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Friday, 17 January 2014

Jokes...............आज तो तुम बड़ी क़ातिल लग रही हो, क्या इरादा है?..............


उसने मुझसे कहा- तुम मेरे लिए क्या कर सकते हो?
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मैने भरी ठंड मे 1 मिनट के लिए अपने उपर से रजाई हटा दी.....

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बाल सफ़ेद करने में ज़िन्दगी निकल जाती है, काले तो आधे घंटे में हो जाते है...

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"दिल जलाने की अदा
तूम्हारी अब तक नहीं गई,,

फूल भी अब तुम
साथ वाली कब्र पे रख जाते हो.!!!!!

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 बड़े नादान है वो लोग जो इस दौर में भी वफ़ा की उम्मीद करते है...
इस दौर में तो दुआ कबूल ना हो तो लोग भगवान बदल लेते है।

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न जाने क्यों कोसते हैं लोग बदसूरती को ..……

बर्बाद करने वाले तो हसीन चेहरे होते हैं ..!!

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लफ्जों का हेर-फेर

पहली तस्वीर :
शाम को घर लौटते ही, जैसे ही आप अपनी बीवी को देखें, तुरंत कहें,
"आज तो तुम बिलकुल हत्यारिन लग रही हो!"
आपको शाम की चाय तो क्या, रात का खाना भी नसीब नहीं होगा! दूसरे तीसरे दिन मिल जाये तो गनीमत होगी.

दूसरी तस्वीर :
शाम को घर लौटते ही, जैसे ही आप अपनी बीवी को देखें, तुरंत कहें,
"आज तो तुम बड़ी क़ातिल लग रही हो, क्या इरादा है?"
इस डायलाग के बाद आपको शाम की चाय के साथ गरमा-गर्म पकौड़े और जाने क्या क्या आप अंदाज़ ही लगा सकते है।

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किसी शहर में एक महिला थी. वह
शादीशुदा थी और उसकी 16 साल की एक
बच्ची भी थी. उसके पति दूसरे शहर में
नौकरी करते थे. वह महिला बिलकुल आम
अभिभावकों की तरह थी उसने
अपनी बेटी से बड़ी उम्मीदें
लगा रखी थी और
बेटी की छोटी सी गलती भी उससे
बर्दाश्त नहीं होती थी.
जब बेटी की परीक्षाएं चल रही थी तब
माँ ने उसे ताकीद कर दी थी उसे मेरिट
लिस्ट में आना ही हैं. मेरिट से कम कुछ
भी स्वीकार नहीं होगा, यहाँ तक
की प्रथम श्रेणी भी फ़ैल होने की तरह
मानी जाएगी. लड़की मेधावी थी लेकिन
थी तो किशोरी ही. जब
उम्मीदों का दबाव बढ़ा तो वह परेशान
हो गयी. जैसे तैसे परीक्षाएं निबटी और
अब
रिजल्ट का इंतज़ार होने लगा. आखिर वह
दिन आ ही गया. माँ की उम्मीद शिखर पे
थी लेकिन बेटी का हौसला रसातल में
जा पहुंचा था.माँ को सुबह सुबह काम पर
जाना था सो बेटी रिजल्ट लेने गयी और
माँ अपने ऑफिस. ऑफिस से उसने कई बार घर
पर फोन लगाया लेकिन किसी ने फोन
नहीं उठाया. हैरान परेशान माँ भोजन
अवकाश में घर पहुंची. उसने
देखा की दरवाजे
की कुण्डी चढ़ी हुई थी. उसे
लगा की बेटी अपनी सहेलियों के साथ घूम
फिर रही होगी.बहरहाल, वह अन्दर
गयी.
उसने देखा की बेटी के कमरे के टेबल पर कोई
कागज़ रखा हुआ हैं. शायद कोई चिट्ठी थी.
उसके मन में ढेरो शंकाएं उमड़ने घुमड़ने
लगी उसने धडकते दिल से कागज़ उठाया.
वह
माँ के नाम बेटी का ही पत्र था. उसमे
लिखा था:
प्रिय माँ ,
मुझे बताते हुए बड़ा संकोच हो रहा हैं
की मैंने घर छोड़ दिया हैं और मैं अपने
प्रेमी के साथ रहने चली गयी हूँ
मुझे उसके साथ बड़ा अच्छा लगता हैं. उसके
वो स्टाइलिश टैटू ,कलरफुल हेयर स्टाइल

मोटरसाइकिल की रफ़्तार, वे हैरतअंगेज
करतब. वाह ! उस पर कुर्बान जाऊ. मेरे
लिए ख़ुशी की एक और बात हैं. माँ , तुम
नानी बनने वाली हो. मैं उसके घर
चली गयी, वह एक झुग्गी बस्ती में
रहता हैं.
माँ उसके ढेर सारे दोस्त हैं. रोज शाम
को वो सब इकठ्ठा होते हैं और फिर खूब
मौज मस्ती होती हैं. माँ एक और
अच्छी बात हैं अब मैं प्रार्थना भी करने
लगी हूँ. मैं रोज प्रार्थना करती हूँ
की AIDS का इलाज जल्दी से
जल्दी हो सके
ताकि मेरा प्रेमी लम्बी उम्र पाएं.
माँ मेरी चिंता मत करना. अब मैं 16 साल
की हो गयी हूँ और अपना ध्यान खुद रख
सकती हूँ. माँ तुम अपने नाती -नातिन से
मिलने आया करोगी ना ?
तुम्हारी बेटी
फिर कुछ नीचे लिखा था
नोट : माँ ,परेशान होने की जरूरत नहीं हैं.
यह सब झूठ हैं . मैं तो पडोसी के
यहाँ बैठी हूँ.
मैं सिर्फ यही दर्शाना चाहती थी की मेज़
की दराज में पड़ी मेरी Mark Sheet
ही सबसे बुरी नहीं हैं, इस दुनिया में और
भी बुरी बातें हो सकती है।

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 एक पापी आदमी मरने के बाद नर्क में गया ! कुछ सालों बाद उसके गांव के ही पंडितजी उसे नर्क में मिल गये ! उस पापी आदमी को बड़ा आश्चर्य हुवा की, 'सारा गांव जिन पंडितजी की शराफत, इंसानियत की कसमें खाता था, उन्हे तो स्वर्ग में जाना चाहिये था !' उसने हैरान होकर पंडितजी से पूछ ही लिया- "पंडितजी! आप यहाँ कैसे ??" पंडितजी- "तुम्हारी भाभी के कारण !" पापी- "मतलब ??" पंडितजी- "मैंने मेरी पूरी जिंदगी में कभी झूठ नही बोला, बस बीबी से बोलता था...!" पापी- "मै कुछ समझा नही....?" पंडितजी- "वो रोज सुबह तैयार होकर मुझसे पूछती- मै कैसी लग रही हूँ जी ??



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