Friday, 1 November 2013

दिवाली पर कैसे करें लक्ष्मी - गणेश का पूजन......................110813



कैसे करें लक्ष्मी - गणेश का पूजन






दिवाली के दिन जहां व्यापारी अपनी दुकान या प्रतिष्ठान पर दिन के समय लक्ष्मी का पूजन करते हैं , वहीं गृहस्थ लोग शाम को प्रदोष काल में महालक्ष्मी का आह्वान करते हैं। गोधूलि लग्न में पूजा आरंभ करके महानिशीथ काल तक अपने अपने अस्तित्व के अनुसार महालक्ष्मी के पूजन को जारी रखा जाता है । लक्ष्मी पूजनकर्ता दिवाली के दिन जिन पंडित जी से लक्ष्मी का पूजन कराएं , हो सके तो उन्हें सारी रात अपने यहां रखें। उनसे श्रीसूक्त , लक्ष्मी सहस्रनाम आदि का पाठ और हवन कराएं।


कैसे करें तैयारी




एक थाल में या भूमि को शुद्ध करके नवग्रह बनाएं अथवा नवग्रह का यंत्र स्थापित करें। इसके साथ ही एक तांबे का कलश बनाएं , जिसमें गंगाजल दूध दही - शहद सुपारी सिक्के और लौंग आदि डालकर उसे लाल कपड़े से ढककर एक कच्चा नारियल कलावे से बांध कर रख दें। जहां पर नवग्रह यंत्र बनाया है वहां पर रुपया , सोना या चांदी का सिक्का लक्ष्मी जी की मूर्ति अथवा मिट्टी के बने हुए लक्ष्मी गणेश सरस्वती जी अथवा ब्रह्मा , विष्णु , महेश आदि देवी देवताओं की मूर्तियां अथवा चित्र सजाएं । कोई धातु की मूर्ति हो तो उसे साक्षात रूप मानकर दूध दही और गंगाजल से स्नान कराएं। अक्षत , चंदन का श्रृंगार करके फल फूल आदि से सज्जित करें। इसके ही दाहिने ओर एक पंचमुखी दीपक अवश्य जलाएं। जिसमें घी या तिल का तेल प्रयोग किया जाता है ।


क्या है लक्ष्मी पूजन की विधि




लक्ष्मीपूजनकर्ता स्नान आदि नित्यकर्म से निवृत होकर पवित्र आसन पर बैठकर आचमन , प्राणायाम करके स्वस्ति वाचन करें। अनन्तर गणेशजी का स्मरण कर अपने दाहिने हाथ में गन्ध , अक्षत , पुष्प , दूर्वा , द्रव्य और जल आदि लेकर दीपावली महोत्सव के निमित्त गणेश , अम्बिका , महालक्ष्मी , महासरस्वती , महाकाली , कुबेर आदि देवी - देवताओं के पूजनार्थ संकल्प करें। इसके बाद सर्वप्रथम गणेश और अम्बिका का पूजन करें। इसके बाद नवग्रह पूजन करके महालक्ष्मी आदि देवी - देवताओं का पूजन करें।
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लक्ष्मी पूजन सामग्री | Material For Lakshmi Worship



इस पूजन में रोली, मौली, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, धूप, कपूर, अगरबत्ती, गुड़, धनिया, अक्षत, फल-फूल, जौं, गेहुँ, दूर्वा, श्वेतार्क के फूल, चंदन, सिंदूर, दीपक, घृत, पंचामृत, गंगाजल, नारियल, एकाक्षी नारियल, पंचरत्न, यज्ञोपवित, मजीठ, श्वेत वस्त्र, इत्र, फुलेल, पान का पत्ता, चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला, शंख, कुबेर यंत्र, श्री यंत्र, लक्ष्मी गणेश जी का चित्र या प्रतिमा, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, मिष्ठान इत्यादि वस्तुओं को पूजन समय रखना चाहिए.


लक्ष्मी पूजन विधि नियम | Rituals To Worship Goddess Lakshmi


लक्ष्मी पूजन घर के पूजा स्थल या तिजोरी रखने वाले स्थान पर करना चाहिए, व्यापारियों को अपनी तिजोरी के स्थान पर पूजन करना चाहिए. उक्त स्थान को गंगा जल से पवित्र करके शुद्ध कर लेना चाहिए, द्वारा कक्ष में रंगोली को बनाना चाहिए, देवी लक्ष्मी को रंगोली अत्यंत प्रिय है. सांयकल में लक्ष्मी पूजन समय स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्रों को धारण करना चाहिए विनियोग द्वारा पूजन क्रम आरंभ करें.
अपसर्पन्त्विति मन्त्रस्य वामदेव ऋषि:, शिवो देवता, अनुष्टुप छन्द:, भूतादिविघ्नोत्सादने विनियोग:
मंत्र :- अपसर्पन्तु ते भूता ये भूता भूतले स्थिता:
ये भूता विघ्नकर्तारस्ते नश्यन्तु शिवाज्ञया ||
लक्ष्मी गणेश के चित्र, श्री यंत्र को लाल वस्त्र बिछाकर चौकी पर स्थापित करें.  आसन पर पूर्वाभिमुख या उत्तराभिमुख होकर बैठे तथा यह मंत्र बोल कर अपने उपर पूजन सामग्री पर जल छिड़कना चाहिए.
मंत्र:- अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।
: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं : बाह्याभंतर: शुचि:।।
उसके बाद जल-अक्षत लेकर पूजन का संकल्प करें- विष्णुर्विष्णुर्विष्णु: श्रीमद्भगवतो महापुरूषस्य विष्णोराज्ञप्रवर्तमानस्य ब्रह्मणोSह्नि द्वितीयपराधें श्रीश्वेतवाराहकल्पे वीवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे आर्यावर्तैकदेशे अद्य मासोत्तमे मासे कार्तिकमासे कृष्णपक्षे पुण्यायाममावास्यायां तिथि, वार और गोत्र के नाम का उच्चारण करना चाहिए,
अहंश्रुतिस्मृतिपुराणोक्तफलावाप्तिकामनया ज्ञाताज्ञातकायिकवाचिकमानसिक सकलपापनिवृत्तिपूर्वकं स्थिरलक्ष्मीप्राप्तये श्रीमहालक्ष्मीप्रीत्यर्थं महालक्ष्मीपूजनं कुबेरादीनां पूजनं करिष्ये। तदड्त्वेन गौरीगणपत्यादिपूजनं करिष्ये।
अब संकल्प का जल भूमि पर छोड़ दें. सर्वप्रथम भगवान गणेश का पूजन करना चाहिए. इसके बाद गंध, अक्षत, पुष्प इत्यादि से कलश पूजन तथा उसमें स्थित देवों का षोडशपूजन करें. तत्पश्चात प्रधान पूजा में मंत्रों द्वारा भगवती महालक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन करें. पूजन पूर्व श्री यंत्र, शंख, सिक्कों आदि की मंत्र द्वारा पूजा करनी चाहिए. लाल कमल पुष्प लेकर मंत्र से देवी का ध्यान करना चाहिए,



न्यास | Nyas


श्रीआनन्द कर्दम चिक्लीतेन्दिरा सुता ऋषिभ्यो नमः शिरसि। अनुष्टुप् वृहति प्रस्तार पंक्ति छन्दोभ्यो नमः मुखे। श्रीमहालक्ष्मी देवताय नमः हृदि। श्रीमहा लक्ष्मी प्रसाद सिद्धयर्थे राज वश्यार्थे सर्व स्त्री पुरुष वश्यार्थे महा मन्त्र जपे विनियोगाय नमः।

कर-न्यास | Kar - Nyas

हिरण्मय्यै अंगुष्ठाभ्यां नमः। चन्द्रायै तर्जनीभ्यां स्वाहा। रजत-स्त्रजायै मध्यमाभ्यां वषट्। हिरण्य-स्त्रजायै अनामिकाभ्यां हुं। हिरण्य-स्त्रक्षायै कनिष्ठिकाभ्यां वौषट्। हिरण्य-वर्णायै कर-तल-करपृष्ठाभ्यां फट्।

अंग-न्यास | Ang - Nyas

हिरण्मय्यै नमः हृदयाय नमः। चन्द्रायै नमः शिरसे स्वाहा। रजत-स्त्रजायै नमः शिखायै वषट्। हिरण्य-स्त्रजायै नमः कवचाय हुं। हिरण्य-स्त्रक्षायै नमः नेत्र-त्रयाय वौषट्। हिरण्य-वर्णायै नमः अस्त्राय फट्।

ध्यान | Meditation

अरुण-कमल-संस्था, तद्रजः पुञ्ज-वर्णा,
कर-कमल-धृतेष्टा, भीति-युग्माम्बुजा च।
मणि-मुकुट-विचित्रालंकृता कल्प-जालैर्भवतु-
भुवन-माता सततं श्रीः श्रियै नः।।

महामन्त्र | Maha Mantra

श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये मह्य प्रसीद-प्रसीद महा-लक्ष्मि, ते नमः।
विधिवत रुप से श्रीमहालक्ष्मी का पूजन करने के बाद हाथ जोड़कर प्रार्थना करनी चाहिए. इस दिन की विशेषता लक्ष्मी जी के पूजन से संबन्धित है. इस दिन हर घर, परिवार, कार्यालय में लक्ष्मी जी के पूजन के रुप में उनका स्वागत किया जाता है.
 






3 comments:

  1. दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन शुभ समय मुहूर्त्त समय पर ही किया जाना चाहिए. पूजा को सांयकाल अथवा अर्द्धरात्रि को अपने शहर व स्थान के मुहुर्त्त के अनुसार ही करना चाहिए. इस वर्ष 3 नवम्बर, 2013 को रविवार के दिन दिवाली मनाई जाएगी. स्वाती नक्षत्र का काल रहेगा, इस दिन प्रीति योग तथा चन्दमा तुला राशि में संचार करेगा. दीपावली में अमावस्या तिथि, प्रदोष काल, शुभ लग्न व चौघाडिया मुहूर्त विशेष महत्व रखते है.
    3 नवम्बर 2013, रविवार के दिन 17:33 से लेकर 02 घण्टे 24 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा. इसे दिपावली पूजन के लिये शुभ मुहूर्त के रुप में उपयोग करते हैं. इस दिन पूजा स्थिर लग्न में करनी चाहिए क्योंकि शास्त्रों के अनुसार स्थिर लग्न दिवाली पूजा में उतम माना जाता है. इस दिन प्रदोष काल व स्थिर लग्न का समय सांय 18:15 से 20:09 तक रहेगा. इसके पश्चात 18:00 से 21:00 तक शुभ चौघडिया भी रहने से मुहुर्त की शुभता बनी रहेगी.

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