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Sunday, 26 January 2014

Republic Day poems...........गणतंत्र हमारा.................


गणतंत्र हमारा
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        -- मनोज 'आजिज़'


           आदित्यपुर, जमशेदपुर



हम हैं वासी उस देश का
जो सबसे बड़ा गणतंत्र है
वीर सपूतों की बलिदान से
अपना शासन, लोकतंत्र है ।

आये कितने बहुरूपी बनकर
लूट कर मालामाल हुए
हम पर क़ानून अपना थोपा
अन्त में थक बेहाल हुए ।

पाई हमने अपनी आज़ादी
अपना ही संविधान बनाया
सब रहें एक साथ मिलकर
ऐसा सफल प्रावधान बनाया ।

अपने देश में अपना क़ानून
गण तंत्र का मूल तत्व है
सार्थक है यह भारत देश में
विश्व में इसका महत्व है ।

धर्म, जाति, वर्ण भेद भुलाकर
राष्ट्र धर्म का हम पालन करें
विकास पथ पर चलें अविराम
साफल्य ध्वज सब मिल धरें ।
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गणतंत्र दिवस
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       -डॉ बच्चन पाठक 'सलिल'

आया है गणतंत्र दिवस यह
लेकर यह सन्देश
अखिल विश्व में सबसे न्यारा
अपना भारत देश ।

लहरा कर कह रहा तिरंगा
आया नया विहान है
गण ही स्वामी आज देश का
अपना बना विधान है ।

जन जन में गणतंत्र दिवस ने
नव उत्साह जगाया है
आओ, आज विचार करें
क्या हमने खोया पाया है ।

सर्व धर्म समभाव सदा से
भारत की पहचान
हिमगिरि से सागर तक गूंजे
भारत का जय-गान है ।

हम भारत के वीर सिपाही
आगे बढ़ते जायेंगे
अपने साहस, पौरुष से
भारत का मान बढ़ाएंगे ।

पता-- आदित्यपुर, जमशेदपुर-१३
फोन- 0657 / 2370892
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गुलामी और आजादी
    -अमित कुमार गौतम ''स्‍वतंत्र''

देश की आजादी हुई ।
अंग्रेजों की गुलामी गई ॥
ये अब क्‍या हुआ ।
मैं गुलामी से फिर जकड़ा हुआ ।
           देश की आजादी........................
                           कतरा-कतरा खून बहाया ।
धरती मां को कठोर बनाया ॥
      शहीद होकर हमें आजादी दिलाया ।
   बन गई मिट्‌टी में स्‍मृत छाया ॥
  उन वीरों ने मां का कर्ज उतारा।
  हमने कर्ज दर ब्‍याज बढ़ाया ॥
                         देश की आजादी ...........................
वीरों ने पी-पी कर पसीना ।
बहाया अपना खून ॥
ये राक्षसों से पैदा हुए दुष्‍ट ।
जो पी जाते हैं खून ।
            देश की आजादी .............................
गांधी जी ने चरखा चलाया ।
स्‍वदेशी चीजों को अपनाया ॥
                           वीरों में वह जोश है आया ।
जो दुष्‍टों को दूर भगाया । ।
                           हमने उनको पास बुलाया ।
फिर गुलाम बनते ही पाया ॥
                            देश की आजादी ..............................
जागो वीर जमानों तुम।
याद करो उन शहीद जवानों को ॥
गांधी जी का चरखा लाओ ।
उनका सपना पूर्ण बनाओ ॥
देश की आजादी हुई ।
अंग्रेजों की गुलामी गई ॥
ये अब क्‍या हुआ ।
मैं गुलामी से फिर जकड़ा हुआ ॥



                               
                                          ग्राम-रामगढ नं2.तहसील-गोपद बनास.
                                       जिला-सीधी.(म,प)्र486661
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लहरा के कहता है तिरंगा – बाल कविता
-    चंद्रेश कुमार छतलानी



लहरा के कहता है तिरंगा सब जवानों आज तो
तुम्हें बचाना है अपनी भारत माँ की लाज को

पी कर जिसके दूध को बने करमचंद से महात्मा
भगतसिंह सुभाष को जिसने ममता के रंग में रंगा
उसी गोद ने बनाया लाल-बाल-पाल के अंदाज़ को
लहरा के कहता है तिरंगा....

जिसके खेतों में लहलहाये नेहरु चाचा का गुमाँ
उस पावन धरती को कहें हम अपनी भारत माँ
यहाँ राम का धनुष प्रेम करे कृष्ण के साज़ को
लहरा के कहता है तिरंगा....

आओ खाएं कसम कि हिन्दू मुस्लिम भाई हैं
विज्ञान और संस्कार हमारी सच्ची कमाई है
कन्या वध से ना करेंगे गन्दा इसके ताज को
लहरा के कहता है तिरंगा....

भारत माँ को फिर सोने की चिड़िया बनायेंगे
मेहनत लगन से अपनी संस्कृति को बचायेंगे
कोई न रोक पायेगा हम बच्चों की आवाज़ को
लहरा के कहता है तिरंगा....


Regards,

Chandresh Kumar Chhatlani
+91 99285 44749
http://chandreshkumar.wikifoundry.com

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