Popads

Wednesday, 27 November 2013

A must read.....व्यंग्य................नव वर्ष के संकल्‍प..................नया साल मुबारक............117413

नव वर्ष के संकल्‍प : अनुराग


मैंने नव वर्ष पर कुछ संकल्‍प लि‍ए हैं। मेरा दावा है कि‍ यदि‍ हर भारतीय इन संकल्‍पों को ले और इन पर अमल करे तो देश का वि‍कास होगा। फि‍‍र हर रात दि‍वाली और हर दि‍न होली होगी। हर भारतीय 27 मंजि‍ले घर में रहेगा और अपनी पत्‍नी को जेट वि‍मान खरीद कर दे सकेगा।

पहला संकल्‍प- इस साल कम से दो सौ लाख करोड़ का घोटाला करूंगा। लक्ष्‍मी जी तो आएंगी ही, साथ ही चर्चा में भी बना रहूंगा।

दूसरा संकल्‍प- मुझे जि‍स भी आयोजन की जि‍म्‍मेदारी सौंपी जाएगी, उसके लि‍ए एक का सामान सौ में खरीदूंगा। उसका कोई काम ऐसा नहीं होगा, जि‍समें पैसे नहीं बनाऊं। उन्‍हीं कम्‍पनि‍यों को काम के ठेके दूंगा, जो मेरे परि‍जनों को बोर्ड ऑफ डायरेक्‍टर में रखेंगी।

तीसरा संकल्‍प- अपने और अपने परिचि‍तों के हि‍त में लॉबिंग करूंगा। मंत्रीमंडल में उन्‍हीं मंत्रि‍यों को जगह दि‍लवाने का प्रयास करूंगा, जो मेरे और मेरे अपनों के हि‍त में नि‍र्णय लेंगे।

चौथा संकल्‍प- कि‍सी पर वि‍श्‍वास नहीं करूंगा और जो मुझ पर वि‍श्‍वास करेंगे, उन्‍हें हर हाल में धोखा दूंगा।

पांचवां संकल्‍प- महंगाई आसमान छू ले, परेशान कि‍सान आत्‍महत्‍या कर लें, अपराध कि‍तने भी बढ़ जाए, कुछ नहीं बोलूंगा। और अगर कुछ बोला तो बस मैडम-मैडम बोलूंगा।

छठा संकल्‍प- शासन-प्रशासन की तरह गांधीजी के तीन बंदरों से प्ररेणा लेकर न बुरा देखूंगा, न कहूंगा और न सुनूंगा।

सातवां संकल्‍प- जैसे गणेशजी ने अपने माता-पि‍ता शि‍व-पार्वती की परि‍क्रमा कर दुनि‍या का चक्‍कर लगा लि‍या था, वैसे ही मैं अपने घर-परि‍वार को सारा जहां मानूंगा और उसके हि‍त में हर तरह के काम करूंगा।

आठवां संकल्‍प- खेल से ज्‍याद कैटवॉक और वि‍ज्ञापनों पर ध्‍यान दूंगा। लगातार तीन टैस्‍ट मैचों में जीरो पर आउट होकर वि‍श्‍व रि‍कोर्ड बनाऊंगा।

नौंवा संकल्‍प- मैं प्रयोजि‍त खबरें लि‍खूंगा और फोन के अनुसार ही लेख लि‍खूंगा।

दसवां संकल्‍प- सरकार के दमन, शोषण, अन्‍याय, अत्‍याचार का गुणगान करूंगा। मैं आजाद रहना चाहता हूं।
.
.

नया साल मुबारक : भीमसेन त्‍यागी

 

 

वरि‍ष्‍ठ कथाकार भीमसेन त्‍यागी का यह व्‍यंग्‍य नूतन सवेरा के जनवरी, 1997 अंक में प्रकाशि‍त हुआ था।  उस समय त्‍यागीजी ने जो शंकाएं प्रकट की थीं, दुर्भाग्‍यवश वे और भी भीषण रूप में सामने है-
नया साल करीब आ रहा है और मेरी डाक में रंग-बिरंगे, खुशबूदार बधाई कार्डों की संख्या बढ़ती जा रही है। इन कार्डों में फूल हैं, पत्ते हैं, चिडिय़ा हैं, सुख-समृद्घि की शुभकामनाएँ हैं। मैं इन पत्रों को पढ़ता हूँ और दु:खी हो जाता हूँ। आश्‍चर्य है- इस प्रदूषित राजनैतिक माहौल में लोग खुशियों को मन के किस कोने में छिपाकर रखते हैं!
नये साल के शुभ अवसर पर आप मेरी बधाई स्वीकार करें। यह वर्ष निरंतर आपत्तियों और आशंकाओं से भरा रहे। केन्द्र और राज्यों में फिर चुनाव हों। लेकिन सरकार कहीं भी न बन सके। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पदों के लिए बराबर खींचतान चलती रहे। हम लोकतंत्र का असली मजा चखते रहें।
भूतपूर्व प्रधानमंत्रियों और मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप में मुकदमें चलते रहें। जिन नेताओं का नकाब अभी तक नहीं उठा है, उनका भी उठ जाए। सब सुखी हो जाएं। तिहाड़ जेल संसद भवन बन जाए। जय ललिता के घर से एक टन सोना और एक लाख जूते बरामद हों, ताकि देश अपनी समृद्घि पर गर्व कर सके! जो नेता भ्रष्ट सिद्घ हो जाएं उनका सार्वजनिक अभिनंदन हो और जो अभी तक भ्रष्ट नहीं हुए हों, उन पर राष्ट्रद्रोह के मुकदमे चलाए जाएं।
राजनैतिक भ्रष्टाचार के साथ-साथ सांस्कृतिक भ्रष्टाचार का भी विकास हो। सभी संस्कृतिकर्मी राजनेताओं के पिछलग्गू बन जाएं। भ्रष्टाचार की बहती गंगा में गोते लगाएं और मानद पदों के ऊँचे सिंहासन प्राप्त करें। जो इनाम पाकर भी सरकार को गाली देने का दु:साहस करें, उन्हें उनकी औकात बता दी जाए।
केन्द्र और राज्यों में कहीं सरकार हो तो उनका संचालन पार्टी प्रमुखों के रिमोट कंट्रोल से हो। राजनैतिक पार्टियों की अपनी-अपनी सेनाएं हों। तमाम गुण्डे उन सेनाओं के नायक हों। शांति तथा व्यवस्था बनाए रखने और सामाजिक न्याय दिलाने का काम उनके जिम्मे हो।
कोई किसी भले आदमी के मकान में लम्बे अर्से से रह रहा हो और सिर्फ किराया देकर मकान में जमें रहना चाहता हो तो नायक धमकी के बल पर मकान खाली करवा कर बेचारे मकान मालिक को सामाजिक न्याय दिलवायें। किरायेदार नायकों को धमकी में न आए तो वे प्रेमपूर्वक हत्या करके उसे तमाम दु:खों से मुक्त कर दें। पत्रकार ऐसे कल्याणकारी कामों का विरोध करें तो उनकी जम कर ठुकायी हो और समाचार पत्रों के खिलाफ धर्मयुद्घ घोषित कर उनके दफ्तरों पर हमले किए जाएं।
नये साल में राजनेताओं और धर्मगुरूओं क संबंध प्रगाढ़ हों। वे मिलजुल कर घोटाला उद्योग का विकास करें। कोई सिरफिरा लक्खूभाई उन्हे मुकदमें में फंसाकर तिहाड़ भिजवा दे तो वे एक दूसरे के आंसू पोंछ कर आध्यात्मिक सुख प्राप्त करें।
देश में भीषण बाढ़ आए और अकाल पड़ें। नेता हेलिकॉप्टरों में बैठ कर त्रस्त इलाकों का दौरा करें और उनकी मदद के लिए मोटी-मोटी रकम मंजूर कराएं !
पुलिस के उच्च अधिकारी सुदंर महिलाओं की लिस्ट बनाएं और निर्भीक होकर एक-एक के साथ छेडख़ानी करें।
अति-अति महत्वपूर्ण दो प्रतिशत लोगों की भाषा हिं‍गलीश को देखकर देश की राष्ट्रभाषा घोषित की जाय। हिन्दी तथा अन्य प्रादेशिक भाषाओं में काम करने और बोलने को अपराध माना जाय!
नये साल में फिल्मी तारों और तारिकाओं के यहां बड़े-बड़े छापे पड़ें, ताकि उनके स्टेटस और काम करने के पारिश्रमिक की दरों में बृद्घि हो।
माइकेल जैक्सन बार-बार हमारे देश में आएं और फूहड़ भांड संस्कृति को स्थापित करें। वह ज्यादा से ज्यादा भारतीय लड़कियों के साथ नाचें, ताकि वे नहाना-धोना बंद कर दें और इस तरह जो पानी बचे, उससे कुछ प्यासों की प्यास बुझायी जा सके!
हमारे तमाम बेहतरीन खिलाड़ी खूबसूरत माडलों और एक्ट्रेसों से शादी कर लें और खेल के मैदान में दूसरों को जीतने का मौका देकर अपनी उदारता का परिचय दें!
देश में अंतर्राष्टरीय सौंदर्य प्रतियोगिता का आयोजन हो और फिर मुहल्ले-मुहल्ले में वैसी प्रतियोगिताएं होती रहें! तमाम खूबसूरत लड़कियां कपड़ों में से निकल कर फ्लोर पर आ जाएं और दर्शकों की आंखों की सिकाई करती रहें।
भूमंडलीकरण और नयी आर्थिक नीति का खुल कर विस्तार हो। देश में बहुराष्टरीय कंपनियों की बाढ़ आ जाए। बाजार बिदेशी माल से पटे रहें। विज्ञापन का जादम लोगों में अंतराष्ट्रीय स्तर की विदेशी चीजें इस्तेमाल करने का उन्माद जगाए। देशी कारखाने एक-एक कर बंद होते रहें। मुल्क में बेरोजगारी बढ़े। नौजवानों को भरपूर आराम और मनोरंजन के अवसर मिलें।
देश में विदेशी टी.वी. चैनलों की भरमार हो! वे टी.वी. चैनल देशी भगवान को बेच कर खाते रहें। ज्यादा से ज्यादा सैक्स और अपराध परोसें! बेडरूम सिमटकर टी.वी. के स्क्रीन पर आ जाए। अवैध संबंधों और बलात्कारों में उफान आए। फैशन की मारी अधनंगी समाजसेविकाएं बलात्कार के विरूद्घ प्रदर्शन करती रहें !
गली-गली में बीयर बार खुले। घी-दूध की तमाम नदियां सूख जाएं और उनमें शराब उफन-उफन कर बहे। सुदंर बार-बालाएं अपने ग्राहकों का हर तरह से मनोरंजन करती रहें।
हम गरीबी, बेरोजगारी और भूखमरी का ताज पहन कर शान के साथ इक्कीसवीं सदी में प्रवेश करें।
नया साल आपके लिए छोटी-छोटी खुशियां और बड़े-बड़े गम लेकर आए।

.
.
.
  Naughty Jokes..........
.
.
.
Maha Faadu jokes........

No comments:

Post a Comment