Wednesday, 20 November 2013

श्री एकनाथ रानाडे - विवेकानंद शिला स्मारक के शिल्पकार...................115013

श्री एकनाथ रानाडे - विवेकानंद शिला स्मारक के शिल्पकार
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श्री एकनाथ रानाडे (19 नवंम्बर 1914 - 22 अगस्त 1980) को कोटि-कोटि श्रद्धांजलि और स्नेहपूर्ण स्मरण
 

स्वामी विवेकानन्द शिला स्मारक (विवेकानन्द रॉक मेमोरियल) तमिलनाडु राज्य के कन्याकुमारी शहर में स्थित है। 1892 में स्वामी विवेकानंद कन्याकुमारी आए थे। एक दिन वे तैरकर इस विशाल शिला पर पहुंच गए। इस शिला पर ही तीन दिनों तक ध्यानस्थ होकर साधना करने के बाद उन्हें जीवन लक्ष्य की प्राप्ति हेतु मार्गदर्शन प्राप्त हुआ था। उनके अमर संदेशों को साकार रूप देने के लिए 1970 में इस विशाल शिला पर एक भव्य स्मृति भवन का निर्माण किया गया।

विवेकानंद रॉक मेमोरियल बनाने का काम स्वामी विवेकानंद की जन्मशती के उपलक्ष्य में 1963 में शुरु हुआ था। इसे बनाने में सात वर्ष का समय लगा था। इस स्मारक को बनाने के राष्ट्रीय प्रयास में करीब तीस लाख लोगों ने आर्थिक सहायता दी। इन सभी व्यक्तियों ने कम से कम एक-एक रुपए का योगदान दिया। इस स्मारक के निर्माण के लिये आन्दोलन करने एवं सफलतापूर्वक इसको साकार रूप देने का श्रेय महान संत एकनाथ रानाडे को जाता है। एकनाथ रानाडे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक समर्पित कार्यकर्ता थे। स्वयं सरसंघचालक गुरुजी ने ही शिला स्मारक का काम श्री एकनाथ रानाडे के कंधों पर डाला था।

सरसंघचालक गुरुजी रामकृष्ण मिशन के दीक्षाप्राप्त संन्यासी थे, इसलिए जब 1963 में विवेकानन्द जन्मशताब्दी महोत्सव का अवसर आया, तो उन्होंने संघ की ओर से स्वामी विवेकानन्द जन्मशताब्दी कार्यक्रम आयोजित किया। उन्हीं दिनों केरल में प्रसिद्ध समाजसेवी श्री मन्नथ पद्मनाभन के नेतृत्व में कन्याकुमारी स्थित "विवेकानन्द रॉक मेमोरियल समिति" की स्थापना की गई। श्री पद्मनाभन ने इस स्मारक के काम के लिए संघ के सहयोग की मांग की। तब पू. गुरुजी ने इसके लिए एकनाथ रानाडे को नियुक्त किया।

इस स्मारक का ईसाइयों ने विरोध किया था। केंद्र और राज्य सरकारें भी विरोध में थी परन्तु श्री रानाडे ने इन विरोधों का सफलतापूवर्क सामना किया। उन्होंने स्मारक निर्मिति का अनुमोदन करने वाले 386 लोकसभा सदस्यों का लिखित समर्थन प्राप्त किया। स्मारक निर्माण के लिए प्रचण्ड धनराशि एकत्र की और स्वामी विवेकानन्द राष्ट्रीय स्मारक का स्वप्न साकार किया।

आज भी कन्याकुमारी के तीन सागरों के संगम पर स्थित "स्वामी विवेकानन्द शिला स्मारक" की याद आते ही इस भव्य स्मारक के शिल्पकार "श्री एकनाथ रानाडे" का चित्र आंखों के सामने साकार हो जाता है।


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