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Monday, 9 September 2013

अखिलेश यादव की मुस्लिम तुष्टिकरण नीति का नतीजा है मुज्जफरनगर दंगा.....................96213

अखिलेश यादव की मुस्लिम तुष्टिकरण नीति का नतीजा है मुज्जफरनगर दंगा.धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था में सरकार की धार्मिक नीति यही होती है की उसे धर्म-समुदाय से कोई वास्ता नहीं,सभी उसकी नज़र में एक होने चाहिए.परन्तु अखिलेश औरंगजेब के रस्ते पर चल पड़े है.नतीजा आज जाटों को फिर बगावत पर उतरना पड़ा है.औरंगजेब ने हिन्दुओ पर अत्याचार किये,पूरा भारत उसके अत्याचारों से थर्रा रहा था.1657में मथुरा के कृष्ण मंदिर को ढहाया गया तो जाटों ने बगावत कर दी और औरंगजेब की धार्मिक नीति के खिलाफ पहली बार गर्दन उठी थी.यही आकर अखिलेश यादव फंस गया है.औरंगजेब ऑलमाइटी था,इसकी क्या औकात है वो आने वाले दिनों में पता चल जाएगी.परन्तु फ़िलहाल UP के लोंगो को तकलीफ भुगतनी पड़ रही है.अखिलेश सरकार की इस धार्मिक नीति से किसी का भला नहीं होने वाला है.चाहे वो मुस्लिम ही क्यों ना हो.इस देश में हिन्दू-मुस्लिम दंगो का लम्बा इतिहास है,दोनों संस्कर्तियों के बीच टकराव होता रहा है.परन्तु यह ऐसा टकराव नहीं है,वस्तुत जाट धार्मिक-कर्मकांड,धार्मिक कार्यों के प्रति उदासीन ही रहे है.हरियाणा में एक कहावत है की मेव का क्या मुसलमान,जाट का क्या हिन्दू?एसी जाति को धार्मिक संघर्ष में या तो औरंगजेब ने फंसाया था और अब अखिलेश ने यह श्रेय लिया है.इस दंगे के पीछे की कहानी UP की समाजवादी पार्टी की कलई खोलने वाली है.किस तरह इसके नेता अल्पसंख्यक वोटो के सौदाई हो गए है.27 अगस्त को दो जाट युवको की हत्या की गयी,उनका कसूर था की वो अपनी बहन के साथ हो रही छेड़खानी का विरोध करने गए थे.पूरे देश में लड़कियों से छेड़खानी के विरोध में मुहीम चल रही है.इस घटना को क्यों हलके रूप में लिया गया.फिर दो हत्याए कर दी,कोई कारवाही नहीं.ऐसे हालात में जाटों को विरोध करने का हक तो था,लेकिन उनकी पंचायत को अवैध घोषित किया गया.पंचायत हुई तो उन पर हमले की छुट दे दी,यह सब किया UP की सरकार ने.सब गलत-सही वोटो के चक्कर में.एक तरह सरकार ने खुद इस दंगे की भूमिका तैयार की है.सो यह एक सीधा हिन्दू-मुस्लिम दंगा नहीं है.इस तरह के तुष्टिकरण से मुस्लिम समाज को भी कोई फायदा नहीं होने वाला,यदि पढाई,रोजगार में मदद करे तो ठीक,यंहा तो लड़कियाँ छेड़ने के ठेके दे रही है सरकार.इस तरह के काम करने वाले शरारती तत्वों को प्रश्रय देने वाले भी जिम्मेवार है.क्या लड़कियों को स्कूल-कॉलेज जाने का भी अधिकार नहीं है.दंगो का अंधकार छंट जाएगा तो मुस्लिम समाज को आंकलन करना चाहिए की इनमे इन्होने क्या खोया है.क्योंकि जाट के साथ चाहे वो कितनी तैयारी से टकरा ले,नुकसान ज्यादा उसी का होगा.मुस्लिम तुष्टिकरण को कुछ लोंगो,संगठनो का जूमला माना जाता था लेकिन ऐसा सोचने वालो को इस घटना क्रम से सबक लेना चाहिए.लड़की छेड़ो,उसके भाई-बन्दुओ को मार डालो कोई कारवाही नहीं,क्योंकि आपके समुदाय को सरकार ने विशेष दर्जा दे रखा है.

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