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Wednesday, 29 January 2014

श्री कृष्ण से जुड़ी रोचक बातें





कृष्ण को हिंदू धर्म में पूर्णावतार के रूप मे पूजा जाता है। इस धरती पर ईश्वर के समान दूसरा बड़ा ओर कोई नही है, इसीलिए श्री कृष्ण को पूर्ण अवतार माना जाता है। श्री कृष्ण को समझना और उन्हीं की भक्ति करने से सारे सुख प्राप्त होते है।

आर्यभट्‍ट के अनुसार महाभारत युद्ध 3137 ई.पू. में हुआ। इस युद्ध के 35 वर्ष पश्चात भगवान कृष्ण ने देह छोड़ दी थी और कलयुग का आरंभ हुआ था।

कृष्ण जन्म और मृत्यु के समय ज्योतिषियों के अनुसार कृष्ण की आयु 119-33 वर्ष रही होगी। उनकी मृत्यु एक बहेलिए के तीर के लगने से हुई थी। कृष्ण जब जंगल मे विश्राम कर रहे थे, तभी बहेलिए ने उनके पैर को देखकर हिरण समझा और तीर मार दिया।

कृष्ण जन्म-

पुराणों के अनुसार आठवें अवतार के रूप में विष्णु ने श्रीकृष्ण का अवतार देवकी के गर्भ से आठवें पुत्र के रूप में मथुरा के कारागार में लिया। उनका जन्म भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की रात्रि के सात मुहूर्त के बाद आठवें मुहूर्त में हुआ। ज्योतिषियों अनुसार रात 12 बजे उस वक्त शून्य काल था।

कृष्ण जन्म के दौरान आठ का जो संयोग बना, वो बड़ा ही शुभ है। कृष्ण की आठ ही पत्नियां थी। आठ अंक का उनके जीवन में बहुत महत्व रहा है।

महाभारत, गीता और कृष्ण के समय के संबंध में मेक्समूलर, बेबेर, लुडविग, हो-ज्मान, विंटरनिट्स फॉन श्राडर आदि सभी विदेशी विद्वानों द्वारा फैलाई गई भ्रांतियों का कुछ भारतीय विद्वानों ने भी अनुसरण कर भ्रम के जाल को और बढ़ावा दिया है।

दयानंद सरस्वती ने विदेशी विद्वानों की बातों का खंडन कर अपनी पुस्तक ‘सत्यार्थ प्रकाशमें एक लेख लिखा था जिसमें युधिष्ठिर से लेकर अंतिम हिंदू राजा यशपाल तक के नाम दिए हैं। यशपाल को शाहबुद्दीन ने पराजित कर दिल्ली पर अपना आधिपत्य कायम किया था।

कृष्ण की पत्नियाँ-

कृष्ण ने आठ महिलाओं से विवाह किया। जिनके नाम ये है- रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा।

कृष्ण की प्रेमिकाएं-

राधा, ललिता आदि श्री कृष्ण की प्रेमिकाएं थीं, उनकी प्रेमिकाएं सखियों के नाम से भी जानी जाती थी। राधा की कुछ सखियां भी कृष्ण से प्रेम करती थीं जिनके नाम निम्न हैं- चित्रा, सुदेवी, ललिता, विशाखा, चम्पकलता, तुंगविद्या, इन्दुलेखा, रग्डदेवी और सुदेवी।

ब्रह्मवैवर्त्त पुराण अनुसार कृष्ण की प्रेमिकाएं ये है- चन्द्रावली, श्यामा, शैव्या, पद्या, राधा, ललिता, विशाखा और भद्रा।

शूरसेन की पीढ़ी में ही वासुदेव और कुंती का जन्म हुआ। कुंती तो पांडु की पत्नी बनी जबकि वासुदेव से कृष्ण का जन्म हुआ। कृष्ण से प्रद्युम्न का और प्रद्युम्न से अनिरुद्ध का जन्म हुआ।

प्रद्युम्न के पुत्र तथा कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध की पत्नी के रूप में उषा की ख्याति है। अनिरुद्ध की पत्नी उषा शोणितपुर के राजा वाणासुर की कन्या थी। अनिरुद्ध और उषा की प्रेम कहानी जगप्रसिद्ध है। भारतीय साहित्य में कदाचित यह एक अनोखी प्रेमकथा है जिसमें एक प्रेमिका स्त्री द्वारा पुरुष का हरण वर्णित है।

कृष्ण निवास-

मथुरा को हिंदुओं के लिए मदीना की तरह माना जाता है। कृष्ण ने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पल गोकुल, वृंदावन, गिरिराज और द्वारिका गुज़ारे है। मथुरा श्री कृष्ण की जन्मभूमि है और हिंदू धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल है।

कृष्ण को ढूंढने वाले अक्सर गोकुल, मथुरा, वृंदावन, गिरिराज जाते हैं, लेकिन जानकार मानते हैं कि द्वारिका में कृष्ण आराम करते हैं और मथुरा में काम और वैकुंठ में ध्यान।

कंस वध के बाद श्रीकृष्ण ने गुजरात के समुद्र के तट पर द्वारिका का निर्माण कराया और वहां एक नए राज्य की स्थापना की। हिंदुओं को चार धामों में से एक द्वारिका धाम को द्वारिकापुरी मोक्ष तीर्थ कहा जाता है। स्कंदपुराण में श्रीद्वारिका महात्म्य का वर्णन मिलता है।

कृष्ण महायोगी थे। योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने वेद और योग की शिक्षा और दीक्षा उज्जैन स्थित महर्षि सांदीपनि के आश्रम में रहकर हासिल की थी। कृष्ण के पास सुदर्शन चक्र था जिसे युद्ध में सबसे घातक हथियार माना जाता था।

कृष्ण ने एक ओर जहां अपनी माया द्वारा माता यशोदा को अपने मुंह के भीतर ब्रह्मांड के दर्शन करा दिए थे वहीं उन्होंने युद्ध के मैदान में उन्होंने अर्जुन को अपने विराट स्वरूप का दर्शन कराकर उसका भ्रम दूर किया था। दूसरी ओर उन्होंने द्रौपदी के चीरहरण के समय उसकी लाज बचाई थी।

वे योग में पारगत थे तथा योग द्वारा जो भी सिद्धियां होती हैं वे स्वत: ही उन्हें प्राप्त थीं। सिद्धियों से पार भी जगत है वे उस जगत की चर्चा गीता में करते हैं।

कृष्ण लीलाएं-

कृष्ण ने अपने जीवन में बहुत सी लीलाएँ की है। कंस ने बालक कृष्ण की हत्या करने के लिए पूतना राक्षसी को भेजा था। कृष्ण की माया के आगे पूतना बेबस रही। पूतना के अलावा कृष्ण ने शकटासुर, यमलार्जुन मोक्ष, कलिय-दमन, धेनुक, प्रलंब, अरिष्ट आदि राक्षसों का वध किया।

मथुरा में कंस का वध कर प्रजा को अत्याचारी राजा कंस से मुक्त करने के उपरांत कृष्ण ने अपने माता-पिता को भी कारागार से मुक्त कराया। जरासंध ने कालयवन के साथ मिलकर आक्रमण किया तब कृष्ण को मथुरा छोड़कर भागना पड़ा।

महाभारत का युद्ध-

कौरवों और पांडवों के बीच हस्तिनापुर की गद्दी के लिए कुरुक्षेत्र में विश्व का प्रथम विश्वयुद्ध हुआ था। कुरुक्षेत्र हरियाणा प्रांत का एक जिला है। मान्यता है कि यहीं भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। कृष्ण इस युद्ध में पांडवों के साथ थे। महाभारत का यह युद्ध 18 दिन तक चला था।

गीता प्रवचन-

कृष्ण ने महाभारत युद्ध के दौरान महाराजा पांडु एवं रानी कुंती के तीसरे पुत्र अर्जुन को जो उपदेश दिया वह गीता के नाम से प्रसिद्ध हुआ। वेदों का सार है उपनिषद और उपनिषदों के सार को गीता कहा गया है। ऋषि वेदव्यास महाभारत ग्रंथ के रचयिता थे। गीता महाभारत के भीष्मपर्व का हिस्सा है।

जैन धर्म-

जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर अरिष्ट नेमिनाथ भगवान कृष्ण के चचेरे भाई थे, कृष्ण इनके पास बैठकर इनके प्रवचन सुना करते थे। कृष्ण को जैन धर्म ने उनके त्रैषठ शलाका पुरुषों में शामिल किया है, जो बारह नारायणों में से एक है।

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