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Tuesday, 10 June 2014

क्यों और कैसे करें सोलह सोमवार

क्यों और कैसे करें सोलह सोमवार


सोमवार सप्ताह की शुरुआत का दिन होता है। नई संकल्पनाओं, उद्देश्यों और संभावनाओं के साथ इस दिन की शुरुआत शांत मन से की जाती है। इसके लिए जरूरी है कि व्यक्ति का मन व्यथित नहीं रहे और मनः स्थिति पर नियंत्रण बना रहे। इसमें भगवान शिव के नाम उपवास रखने से दिन के स्वामी चंद्रमा की भी आराधना हो जाती है। 
क्यों करें ?

यदि आप चाहते हैं कि आपकी अच्छी दिनचर्या हो, कार्यक्षेत्र में सौहार्दपूर्ण वातावरण बना रहे और आप में आंतरिक ऊर्जा का भी सतत प्रवाह होता रहे। बात-व्यवहार में तीखापन न आए, लेकिन काम के प्रति तीव्रता बनी रहे। आक्रामकता और आंतरकि अक्रोश पर नियंत्रण कायम रहे। इसके लिए सोम यानि चंर्द अर्थात भागवान शिव की आराधना करने से लाभ मिलता है। सोलह सोमवार की भक्तिपूर्व किया गया व्रत बहुत ही फलदायी होता है, जो सोमवारी व्रत के नाम से जाना जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में किसी ग्रह से अशुभ स्थितियां उत्पन्न हो रही हों किसी विशेष कार्य में अड़चनें आ रही हों तो इस व्रत को विधि पूर्वकर करने से सर्वकामना पूर्ति का उद्देश्य पूरा होता है।


कैसे करें ?

इस व्रत को श्रावण, चैत्र, वैसाख, कार्तिक या मार्गशीर्ष के महीनों को शुक्ल पक्ष के प्रथम सप्ताह से आरंभ किया जाता है। इसे पांच वर्ष या सोलह सप्ताह श्रद्धापूर्वक करने से मनोवांछित फल की प्रप्ति होती है।

1. व्रत का शुभारंभ करने वाले व्यक्ति को प्रातःकाल जल में कुछ काले तिल डालकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद ऊँ नमः शिवाय मंत्र के द्वारा श्वेत फूल, सफेद चंदन, चावल, पंचामृत, सुपारी, फल और गंगाजल या साफ पानी से भगवान शिव और पार्वती का पूजन करना चाहिए।

2. शिव-पार्वती की पूजा के बाद सोमवार की व्रत कथा अवश्य सुननी चाहिए। उसके बाद आरती कर प्रसाद वितरण करना चाहिए।

3. पूजा के बाद एक समय का भोजन ग्रहण करना चाहिए जो नमक रहित हो। फलाहार का विशेष महत्व है।

4. व्रत का उद्यापन सोलहवें दिन किया जाना चाहिए। इसके लिए प्रत्येक सोमवार की जाने वाली पूजा के अलावा सफेद वस्तुओं का दान किया जाना चाहिए। उन वस्तुओं में चावल, सफेद परिधान या कपड़ा, श्वेत फूल, सफेद चंदन, दूध, दही, चांदी आदि हो सकता है।

5. उद्यापन के दिन ब्राह्मणों और बच्चों को मिष्ठान भोजन के रूप में खीर-पूड़ी या हल्वा खिलाकर यथाशक्ति दान दिया जाना चाहिए।

6. ज्योतिष के अनुसार इस दिन चंद्रमा की शांति के लिए चांदी की अंगूठी में मोती धारण करने का भी खास महत्व है।


विशेष

प्राचीन हिंदू ग्रंथों और विद्वानों के अनुसार सोमवार का व्रत तीन तरह के होते हैं। एक सोमवार, दूसरा सोलह सोमवार और तीसरा सौम्य प्रदोष कहलाता है। सावन अर्थात श्रावन माह में सोमवार का व्रत सूर्योदय से प्रारंभ करना चाहिए। व्रत के लिए निम्न मंत्र से संकल्प और ध्यान करना चाहिए। वे मंत्र हैं -


संकल्प के मंत्र -

'मम क्षेमस्थैर्यविजयारोग्यैश्वर्याभिवृद्धयर्थं सोमव्रतं करिष्ये'
ध्यान के मंत्र:
ध्यायेन्नित्यंमहेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांग परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।
पद्मासीनं समंतात्स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्ववंद्यं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
ध्यान के बाद ऊँ नमः शिवाय से शिवजी और ऊँ नमः शिवायै से पार्वतीजी षोडशोपचार पूजन किया जाना चाहिए।

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