Tuesday, 5 November 2013

450 करोड़ के मिशन मंगल से जुड़ी 10 हैरतभरी बातें !!!.....................111813


450 करोड़ के मिशन मंगल से जुड़ी 10 हैरतभरी बातें !!!
- काउंटडाउन शुरू... इंतजार की घड़ियां खत्म !
- अहम है यह अभियान, भारत पर टिकी दुनिया की नजर
- मोदी ने कहा 'गुड लक', 2 बजकर 38 मिनट पर उड़ेगा मंगल यान

मंगलयान यानी हमें मंगल ग्रह तक पहुंचाने वाला जरिया। चेन्नई से 80 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा से 2 बजकर 38 मिनट पर इतिहास लिखे जाने की तैयारी है... और यही यान हमें लाल ग्रह तक ले जाएगा।

यूं तो मिशन मार्स को लेकर बीते कई दिनों से चर्चा जारी है, लेकिन आज अंतरिक्ष विज्ञानियों समेत पूरे देश के लिए अहम दिन है। आइए जानते हैं कि इस मिशन की कामयाबी के क्या मायने हैं और इसका मतलब क्या है।

1. मंगलयान। हिंदी के इस शब्द के मायने हैं, हमें मंगल तक ले जाने वाला यान। तमिलनाडु की राजधानी से 80 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा से इसे 2.38 मिनट पर भेजे जाने की तैयारी है।

2. भारत लाल ग्रह तक पहुंचने की कोशिश करने वाला दुनिया का केवल चौथा मुल्क है। हमसे पहले सोवियत संघ, अमेरिका और यूरोप यह कारनामा कर चुके हैं।

3. यह देश का पहला मंगल मिशन है और कोई भी मुल्क पहली कोशिश में कामयाब नहीं रहा है। दुनिया ने मंगल तक पहुंचने की 40 कोशिश की, लेकिन इनमें से 23 बार वह नाकाम रही। जापान को 1999 और 2011 में चीन को भी असफलता का मुंह देखना पड़ा।

4.स्वदेशी स्तर पर तैयार पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) का नया वर्जन, एक्सटेंडेड रॉकेट के साथ मंगलयान को पृथ्वी के आखिरी छोर तक ले जाएगा। इसके बाद सैटेलाइट के ‌थ्रस्टर छह छोटे फ्यूल बर्न वाली प्रक्रिया शुरू करेंगे, जो उसे और बाहरी परिधि में ले जाएगा। और आखिरकार गुलेल जैसी प्रक्रिया से इसे लाल ग्रह की ओर रवाना किया जाएगा।

5. मंगलयान के सफर से जुड़ा कार्यक्रम भी दिलचस्प है। 300 दिन और 78 करोड़ किलोमीटर का सफर कर वह ऑरबिट मार्स में पहुंचेगा और वहां के वातावरण का अध्ययन करेगा।

6. यह यान जब ग्रह के सबसे करीब होगा, तब इसकी दूरी उसके सरफेस से 365 किलोमीटर होगी। और जब सबसे दूर होगा, तो दोनों के बीच फासला 80 हजार किलोमीटर होगा।

7. सवाल उठता है कि इतना खर्च करने के बाद हमें हासिल क्या होगा? मंगलयान पर लगने वाले पांच सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरण यह पता लगाएंगे कि मंगल पर मौसम की प्रक्रिया किस तरह काम करती है। साथ ही वह इस बात की तफ्तीश भी करेंगे कि उस पानी का क्या हुआ, जो काफी पहले मंगल ग्रह पर बड़ी मात्रा में हुआ करता था।

8. मंगलयान मंगल ग्रह पर मीथेन गैस की भी तलाश भी करेगा, जो पृथ्वी पर जीवन को जन्म देने वाली प्रक्रिया में अहम रसायन रहा है। इससे भौगोलिक प्रक्रियाओं को जानने में मदद मिलेगी।

9. कोई भी उपकरण इन सवालों का जवाब देने लायक पर्याप्त आंकड़े नहीं भेजेगा, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन डाटा से यह पता लगेगा कि ग्रह भौगोलिक रूप से कैसे विकसित हुए हैं? ऐसी कौन सी स्थितियां हैं, जो जीवन को जन्म देती हैं और ब्रह्मांड में और जीवन कहां हो सकता है?

10. 2008-09 में इसरो ने चंद्रयान 1 लॉन्च किया था, जिसने पता लगाया कि चांद पर पानी रहा है। मंगलयान को उसी टेक्‍नोलॉजी के आधार पर तैयार किया गया है, जिसे हमने चंद्रयान मिशन के दौरान टेस्ट किया था।

450 करोड़ के मिशन मंगल से जुड़ी 10 हैरतभरी बातें !!!
- काउंटडाउन शुरू... इंतजार की घड़ियां खत्म !
- अहम है यह अभियान, भारत पर टिकी दुनिया की नजर
- मोदी ने कहा 'गुड लक', 2 बजकर 38 मिनट पर उड़ेगा मंगल यान

मंगलयान यानी हमें मंगल ग्रह तक पहुंचाने वाला जरिया। चेन्नई से 80 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा से 2 बजकर 38 मिनट पर इतिहास लिखे जाने की तैयारी है... और यही यान हमें लाल ग्रह तक ले जाएगा।

यूं तो मिशन मार्स को लेकर बीते कई दिनों से चर्चा जारी है, लेकिन आज अंतरिक्ष विज्ञानियों समेत पूरे देश के लिए अहम दिन है। आइए जानते हैं कि इस मिशन की कामयाबी के क्या मायने हैं और इसका मतलब क्या है।

1. मंगलयान। हिंदी के इस शब्द के मायने हैं, हमें मंगल तक ले जाने वाला यान। तमिलनाडु की राजधानी से 80 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोटा से इसे 2.38 मिनट पर भेजे जाने की तैयारी है।

2. भारत लाल ग्रह तक पहुंचने की कोशिश करने वाला दुनिया का केवल चौथा मुल्क है। हमसे पहले सोवियत संघ, अमेरिका और यूरोप यह कारनामा कर चुके हैं।

3. यह देश का पहला मंगल मिशन है और कोई भी मुल्क पहली कोशिश में कामयाब नहीं रहा है। दुनिया ने मंगल तक पहुंचने की 40 कोशिश की, लेकिन इनमें से 23 बार वह नाकाम रही। जापान को 1999 और 2011 में चीन को भी असफलता का मुंह देखना पड़ा।

4.स्वदेशी स्तर पर तैयार पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) का नया वर्जन, एक्सटेंडेड रॉकेट के साथ मंगलयान को पृथ्वी के आखिरी छोर तक ले जाएगा। इसके बाद सैटेलाइट के ‌थ्रस्टर छह छोटे फ्यूल बर्न वाली प्रक्रिया शुरू करेंगे, जो उसे और बाहरी परिधि में ले जाएगा। और आखिरकार गुलेल जैसी प्रक्रिया से इसे लाल ग्रह की ओर रवाना किया जाएगा।

5. मंगलयान के सफर से जुड़ा कार्यक्रम भी दिलचस्प है। 300 दिन और 78 करोड़ किलोमीटर का सफर कर वह ऑरबिट मार्स में पहुंचेगा और वहां के वातावरण का अध्ययन करेगा।

6. यह यान जब ग्रह के सबसे करीब होगा, तब इसकी दूरी उसके सरफेस से 365 किलोमीटर होगी। और जब सबसे दूर होगा, तो दोनों के बीच फासला 80 हजार किलोमीटर होगा।

7. सवाल उठता है कि इतना खर्च करने के बाद हमें हासिल क्या होगा? मंगलयान पर लगने वाले पांच सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरण यह पता लगाएंगे कि मंगल पर मौसम की प्रक्रिया किस तरह काम करती है। साथ ही वह इस बात की तफ्तीश भी करेंगे कि उस पानी का क्या हुआ, जो काफी पहले मंगल ग्रह पर बड़ी मात्रा में हुआ करता था।

8. मंगलयान मंगल ग्रह पर मीथेन गैस की भी तलाश भी करेगा, जो पृथ्वी पर जीवन को जन्म देने वाली प्रक्रिया में अहम रसायन रहा है। इससे भौगोलिक प्रक्रियाओं को जानने में मदद मिलेगी।

9. कोई भी उपकरण इन सवालों का जवाब देने लायक पर्याप्त आंकड़े नहीं भेजेगा, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन डाटा से यह पता लगेगा कि ग्रह भौगोलिक रूप से कैसे विकसित हुए हैं? ऐसी कौन सी स्थितियां हैं, जो जीवन को जन्म देती हैं और ब्रह्मांड में और जीवन कहां हो सकता है?

10. 2008-09 में इसरो ने चंद्रयान 1 लॉन्च किया था, जिसने पता लगाया कि चांद पर पानी रहा है। मंगलयान को उसी टेक्‍नोलॉजी के आधार पर तैयार किया गया है, जिसे हमने चंद्रयान मिशन के दौरान टेस्ट किया था।

1 comment:

  1. शुभ 'मंगल': पहला पड़ाव कामयाब, आगे बढ़ा यान !!!

    भारत ने मंगल अभियान के लिए अपना महात्वाकांक्षी मंगलयान आज लॉन्च कर दिया। और पहला पड़ाव कामयाबी के साथ्‍ा पूरा करते हुए वह पृथ्वी की कक्षा में भी पहुंच गया।
    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञनिकों ने मिशन को ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) सी25 के जरिए श्री हरिकोटा से 2 बजकर 38 मिनट पर रवाना किया।
    मिशन के 20 से 25 दिनों तक धरती की कक्षा में घूमने और फिर नौ महीने के सफर के बाद मंगलयान 24 सितंबर 2014 को मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश करेगा।
    वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक मंगल यान सफलतापूर्वक आगे कदम बढ़ा रहा है।
    नामचीन वैज्ञानिक और शिक्षाविद यशपाल ने कहा, 'हमने जो हासिल किया वह अतुलनीय है। वैज्ञानिकों ने वह हासिल किया जो वे चाहते हैं। यह मेरे लिए इसलिए बेहद खास है क्योंकि मैंने जीते जी इसे देखा है। उन्होंने मजकिया अंदाज में कहा कि अरे यार अब तो दूसरे ग्रह के लोगों से बात कराओ।'
    इसरो के निदेशक डॉ. राधाकृष्‍णन ने इस अवसर पर अपनी पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा, ''मुझे यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि यह पीएसएलवी की 25वीं उड़ान है। मैं समस्त इसरो परिवार को बधाई देता हूं, जिन्होंने बेहद कम वक्‍त में यह मुमकिन कर दिखाया।"
    इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री और पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ने कहा, "हम सभी वैज्ञानिक साथियों को भाजपा की ओर से बधाई देते हैं। उनके सफल प्रयासों के कारण भारत अंतरिक्ष में भी काफी ऊंचाइयों तक पहुंच रहा है।"
    माना जा रहा है कि उड़ान भरने के बाद रॉकेट को पृथ्वी की कक्षा में उपग्रह को छोड़ने में करीब 40 मिनट का समय लगेगा।
    मंगलयान पर नजर रखने के लिए पोर्ट ब्लेयर, बंगलुरु के नजदीक बायलालू, ब्रुनेई और दक्षिणी प्रशांत महासागर में शिपिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया के पोत एससीआई नालंदा और एससीआई यमुना को केंद्र बनाया गया है।
    ये मिशन अगर सफल रहता है तो भारत ऐसा करने वाला अमेरिका, रूस और यूरोप के बाद चौथा देश बन जाएगा।
    यूरोपीय संघ की यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी, अमेरिकी एजेंसी नासा और रूस की रॉसकोसमॉस ऐसा करने में सफल हो चुकी है। अभी तक मंगल पर 51 मिशन भेजे गए हैं जिनमें से केवल 21 सफल हुए हैं। मिशन का खर्च 450 करोड़ रुपए है।
    स्वदेशी स्तर पर तैयार पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) का नया वर्जन, एक्सटेंडेड रॉकेट के साथ मंगलयान को पृथ्वी के आखिरी छोर तक ले जाएगा।
    इसके बाद सैटेलाइट के ‌थ्रस्टर छह छोटे फ्यूल बर्न वाली प्रक्रिया शुरू करेंगे, जो उसे और बाहरी परिधि में ले जाएगा। और आखिरकार गुलेल जैसी प्रक्रिया से इसे लाल ग्रह की ओर रवाना किया जाएगा।
    सवाल उठता है कि इतना खर्च करने के बाद हमें हासिल क्या होगा? मंगलयान पर लगने वाले पांच सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरण यह पता लगाएंगे कि मंगल पर मौसम की प्रक्रिया किस तरह काम करती है।
    साथ ही वह इस बात की तफ्तीश भी करेंगे कि उस पानी का क्या हुआ, जो काफी पहले मंगल ग्रह पर बड़ी मात्रा में हुआ करता था।

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