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Saturday, 17 August 2013

स्वतंत्रता दिवस स्वतंत्रता दिवस का बंद करो ये आलाप...!!...................90313

स्वतंत्रता दिवस
स्वतंत्रता दिवस का
बंद करो ये आलाप...!!

शहीदों का उपहास
मत करो आप...!!

कौन सी स्वतंत्रता है
किसे मना रहे हो..?
बेवकूफ बना कर मेरा
माखौल उड़ा रहे हो..!!
शर्म नही आती तुमको
तिरंगा लहरहा रहो हो..
किसलिए ये झूटी
खुशिया मना रहे हो..!!
अंग्रेजो के चले जाने के
इतने सालों बाद भी
तुमने मेरा ये क्या हाल कर दिया !!
हिन्दू-मुस्लिम दंगों
बढ़ते भ्रस्ताचार और
नेताओ के कारनामों ने
मुझे बदनाम कर दिया..!!
नैतिकता व् मानवता का हनन
स्बदेशी संस्कृति और
ईमानदारी का
अंत कर दिया..!!
मैं खतरों से घिरी हूँ
पहले मुझे बचाओ...
सीमाओ पर मर रहे है सैनिक
उनकी दहशत मिटाओ...!!
अंग्रेजो से तो मुक्ति
दिल दी मुझे
अब भ्रस्ताचार.. बेईमानी.. कुशासन..
अराजकता.. स्वार्थता.. लूट-खसूट
अनैतिकता.. आतंकवाद.. और
भेदभाव से भी
मुझे स्वतंत्र कराओ...
जाओ....
पहले प्यार की फसल उगाओ
ईमानदारी के फूल खिलाओ
तब जाकर....
मेरी स्वतंत्रता का जश्न मनाओ...!!
कवि- पंकज तन्हा' नाहन जिला सिरमौर 9459023584

1 comment:

  1. पर्व ये कैसा आज़ादी का ?
    गर्व ये किस आज़ादी का ?
    जिसमें न भगत सिंह और आज़ाद को सम्मान मिला
    न नेताजी को जन्मभूमि पर अंतिम प्रयाण मिला
    आज़ादी के परवानों को बस अंधकार मिला
    सत्ता पर तो कातिलों को अधिकार मिला

    पर्व ये कैसा आज़ादी का ?
    गर्व ये किस आज़ादी का ?
    जिसमें न कश्मीर पर भारत को पूर्ण अधिकार मिला
    न पड़ोसी मुल्कों से सद्भाव और मैत्रीभाव मिला
    संप्रुभता के लुटेरों को यहाँ भाई सा सम्मान मिला
    लोकतंत्र के हत्यारों को राष्ट्रगौरव का मान मिला

    पर्व ये कैसा आज़ादी का ?
    गर्व ये किस आज़ादी का ?
    जिसमें न गरीब को भय-भूख से आराम मिला
    न किसान और जवान को उनका पूरा सम्मान मिला
    जनता को मंहगाई और भ्रष्टाचार ईनाम मिला
    हक़ की उठाई आवाज़ तो लाठी-बंदूकों का प्यार मिला

    पर्व ये कैसा आज़ादी का ?
    गर्व ये किस आज़ादी का ?
    जिसमें न गुलामी के चिन्हों से उद्धार मिला
    न सन चौरासी के दंगों को इंसाफ मिला
    आरक्षण और धर्मनिरपेक्षता का अभिशाप मिला
    मिला तो हमको खंडित राष्ट्रवाद मिला

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