Friday, 14 June 2013

विश्व रक्तदान दिवस आज :: साल में चार बार कर सकते हैं रक्तदान !......................63713


विश्व रक्तदान दिवस आज :: साल में चार बार कर सकते हैं रक्तदान !

रक्त का कोई विकल्प नहीं, इसे कारखाने या फैक्ट्री में बनाया नहीं जा सकता। किसी आवश्यकता पर रक्तदान से ही इसकी पूर्ति संभव है। जिले में ही दुर्घटना या अन्य परिस्थितियों में सालाना लगभग एक लाख यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है लेकिन मांग के सापेक्ष रक्तदान 60 फीसद ही हो पाता है।
कारणों की तह में जाएं तो भ्रांतियां लोगों के कदम रक्तदान के लिए जाने से रोक लेती हैं। डा. अरविंद सिंह के अनुसार रक्तदान से नुकसान तो नहीं होता लेकिन सामाजिक लाभ अधिक हैं।

इसे भी जानें...

-नाड़ियों में बह रहे रक्त की (आरबीसी) लाल रक्त कणिकाएं 120 दिन में वैसे भी विघटित हो जाती हैं। रक्तदान करने से इनका किसी की जान बचाने में उपयोग हो जाता है।
-18 से 65 वर्ष आयु वर्ग के लोग हर तीसरे माह रक्तदान कर सकते हैं।
-रक्तदान से किसी तरह की कमजोरी नहीं होती है। 350 एमएल रक्तदान की पूर्ति 24 घंटे के अंदर हो जाती है।
-रक्त बैंक में दिया जाने वाला रक्त शरीर के रिजर्व से लिया जाता है। इससे शरीर पर कोई प्रभाव नहीं होता।
-किसी भी जनसंख्या का चार फीसद रक्तदान करे तो रक्त बैंक से निकलने वाला रक्त शत प्रतिशत स्वैच्छिक होगा।
-रक्त संबंधियों को आपस में रक्त का आदान प्रदान नहीं करना चाहिए। इससे परिसंचरण से जुड़े रोग हो सकते हैं।
-एक यूनिट ताजा रक्त से चार लोगों की जान बच सकती है। इसके चार अवयव यानी पैक्ड सेल (आरबीसी), प्लेटलेट, प्लाज्मा व फ्रेश फ्रोजेन प्लाज्मा अलग-अलग लोगों को आवश्यकतानुसार चढ़ाए जाते हैं।

डब्ल्यूएचओ का स्वैच्छिक रक्तदान पर जोर

रक्तदाताओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 2004 से हर वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का लक्ष्य है 2020 तक पूरे विश्व के रक्त बैंकों में रक्त संग्रह 100 फीसद स्वैच्छिक हो जाए।
वास्तव में रक्तदाता तीन तरह के होते हैं। स्वैच्छिक जो बिना किसी स्वार्थ के रक्त दान करता है। दूसरा किसी नाते रिश्तेदार, दोस्त मित्र के लिए बदले में रक्त देता है। तीसरे में रक्तदाता सुनिश्चित कर लेता है कि रक्त उसी व्यक्ति को दिया जाएगा जिसके लिए रक्त दिया गया है। डब्ल्यूएचओ का मानना है कि स्वैच्छिक रक्त दान ही सुरक्षित होता है।

प्रदेश में हुआ कुछ ऐसा खेल

उत्तर प्रदेश में जब तमाम कोशिश के बाद भी स्वैच्छिक रक्तदान का प्रतिशत नहीं बढ़ा तो स्वैच्छिक में उस दान को भी जोड़ दिया गया जो सगे संबंधियों के लिए किए गए थे। इससे रक्तदान का प्रतिशत 60 फीसद तक पहुंच गया, यह 2007 में महज 11 फीसद था। यही हाल जिलेवार और वाराणसी का भी है।
-डब्ल्यूएचओ अभी भी डाइरेक्टेड को स्वैच्छिक रक्तदान नहीं मान रहा है।
विश्व रक्तदान दिवस आज :: साल में चार बार कर सकते हैं रक्तदान !

रक्त का कोई विकल्प नहीं, इसे कारखाने या फैक्ट्री में बनाया नहीं जा सकता। किसी आवश्यकता पर रक्तदान से ही इसकी पूर्ति संभव है। जिले में ही दुर्घटना या अन्य परिस्थितियों में सालाना लगभग एक लाख यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है लेकिन मांग के सापेक्ष रक्तदान 60 फीसद ही हो पाता है।
कारणों की तह में जाएं तो भ्रांतियां लोगों के कदम रक्तदान के लिए जाने से रोक लेती हैं। डा. अरविंद सिंह के अनुसार रक्तदान से नुकसान तो नहीं होता लेकिन सामाजिक लाभ अधिक हैं।

इसे भी जानें...

-नाड़ियों में बह रहे रक्त की (आरबीसी) लाल रक्त कणिकाएं 120 दिन में वैसे भी विघटित हो जाती हैं। रक्तदान करने से इनका किसी की जान बचाने में उपयोग हो जाता है।
-18 से 65 वर्ष आयु वर्ग के लोग हर तीसरे माह रक्तदान कर सकते हैं।
-रक्तदान से किसी तरह की कमजोरी नहीं होती है। 350 एमएल रक्तदान की पूर्ति 24 घंटे के अंदर हो जाती है।
-रक्त बैंक में दिया जाने वाला रक्त शरीर के रिजर्व से लिया जाता है। इससे शरीर पर कोई प्रभाव नहीं होता।
-किसी भी जनसंख्या का चार फीसद रक्तदान करे तो रक्त बैंक से निकलने वाला रक्त शत प्रतिशत स्वैच्छिक होगा।
-रक्त संबंधियों को आपस में रक्त का आदान प्रदान नहीं करना चाहिए। इससे परिसंचरण से जुड़े रोग हो सकते हैं।
-एक यूनिट ताजा रक्त से चार लोगों की जान बच सकती है। इसके चार अवयव यानी पैक्ड सेल (आरबीसी), प्लेटलेट, प्लाज्मा व फ्रेश फ्रोजेन प्लाज्मा अलग-अलग लोगों को आवश्यकतानुसार चढ़ाए जाते हैं।

डब्ल्यूएचओ का स्वैच्छिक रक्तदान पर जोर

रक्तदाताओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 2004 से हर वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का लक्ष्य है 2020 तक पूरे विश्व के रक्त बैंकों में रक्त संग्रह 100 फीसद स्वैच्छिक हो जाए।
वास्तव में रक्तदाता तीन तरह के होते हैं। स्वैच्छिक जो बिना किसी स्वार्थ के रक्त दान करता है। दूसरा किसी नाते रिश्तेदार, दोस्त मित्र के लिए बदले में रक्त देता है। तीसरे में रक्तदाता सुनिश्चित कर लेता है कि रक्त उसी व्यक्ति को दिया जाएगा जिसके लिए रक्त दिया गया है। डब्ल्यूएचओ का मानना है कि स्वैच्छिक रक्त दान ही सुरक्षित होता है।

प्रदेश में हुआ कुछ ऐसा खेल

उत्तर प्रदेश में जब तमाम कोशिश के बाद भी स्वैच्छिक रक्तदान का प्रतिशत नहीं बढ़ा तो स्वैच्छिक में उस दान को भी जोड़ दिया गया जो सगे संबंधियों के लिए किए गए थे। इससे रक्तदान का प्रतिशत 60 फीसद तक पहुंच गया, यह 2007 में महज 11 फीसद था। यही हाल जिलेवार और वाराणसी का भी है।
-डब्ल्यूएचओ अभी भी डाइरेक्टेड को स्वैच्छिक रक्तदान नहीं मान रहा है।
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