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Saturday, 5 October 2013

Hasya kavita...................एक युवा नेता, अपनी शादी हेतु, लड़की देखने पहुँचा.....................103313

एक युवा नेता,
अपनी शादी हेतु,
लड़की देखने पहुँचा.
देखता रहा,
मुंह करके ऊँचा नीचा.
लड़की देखकर,
मिठाई वगैरा खाकर.
लड़की वाले से बोला,
भाई साहब बुरा मत मानिये,
बस इतना जानिये.
आपकी लड़की हमें पसंद नहीं,
जो गुण चाहिए वो हैं नहीं.
जो गुण चाहिए बताता हूँ,
साफ साफ़ समझाता हूँ.
माथा हो मेनका गाँधी सा,
व्यक्तित्व हो सोनिया गाँधी सा.
एक बात हो ख़ास,
राजनाथ सिंह जैसा हो विश्वास.
मायावती जैसे हों बाल,
सांसद रेखा जैसे हों गाल.
लालू प्रसाद जैसे हो कलाकार,
जो विरोधियों का भी,
जीना करदे दुशवार.
सुषमा स्वराज्य जैसा हो अंदाज़,
मीरा कुमार जैसी हो आवाज,
जयललिता जैसा हो कुंवारापन,
मुलायम सिंह जैसा हो लचकीलापन.
शरद पंवार जैसे बढ़ाती हो पींग,
कम बोलती हो ज्यों मनमोहन सिंह.
शरद यादव जैसी हो बुद्धी,
पी चिदम्बरम जैसी हो जिद्दी.
दिग्विजयसिंह सी हो तिकड़मबाज,
कपिल सिब्बल सी हो बहानेवाज़.
इतना सुनते ही,
लड़की वाला बोला झल्लाया.
गुस्से में झुंझलाया,
लड़के से बोला बस कर,
बोलता ही रहेगा दिन भर.
जो भी खाया है,
उसका कर दो पेमैंट.
आपको लड़की नहीं,
आपको चाहिए पार्लियामैंट.
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एक गरीब कवि तंगी से परेशान होकर बैंक में डाका डालने गया…
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अर्ज किया है…
तकदीर में जो है वही मिलेगा,
खबरदार, कोई अपनी जगह से नहीं हिलेगा!

फिर कैशियर से बोला…
अपने कुछ ख्वाब मेरी आंखों से निकाल लो,
जो कुछ भी तुम्हारे पास है, जल्दी से मेरे बैग में डाल दो!

बहुत कोशिश करता हूं तेरी याद भुलाने की,
खबरदार, कोई कोशिश न करे पुलिस को बुलाने की!

फिर जाते-जाते…
भुला दे मुझे, क्या जाता है तेरा!
मैं गोली मार दूंगा, जो किसी ने किया पीछा मेरा!

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