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Thursday, 15 May 2014

एनडी तिवारी और उज्ज्वला शर्मा विवाह ................

हाइप्रोफाइल पारिवारिक लड़ाई का पटाक्षेप होने के करीब एक पखवारे बाद पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी और उज्ज्वला शर्मा ने विवाह रचा लिया। बीती रात उनका आवास आरोही इस विवाह का साक्षी बना। आरोही में गृह प्रवेश के बाद उज्ज्वला की यह दूसरी बड़ी कामयाबी है। इससे पहले उन्होंने अदालती लड़ाई से रोहित को उनका पिता दिलाया था।


ध्यान रहे कि एनडी तिवारी के जैविक पुत्र रोहित शेखर की मां उज्जवला शर्मा बीते एक पखवारे से उनके साथ रह रही हैं। बताया जाता है कि एनडी को साथ रखने की लड़ाई में उज्जवला शर्मा और एनडी के रिश्तेदार व ओएसडी भवानी भट्ट आमने-सामने थे। अंतत: उज्जवला को विजय मिली और वह अपने सामान के साथ आरोही में दाखिल हो गयीं थीं।


उज्जवला-भवानी का विवाद
अदालत द्वारा उज्जवला शर्मा के पुत्र रोहित शेखर को एनडी तिवारी का जैविक पुत्र ठहराये जाने के बाद उज्जवला शर्मा आठ मार्च को एनडी तिवारी के साथ रहने लगीं। 16 अप्रैल तक वह एनडी के साथ रहीं। 17 अप्रैल की रात्रि को उज्जवला को अपमानित करके बाहर कर दिया गया। इसके बाद 21 अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट ने एनडी को रोहित शेखर का जैविक पिता घोषित कर दिया। 29 अप्रैल को उज्जवला शर्मा लखनऊ हजरतगंज में काफी हाऊस में एनडी तिवारी को बैठे देख उनसे मिलने गयीं तो एक नया बखेड़ा खड़ा हो गया। 

भवानी भट्ट ने उज्जवला पर काफिला रोकने का आरोप लगाते हुए हजरतगंज कोतवाली में तहरीर दे दी, जबकि उज्जवला का कहना था कि वह तो मिलने गयीं थी और तिवारी जी उन्हें अपने साथ ले जाना चाहते थे। इस घटना के बाद उज्जवला ने तिवारी के साथ रहने के लिए मोर्चा खोल दिया था।

महीनों की सार्वजनिक खींचतान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी व उज्ज्वला शर्मा एक साथ शनिवार को अवध की शाम निहारने निकले। वे फन मॉल गए जहां लैपटाप और कैमरा आदि का जायजा लिया। दूसरे बाजार भी घूमे व घर के लिए खरीदारी की। शुक्रवार व शनिवार रात आवास में गीत संगीत की महफिल सजी जिसमें एनडी ने गाने गए।

तिवारी के पुत्र रोहित शेखर की मां उज्ज्वला शर्मा के शुक्रवार को हुए 'गृहप्रवेश' के बाद शनिवार को वहां का नजारा कुछ और ही था। शुक्रवार तक आरोही में पूर्व मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी भवानी भट्ट की मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता था। उज्ज्वला के आरोही में दाखिल होने के बाद एनडी तिवारी शुक्रवार रात करीब साढ़े 12 बजे तक जागते रहे। उन्होंने तबला बजाया और ये जिंदगी है कौम की, कौम पे लुटाये जा .. जैसे कई गीत गाए। शनिवार सुबह उज्ज्वला छह बजे जाग गयीं, लेकिन एनडी नौ बजे तक सोते रहे। जागने के बाद बादाम और भिगोए चने के साथ उन्होंने चाय पी। फिर जमकर मसाज कराने के बाद एनडी ने पुत्र रोहित शेखर से बात की। रोहित से पूछा कब आओगे। रोहित ने काम की व्यस्तता बताई तो तिवारी बोले काम करो। 
बटलर दीवान सिंह ने उज्ज्वला से नाश्ता व दोपहर के भोजन के लिए पूछा। उज्ज्वला ने कहा मैं किचेन में आती हूं। दीवान ने भवानी की कई शिकायतें कीं। इस बीच, एक कर्मचारी रामकेश यादव फाइल उठाकर ले जा रहा था। किसी ने उज्ज्वला के कान में कुछ कहा तो उन्होंने रामकेश को टोका। बोला, राकेश पवार ने मांगी है। यह साहब की दवाइयों की फाइल है। उज्ज्वला ने कहा जाओ-जाओ। फिर शाम को घूमने का कार्यक्रम बनने लगा। इस बीच, किसी ने उज्ज्वला को बताया कि तिवारी जी को मिली एक हीरे की अंगूठी गायब है।

सुबह ही तिवारी जी से मिलने नैनीताल की शारदा सिंह पहुंची। उन्हें लंबे समय बाद आरोही में प्रवेश मिला। तिवारी जी के लिए लड्डू लाई थीं। यहां सभी लोग कांग्रेस नेता स्वयं प्रकाश गोस्वामी का जिक्र कर रहे थे, जिनके प्रयास से आरोही में उज्ज्वला को रहने का अवसर मिला। तिवारी विचार मंच के महासचिव अरुण शुक्ल व राष्ट्रीय सचिव राजेश कुमार सिंह समेत कई सहयोगी देखरेख में जुटे हैं। उज्ज्वला कहती हैं कि हमारी या भवानी की क्या हैसियत है। सब तो तिवारी जी को जानते हैं। सभी को उनसे मिलने दो। थोड़ी देर बाद कहती हैं कि अब तिवारी जी को आराम करने दीजिए। तिवारी जी की देखरेख करने वाले पि्रंस उनके कपड़े, सद्री और जूते सहेज रहे थे। फिर लंच में उन्हें दलिया, आलू और चपाती खिलाई जाती है। शाम को उठने के बाद किसी के निधन की खबर से तिवारी जी आहत हैं। कहते हैं कि वहां मुझे ले चलो। पता चलता है कि आज दाह-संस्कार में लोग व्यस्त होंगे। कल पर कार्यक्रम टल जाता है। फिर एक बैडमिंटन कोर्ट बनाने की बात होती है।

'ओ समय न मुझपे करो संदेह':
पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के आवास में एक कविता टंगी है।
'ओ समय न मुझपे करो संदेह,
न मेरी क्षमताओं पर करो संशय,
यूं तो मेरी कच्ची उम्र के कागजी हौसलों ने,
बचपने में ही आसमान पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराके अपने इरादों का संकेत कर दिया था।'

तिवारी के जीवन पर बिल्कुल सटीक यह कविता है और बातचीत में जाहिर होता है कि वह बड़े दिलवाले हैं और उसी अंदाज में जवाब भी देते हैं। भवानी भट्ट भले यह कहते हैं कि तिवारी जी को पार्किंसन व डिमेंशिया जैसी बीमारी है, लेकिन तिवारी बातचीत में सावधानी बरतते हैं। 

बातचीत के प्रमुख अंश-

- उज्ज्वला शर्मा के आने से आप खुश हैं?
- ठीक है। खुश हूं जितना खुश होना चाहिए।
- उज्ज्वला को आपके ओएसडी आपसे मिलने नहीं देते थे।
- अरे, क्यों नहीं मिलने देते थे। यह कैसे यहां तक आई।
- पुलिस की मध्यस्थता व इनके समर्थकों के प्रदर्शन से क्या आपको दुख नहीं पहुंचा?
- दुख की क्यों सोचें। हर एक का सुख सोचें।
- भवानी भट्ट ने ओएसडी पद से इस्तीफा दे दिया है। क्या कोई कार्रवाई करेंगे?
- किसी के खिलाफ व्यक्तिगत भाव नहीं रखता। व्यक्तिगत टिप्पणी भी नहीं करता हूं। धर्मक्षेत्र और कुरुक्षेत्र अलग-अलग हैं।
- क्या आपकी संपत्ति को लेकर लोगों में लालच है?
- कैसी संपत्ति। मेरे पास तो कुछ नहीं है। मैंने तो हमेशा विकास सोचा। देश सोचा। टेक्नॉलाजी सोची। वसुधैव कुटुंबकम सोचा। (इस बीच वह ग्लोब मंगाते हैं। 82 देशों की यात्रा कर चुके तिवारी हर देश की अपनी स्मृति ताजा करते हैं। कभी फ्रांसीसी गीत सुनाते हैं और कभी जापानी।)
- क्या आपने कोई वसीयत की है?
- (थोड़ी नाराजगी दिखाते हुए) अभी इतनी जल्दी क्या है। मुझे तो अभी देश का मार्गदर्शन करना है। मुझे जिंदा रहना है। (अपने कर्मचारी राकेश की ओर इशारा करते हैं कि वह मुझे लंबे समय तक जिंदा रखेगा। इस बीच वह साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल..गाने लगते हैं। उज्ज्वला उनके सुर में सुर मिलाती हैं। तिवारी जी खुश हो जाते हैं। बोले, अच्छा गाती हो। )

नहीं लौटूंगा आरोही:


भवानी भट्ट का कहना है कि, 'मैं स्वाभिमानी आदमी हूं। और किसी भी सूरत में आरोही नहीं लौटूंगा। तिवारी जी के प्रति मेरी आस्था है और वह मेरे राजनीतिक गुरु हैं।' भट्ट ने उज्ज्वला शर्मा पर फिर गंभीर आरोप लगाए। कहा-जल्द ही उसकी असलियत सामने आ जाएगी। बोले, क्या यह लिव इन रिलेशनशिप में रहने की उम्र हैं।
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एक पखवारे तक चली हाईप्रोफाइल पारिवारिक लड़ाई का शुक्रवार को पटाक्षेप हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के जैविक पुत्र रोहित शेखर की मां डॉ. उज्ज्वला शर्मा अब एनडी तिवारी के संग रहेंगी। एनडी ने उज्ज्वला का स्वागत किया है और पुलिस की मध्यस्थता के दौरान उन्हें अपने साथ रहने की अनुमति दे दी। इस बीच उनके ओएसडी भवानी भट्ट ने ऐसे माहौल में काम करने से मना करते हुए अवकाश ले लिया है।


उज्ज्वला का नया पता लखनऊ में 'आरोही' 1-माल एवेन्यू होगा। एनडी को साथ रखने की लड़ाई में उज्ज्वला शर्मा और एनडी के रिश्तेदार व ओएसडी भवानी भट्ट आमने-सामने थे। अंतत: उज्ज्वला को विजय मिली और वह अपने सामान के साथ आरोही में दाखिल हो गयीं। शुक्रवार की सुबह 11 बजे एनडी तिवारी विचार मंच के कार्यकर्ताओं के साथ उज्ज्वला शर्मा आरोही पहुंच गयीं। गुरुवार को भी वह करीब साढ़े चार घंटे तक आरोही में दाखिल होने का प्रयास करती रहीं, लेकिन लाख हंगामे के बाद भी गेट नहीं खुला। शुक्रवार की सुबह भी यही स्थिति बनी रही। उज्ज्वला इस बीच कभी अपनी कार में बैठतीं और कभी गेट खटखटातीं।

गेट के बाहर एनडी तिवारी विचार मंच के महासचिव अरुण शुक्ल और अरविन्द यादव समेत कई नेता धरना देकर गेट खोलने की मांग कर रहे थे। साढ़े ग्यारह बजे पुलिस बल पहुंच गया। उन्होंने अंदर दाखिल होने के लिए तहरीर दी, लेकिन थानेदार ने कहा कि वह सीओ और एसडीएम से सम्पर्क करें। उज्ज्वला के लाख प्रयासों के बावजूद गेट नहीं खुला। करीब पौने तीन बजे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्वयं प्रकाश गोस्वामी अपने समर्थकों के साथ आरोही पहुंचे। समर्थक गेट पर जोर लगाने लगे। जोरदार धक्का लगने से गेट खुल गया और उज्ज्वला अपने समर्थकों के साथ बंगले में घुस गयीं। हजरतगंज के क्षेत्राधिकारी दिनेश यादव इस दौरान पहुंचे।

उज्ज्वला ने उनसे कहा कि आप तिवारी जी को मेरे यहां होने की बात बता दें। अगर वह कहेंगे कि मुझे साथ नहीं रखना है तो मैं चली जाऊंगी। दिनेश यादव ने तिवारी से बातचीत की। तिवारी ने उज्ज्वला को बुलाने की अनुमति दे दी। इधर, भवानी भट्ट भी मौके पर आ पहुंचे। सीओ की उपस्थिति में तय हुआ कि उज्ज्वला आरोही में ही रहेंगी। भवानी ने आपत्ति की कि ऐसे माहौल में मैं काम नहीं कर पाऊंगा।

उज्ज्वला-भवानी का विवाद अदालत द्वारा उज्ज्वला शर्मा के पुत्र रोहित शेखर को एनडी तिवारी का जैविक पुत्र ठहराये जाने के बाद उज्ज्वला शर्मा आठ मार्च को एनडी तिवारी के साथ रहने लगीं। 16 अप्रैल तक वह एनडी के साथ रहीं। 17 अप्रैल की रात्रि को उज्ज्वला को अपमानित करके बाहर कर दिया गया। इसके बाद 21 अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट ने एनडी को रोहित शेखर का जैविक पिता घोषित कर दिया।

29 अप्रैल को उज्ज्वला शर्मा लखनऊ हजरतगंज में काफी हाऊस में एनडी तिवारी को बैठे देख उनसे मिलने गयीं तो एक नया बखेड़ा खड़ा हो गया। भवानी भट्ट ने उज्ज्वला पर काफिला रोकने का आरोप लगाते हुए हजरतगंज कोतवाली में तहरीर दे दी, जबकि उज्ज्वला का कहना था कि वह तो मिलने गयीं थी और तिवारी जी उन्हें अपने साथ ले जाना चाहते थे। इस घटना के बाद उज्ज्वला ने तिवारी के साथ रहने के लिए मोर्चा खोल दिया। गुरुवार और शुक्रवार का प्रदर्शन इसी की परिणति रही।

सत्य की विजय

यह सत्य की विजय है। मेरी आस्था ईश्वर के प्रति है। मैं जानती थी कि तिवारी जी ने कभी मुझे अपने से अलग नहीं किया, लेकिन उनके ओएसडी भवानी भट्ट ने षड्यंत्र के तहत फर्जी पत्र मीडिया को जारी कराया। अब उसके चेहरे से नकाब उतर गया है। मुझे खुशी इस बात की है कि तिवारी जी की सेवा कर सकूंगी।
-डॉ. उज्ज्वला शर्मा
रोहित शेखर की मां
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भवानी ने भेजा इस्तीफा
राज्य ब्यूरो, लखनऊ : पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) भवानी भट्ट ने एनडी तिवारी को ओएसडी पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। भट्ट का कहना है कि उज्ज्वला शर्मा कभी भी उन पर कोई झूठा आरोप लगा सकती है और कभी भी अप्रिय घटना घटित कर सकती है। भट्ट के मुताबिक उन्होंने प्रदेश के गृह सचिव को पत्र भेजकर कहा है कि तिवारी जी की जान व माल की सुरक्षा करने का अब दायित्व मेरा नहीं रह गया है।
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