Friday, 23 August 2013

Humor....................हमने सूंघी है कहीं प्याज़ की महकती खुशबू.............................91513


ग़ज़ल " दो प्याज़ा "
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हमने सूंघी है कहीं प्याज़ की महकती खुशबू.
हाथ से छू लो इन्हें पर लेने का नाम न लो,
सिर्फ एहसास रखो औ रूह से महसूस करो.
प्याज़ का प्यार ही रहने दो कोई दाम न दो,

प्याज़ का मोल नहीं प्याज़ कोई प्यार नहीं.
एक झटका सा है जो धीरे से लगा करता है,
न ये रुकता है न झुकता न घटता है कभी.
इसका दाम जो है वो दिन रात बढ़ा करता है,

सिर्फ एहसास रखो औ रूह से महसूस करो.
प्याज़ का प्यार ही रहने दो कोई दाम न दो,

मुस्कराहट खिलती है दुकानदार के मुह पर.
खरीदार की जेबें तो दिन रात लुटा करती हैं,
होंठ कुछ कहते नहीं.कांपते होठों पर मगर.
किस्सा ए प्याज़ ही इक बात हुआ करती है,

सिर्फ एहसास रखो औ रूह से महसूस करो.
प्याज़ का प्यार ही रहने दो कोई दाम न दो,
ग़ज़ल " दो प्याज़ा "
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हमने सूंघी है कहीं प्याज़ की महकती खुशबू.
हाथ से छू लो इन्हें पर लेने का नाम न लो,
सिर्फ एहसास रखो औ रूह से महसूस करो.
प्याज़ का प्यार ही रहने दो कोई दाम न दो,

प्याज़ का मोल नहीं प्याज़ कोई प्यार नहीं.
एक झटका सा है जो धीरे से लगा करता है,
न ये रुकता है न झुकता न घटता है कभी.
इसका दाम जो है वो दिन रात बढ़ा करता है,

सिर्फ एहसास रखो औ रूह से महसूस करो.
प्याज़ का प्यार ही रहने दो कोई दाम न दो,

मुस्कराहट खिलती है दुकानदार के मुह पर.
खरीदार की जेबें तो दिन रात लुटा करती हैं,
होंठ कुछ कहते नहीं.कांपते होठों पर मगर.
किस्सा ए प्याज़ ही इक बात हुआ करती है,

सिर्फ एहसास रखो औ रूह से महसूस करो.
प्याज़ का प्यार ही रहने दो कोई दाम न दो,

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