200 ग्राम नित्य सुबह खाने से भी कुछ रोगियों को लाभ हुआ है।

7) आधा चम्मच सरसों के बीज का पावडर 3 चम्मच पानी में घोलक्रर नाक में रखें । माईग्रेन का सिरदर्द कम हो जाता है।

7) सिर को कपडे से मजबूती से बांधें। इससे खोपडी में रक्त का प्रवाह कम होकर सिरदर्द से राहत मिल जाती है।

8) माईग्रेन रोगी देर से पचने वाला और मसालेदार भोजन न करें।

9) विटामिन बी काम्प्लेक्स का एक घटक नियासीन है। यह विटामिन आधाशीशी रोग में उपकारी है। 100 मिलि ग्राम की मात्रा में रोज लेते रहें।

10) तनाव मुक्त जीवन शैली अपनाएं।

11) हरी सब्जियों और फ़लों को अपने भोजन में प्रचुरता से शामिल करें।
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माइग्रेन का घरेलू इलाज़

वर्तमान समय में माइग्रेन तेजी से बढ़ रहा है। यह बहुत ही कष्टदायक रोग है। इसमें सिर के एक ही भाग में ललाट पर या सिर के पिछले हिस्से में अथवा पूरे सिर में भी दर्द होता है। यह दर्द साधारण सिर दर्द से अधिक तेज और उग्र होता है। खास बात यह माइग्रेन का दर्द सूर्य उदय होते प्रारंभ होता है। जैसे-जैसे सूर्य निकलता है दर्द बढ़ता जाता है और दोपहर होते-होते तीव्र पीड़ा होती है।

आयुर्वेद के अनुसार रुखा भोजन करने, शीतल वस्तुओं का अधिक सेवन करने, मल-मूत्र के वेग को रोकने, बहुत चलने, ज्यादा कसरत करने या फिर अति सहवास करने से इस रोग की उत्पत्ति होती है। इन कारणों के साथ ही पानी कम पीने, समय पर भोजन न करने, नींद पूरी न होने से भी यह समस्या हो सकती है। वहीं महिलाओं में माहवारी की गड़बड़ी से भी यह रोग देखने को मिलता है। इन कारणों को देखते हुए एक कुशल चिकित्सक से परामर्श लेकर इस रोग की चिकित्सा करानी चाहिए।

आयुर्वेद पद्धति से माइग्रेन के रोगी बहुत आसानी से ठीक हो जाते हैं। घरेलू उपचार में-

गाय का ताजा घी सुबह-शाम दो-चार बूंद नाक में रुई से टपकाने से इस रोग में आराम होता है।

वहीं आधा गिलास अंगूर का रस सूर्य निकलने से पहले रोगी को देने से भी उसे आराम मिलेगा।

खाना खाने से पहले और खाना खाने के बाद दो-दो चम्मच शहद का सेवन करें। इसके लिए तुलसी के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर रोगी को पिलाएं। इससे माइग्रेन में काफी लाभ होता है।

दो भाग तिल के साथ एक भाग वायविडंग पीसकर थोड़ा गरम कर लेप करने या चंदन को गुलाब जल में घिसकर माथे पर लगाने से रोग में आराम मिलता है।

एक तोला कल्क को गर्म दूध में मिलाकर पीने से भी बहुत लाभ पहुंचता है।

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