Wednesday, 21 May 2014

Hindi Poem .......मोदी’ न लिखूं तो क्या लिखूं.....? अब आप ही बता दो मैं इस जलती कलम से क्या लिखूं ??



मोदी’ न लिखूं तो क्या लिखूं.....? अब आप
ही बता दो मैं इस जलती कलम से क्या लिखूं ??

कोयले की खान लिखूं
या मनमोहन बेईमान लिखूं ?

पप्पू पर जोक लिखूं
या मुल्ला मुलायम लिखूं ?

सी.बी.आई. बदनाम लिखूं
या जस्टिस गांगुली महान लिखूं ?

शीला की विदाई लिखूं
या लालू की रिहाई लिखूं

‘आप’ की रामलीला लिखूं
या कांग्रेस का प्यार लिखूं

भ्रष्टतम् सरकार लिखूँ
या प्रशासन बेकार लिखू ?

महँगाई की मार लिखूं
या गरीबो का बुरा हाल लिखू ?

भूखा इन्सान लिखूं
या बिकता ईमान लिखूं ?

आत्महत्या करता किसान लिखूँ
या शीश कटे जवान लिखूं ?

विधवा का विलाप लिखूँ ,
या अबला का चीत्कार लिखू ?

दिग्गी का 'टंच माल' लिखूं
या करप्शन विकराल लिखूँ ?

अजन्मी बिटिया मारी जाती लिखू,
या सयानी बिटिया ताड़ी जाती लिखू?

दहेज हत्या, शोषण, बलात्कार लिखू
या टूटे हुए मंदिरों का हाल लिखूँ ?

गद्दारों के हाथों में तलवार लिखूं
या हो रहा भारत निर्माण लिखूँ ?

जाति और सूबों में बंटा देश लिखूं
या बीस दलो की लंगड़ी सरकार लिखूँ ?

नेताओं का महंगा आहार लिखूं
या 5 रुपये का थाल लिखूं ?

लोकतंत्र का बंटाधार लिखूं
या पी.एम्. की कुर्सी पे मोदी का नाम लिखूं ?

अब आप ही बता दो मैं इस जलती कलम से
क्या लिखूं" 


खेलने का मन करता है तो - कलमाडी याद
आ जाते हैं...

पढ़ने का मन करता है तो - आरक्षण याद आ
जाता है....

रोने का दिल करता है तो -सोनिया का बटला हाउस
वाला आँसू याद
आ जाता है....

सोचता हूँ की पागल हो जाऊं तो-दिग्विजय सिंह याद
आ जाते है....

सोचता हूँ की मूह बंद कर के रहूं तो -मनमोहन सिंह
याद आ जाते
हैं....

सोचता हूँ की लोगों का सेवा करूँ तो - झूठे भगोड़े
कजरी याद आ जाते

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