Saturday, 1 March 2014

3 मिनट का हमला, जिससे बना बांग्लादेश !

3 मिनट का हमला, जिससे बना बांग्लादेश !
कैसे बना बांग्लादेश?



14 दिसंबर 1971 समय लगभग साढ़े दस बजे। स्थान गुवाहाटी का एयरबेस। विंग कमांडर बीके बिश्नोई पूर्वी पाकिस्तान में एक अभियान के बाद लौटे ही थे कि ग्रुप कैप्टन वोलेन ने उन्हें बताया कि उन्हें तुरंत एक अत्यंत महत्वपूर्ण अभियान पर निकलना है।
ग्यारह बज कर बीस मिनट पर उन्हें ढाका के सर्किट हाउस में चल रही एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान बम गिरा कर उसमें व्यवधान डालना है। हुआ ये था कि सुबह भारतीय वायु सेना ने ढाका गवर्नर हाउस और पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय के बीच एक संवाद को बीच में ही सुना था जिसमें कहा गया था कि पूर्वी पाकिस्तान के गवर्नर साढ़े ग्यारह बजे एक मीटिंग लेने वाले हैं जिसमें पाकिस्तानी प्रशासन के सारे आला अधिकारी भाग लेंगे।
वायुसेना मुख्यालय ने पूर्वी कमान को आदेश दिया कि इस बैठक के दौरान सर्किट हाउस पर बमबारी की जाए ताकि प्रशासन की ‘निर्णय लेने की क्षमता’ ही समाप्त हो जाए।
सर्किट हाउस की लोकेशन का कोई नक्शा ऑपरेशन रूम में नहीं था। नक्शे के नाम पर उन्हें एक टूरिस्ट मैप दिया गया जिसे बिश्नोई ने अपनी साइड पॉकेट में खोंस लिया।

सिर्फ 24 मिनट थे हमारे पास

बिश्नोई ने बीबीसी को बताया, "उस समय हमारे पास हमला करने के लिए सिर्फ़ 24 मिनट थे। उनमें से गुवाहाटी से ढाका तक पहुंचने तक का समय ही 21 मिनट था। तो कुल मिला कर हमारे पास सिर्फ़ तीन मिनट बचते थे। मैं अपने मिग 21 का इंजिन स्टार्ट कर उसका हुड बंद ही कर रहा था कि मैंने देखा कि मेरी स्कवॉड्रन का एक अफ़सर एक कागज़ लहराता हुआ मेरी तरफ़ दौड़ा चला आ रहा है।"
उस अफ़सर ने बिश्नोई को बताया कि अब टारगेट सर्किट हाउस न हो कर गवर्मेंट हाउस कर दिया गया है। बिश्नोई ने उससे पूछा कि ये है कहाँ? तो उसका जवाब था कि आप को ही पता करना है कि वो कहाँ है।
बिश्नोई कहते हैं कि इतना समय भी नहीं था कि विमान को रोक कर टारगेट को ढ़ूँढ़ने की बात सोची जाती।
उन्होंने बताया,"मैंने अपनी टीम के किसी पायलट को नहीं बताया कि टारगेट को बदल दिया गया है। मैं रेडियो पर ही उन्हें ये बता सकता था लेकिन अगर मैं ऐसा करता तो पूरी दुनिया को पता चल जाता कि हम क्या करने जा रहे हैं।"

गवर्मेंट हाउस का किया ध्वस्त

इस बीच गुवहाटी से 150 किलोमीटर पश्चिम में हाशिमारा में विंग कमांडर आरवी सिंह ने 37 स्कवॉड्रन के सीओ विंग कमांडर एसके कौल को बुला कर ब्रीफ़ किया कि उन्हें भी ढाका के गवर्मेंट हाउस को ध्वस्त करना है। कौल का पहला सवाल था कि गवर्मेंट हाउस कहाँ है? इसके जवाब में उन्हें बर्मा शेल पेट्रोलियम कंपनी की तरफ़ से जारी किया गया एक दो इंच का टूरिस्ट मैप दिया गया।
इस बीच विश्नोई को गुवहाटी से उड़े बीस मिनट हो चुके थे। उन्होंने अनुमान लगाया कि वो तीन मिनट के अंदर अपने लक्ष्य तक पहुंच जाएंगे।
उन्होंने वो नक्शा अपनी जेब से निकाला और उसको देखने के बाद उन्होंने अपने साथी पायलेट्स को रेडियो पर संदेश भेजा कि ढाका हवाई अड्डे के दक्षिण में लक्ष्य को ढ़ूंढ़ने की कोशिश करें। अब ये लक्ष्य सर्किट हाउस न हो कर गवर्मेंट हाउस है।
उनके नंबर तीन पायलट विनोद भाटिया ने सबसे पहले गवर्मेंट हाउस को ढूंढ़ा। इसके चारों तरफ हरी घास का एक कंपाउंड था जैसा कि भारत के राज्यों की राजधानियों में स्थित राज भवनों में हुआ करता है।

कांपते हाथों से इस्तीफ़ा

उधर गवर्नर हाउस में मौजूद गाविन यंग ने वायर पर संवाद लिखा, "भारतीय जेटों ने गरजते हुए हमला किया। धरती फटी और हिली भी। मलिक के मुंह से निकला-अब हम भी शरणार्थी हैं। केली ने मेरी तरफ देखा मानो बिना बोले पूछ रहे हों आखिर हमें यहाँ दोबारा आने की ज़रूरत क्या थी। अचानक मलिक ने एक पेन निकाला और कांपते हाथों से एक काग़ज़ पर कुछ लिखा। केली और मैंने देखा कि ये मलिक का इस्तीफ़ा था जिसे उन्होंने राष्ट्रपति याहया ख़ाँ को संबोधित किया था।"
"अभी हमला जारी ही था कि मलिक ने अपने जूते और मोज़े उतारे, बग़ल के गुसलखाने में अपने हाथ पैर धोए, रूमाल से अपना सिर ढका और बंकर के एक कोने में नमाज़ पढ़ने लगे। ये गवर्मेंट हाउस का अंत था। ये पूर्वी पाकिस्तान की आखिरी सरकार का भी अंत था।"( गाविन यंग, वर्लड्स अपार्ट, ट्रेवेल्स इन वार एंड पीस)
इस हमले के तुरंत बाद गवर्नर मलिक ने अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ इंटरकॉन्टिनेंटल होटल का रुख़ किया। इस हमले ने युद्ध के समय को तो कम किया ही और दूसरे विश्व युद्ध में बर्लिन की तरह गली गली में लड़ने की नौबत भी नहीं आई।
दो दिन बाद ही पाकिस्तानी सेना के 93,000 सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने हथियार डाल दिए और एक मुक्त देश के तौर पर बांग्लादेश के अभ्युदय का रास्ता साफ़ हो गया। इस युद्ध में असाधारण वीरता दिखाने के लिए विंग कमांडर एसके कौल को महावीर चक्र और विंग कमांडर बीके बिश्नोई और हरीश मसंद को वीर चक्र प्रदान किए गए।

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