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Tuesday, 4 February 2014

Must Read.............सोने की चिड़िया है कैसे मेरा हिंदुस्तान लिखूँ।।

सोने की चिड़िया है कैसे मेरा हिंदुस्तान लिखूँ
अभिशापों से भरी धरा को मैं कैसे वरदान लिखूँ।
सोने की चिड़िया है कैसे मेरा हिंदुस्तान लिखूँ।।

सौनचिरैया भी जब केवल विस्फोटों की धुन गाती हो।।
बुलबुल के पंखों से भी जब बारूदों की बू आती हो।
जब हत्यारे जमा हुए हों घर-खेतों से बाजारों तक।
जब विषधर फुंकार रहे हों झौंपड़ियों से मीनारों तक।।
जब अधनंगे लाखों बच्चे रोटी को भी तरस रहे हों।
मुस्कानों की जगह आंख से खारे आंसू बरस रहे हों।।
जब निर्धनता गली-गली और चैराहों पर नाच रही हो।
जब कंगाली फुटपाथों पर रोटी-रोटी बांच रही हो।।
आहों और कराहों को मैं कैसे मंगलगान लिखूँ।
सोने की चिड़िया है कैसे मेरा हिंदुस्तान लिखूं।।

जब शिक्षा के बाद हाथ में आती हो केवल बेकारी।।
जब आंसू में घुली हुई हो भूखे पेटों की लाचारी।
जहां रूप के बाजारों में टके-टके काया बिकती हो।
जहां आसमां के चंदा में भी केवल रोटी दिखती हो।।
जब खादी के पहन मुखौटे झूट पड़ा हो सिंहासन पर।
जब बेबस-लाचार नयन ले साच खड़ा हो निर्वासन पर।।
पतझर का ही शासन हो तो फागुन कैसे भा सकता है ।
सारे जग की पीड़ा लेकर कैसे कोई गा सकता है।।
कैसे चिथड़ो से कपड़ों को मोती का परिधान लिखूँ।
सोने की चिड़िया है कैसे मेरा हिंदुस्तान लिखूं।।

जब संसद में जमा हुए हों सारे भारत के अपराधी।
जब सुरसा के मुंह के जैसी बढ़ती जाती हो आबादी।।
जब जनता की चुनी मूरतें पड़ी हुई हों मदिरालय में।
जब खादी और खाकी दोनो टंगी हुई हों वेश्यालय में।।
जब सारे जग की संपत्ति नेताजी के घर संचित हो।
और देश की आधी जनता दो रोटी से भी वंचित हो।।
आंसू ही लिखते-लिखते जब आंखें भी हों खारी-खारी।
कैसे कलम निभा सकती है तब खुशियों की जिम्मेदारी।।
रोते और सिसकते अधरों को कैसे मुस्कान लिखूँ।
सोने की चिड़िया है कैसे मेरा हिंदुस्तान लिखूं।।

पांच दिनों से भूखे बचपन की अंतड़ियाँ जब खाली हों।
और बाढ़ की हर चर्चा में छप्पन भोगों की थाली हो।।
जब खाली पेटों वाले षव जला दिए हों गुमनामों में।
और नाज के लाखों बोरे जमा हुए हों गोदामों में।।
जब मांओं ने बच्चों के शव गंदले पानी में ढोऐ हों।
और देश के सत्ताधारी ए. सी. कमरो में सोऐ हों।।
जिस भारत का स्वर्ण-बुढ़ापा सर तक पानी में जिंदा है।
उस भारत की आजादी पर भारत मां भी षर्मिंदा है।।
आंसू से कड़वे हाथों से कैसे मीठा गान लिखँू।
सोने की चिड़िया है कैसे मेरा हिंदुस्तान लिखूँ।।

-- कुमार पंकज
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