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Thursday, 15 August 2013

REAL REASON WHY BRITISH GAVE US INDEPENDENCE...................89613

REAL REASON WHY BRITISH GAVE US INDEPENDENCE

Clement Attlee was the Prime Minister of Britain when India got freedom in 1947. Obviously, his words on Netaji hold relevance and assume great significance in any context. Attlee had visited Kolkata when P B Chakraborti was the Acting Governor of West Bengal. The following are the words selected from Chakraborty’s thanks note (dated March 30, 1976) for the publication of Dr R C Majumdar’s book.

“I had then a long talk with Attlee about the real grounds for the voluntary withdrawal of the British from India. I put it straight to him like this: The Quit India Movement of Gandhiji practically died out long before 1947 and there was nothing in the Indian situation at that time which made it necessary for the British to leave India in a hurry? Why did you then do so?

In reply Attlee cited several reasons, the most important of which are the activities of Netaji Subhas Chandra Bose which weakened the very foundations of the attachment of the Indian land and naval forces to the British Government.

I also asked Attlee about the extent to which their decision to quit India was influenced by Gandhiji’s activities. On hearing this, Attlee’s lips widened in a smile of disdain and he uttered slowly, putting strong emphasis on each single letter: ‘MI-NI-MAL’.”

But all these historical facts have been given the go-by by our history text books penned by pseudo-historians. It is high time to realise and recognise the great contributions of the real, but forgotten hero, Netaji Subhas Chandra Bose while building modern India.
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कोई भी राष्ट्र की तब तक अपराजित रहता जब तक उस राष्ट्र की संस्कृति अविजित रहती हे.
- विष्णुगुप्त चाणक्य.

आइये हम सभी इस राष्ट्र की सनातन वैदिक संस्कृति का संरक्षण और सवर्धन करने के लिए कृतसंकल्प हो. और चंद्रप्रकाश द्विवेदी की "चाणक्य" धारावाहिक के यह यशस्वी गीत को चरितार्थ करे.

हम करें राष्ट्र आराधन
तन से, मन से, धन से
तन मन धन जीवन से
हम करें राष्ट्र आराधन

अन्तर से, मुख से, कृती से
निश्र्चल हो निर्मल मति से
श्रद्धा से मस्तक नत से
हम करें राष्ट्र अभिवादन
हम करें राष्ट्र आराधन...

अपने हंसते शैशव से
अपने खिलते यौवन से
प्रौढ़ता पूर्ण जीवन से
हम करें राष्ट्र का अर्चन
हम करें राष्ट्र आराधन...

अपने अतीत को पढ़कर
अपना इतिहास उलटकर
अपना भवितव्य समझकरअश्तर
हम करें राष्ट्र का चिंतन
हम करें राष्ट्र आराधन...

है याद हमें युग युग की, जलती अनेक घटनायें
जो माँ के सेवा पथ पर, आई बनकर विपदायें
हमने अभिषेक किया था, जननी का अरिशोणित से
हमने श्रृंगार किया था माता का अरिमुंडो से

हमने ही उसे दिया था, सांस्कृतिक उच्च सिंहासन
माँ जिस पर बैठी सुख से, करती थी जग का शासन
अब काल चक्र की गति से, वह टूट गया सिंहासन
अपना तन मन धन देकर हम करें पुनः संस्थापन.

आप सभी मित्रो को स्वातंत्र्य दिन की अनेको शुभ कामनाये....
वन्दे मातरम् ...

1 comment:

  1. भय पैदा करेंगे दिलो में

    बापू, आपने गोली क्यों ख़ाली?
    क्यों ना आप की एक भी चली ?
    आपने कहा था, "स्वराज में दिलाउंगा?
    सही मायनो में "स्वत्तन्त्रता ले के रहूंगा

    आप चाहते तो शरीर पर कवह रख सकते थे
    चारो और कमांडो रखकर घूम सकते थे
    आपने ये नहीं किया और नई राह दिखा दी
    "आप का नाम लेकर इन्होने ऊँगली दिखा दी"

    आजादी का जश्न सिर्फ सरकारी बाबुओके के लिए है
    श्रमिक और भूखा आज भी वस्त्रहीन है
    ये चमचमाती गाड़ियाँ और ये कहलाने वाले उनके निवासस्थान
    सब एक साथ चला रहे है अपनी आन, बान और प्रतिष्ठान

    बापू आप कहते थे " देश गाँव में बसता है "
    किसान हल जोतता है तो "हमारा पेट भरता है"
    आज अस्सी रूपये प्याज और बीस रूपये आलू बिकता है
    श्रमिक आग उगलती धुप में और किसान रात में मरता है

    पता नहीं ये कौनसी भूख है जो मिटती ही नहीं?
    जिंदगीयाँ ख़त्म हो रही है पर महंगाई हटती ही नहीं
    मेरा देश फिर बेहाल हो रहा है, शराब रस्ते पर बिक रही है
    देश का कोई न सोचे ये बेल्कुल ही ठीक नहीं है !

    बापू यदि आज आप ज़िंदा होते तो बिलख बिलखकर रोते
    न आपसे रोते बनता और न शांति से सोते
    हरदम आपको इनका जीन आकर सताता
    मजबूर करता कुछ करने को और फिर खुब रूलाता

    ये सब हवाईजहाज के बिना चलते नहीं
    पंचतारक होटल के बिना जमते(खाते)नहीं
    सादगी इनसे कोसो दूर है और नामोनिशान तक नहीं
    आपकी तस्वीर ही बस बची है एक निशानी

    इनका निशान अब है गरीबों की बस्ती पर
    जब मर्जी आई जला दिया सस्ती लोकप्रियता पानेपर
    अब गरीब ही नहीं बचने देंगे आनेवाले दिनों में
    पढ़ाई तो दूर, दाने दाने के लिए भय पैदा करेंगे दिलो में

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