Monday, 3 June 2013

समीक्षा :: ये जवानी है दीवानीः परफेक्ट और प्रैक्टिकल रोमांस ...........................60313

समीक्षा :: ये जवानी है दीवानीः परफेक्ट और प्रैक्टिकल रोमांस
रेटिंग :: तीन और हाफ स्टार

'ये जवानी है दीवानी' एक परफेक्ट और प्रैक्टिकल रोमांटिक फिल्म है। इस रोमांस में ऐसी अड़चने हैं जो वाकई हो सकती हैं। यहां लड़की के पिता की क्रूरता या लड़के के बाप की अमीरी मोहब्बत की राह में रोड़ा नहीं हैं। धर्म और उम्र वाला मामला भी नहीं है। यहां 'अपने' और 'सपने' दो में से एक को चुनने वाला मामला है।
फिल्‍म की कहानी में कोई ऐसी बात नहीं है जो आपको चौंका या झकझोर दे। यहां तो आईलवयू में बहुत ही सामान्य तरीके से बोला जाता है खूबसूरती उन बातों में है जो बोली नहीं जाती हैं। जिन्हें पर्दे पर किरदार महसूस कर रहे होते हैं और सीट पर बैठे हुए दर्शक। यह रोमांटिक फिल्म अपने साथ खूब सारे खूबसूरत गाने, सुंदर लोकेशन और एक स्मार्ट किस्म की कॉमेडी भी रखती है। अर्से बाद कोई फिल्म ऐसी आयी है जो तीन घंटे की होते हुए भी उबाऊ नहीं लगती।
दर्शक जब फिल्म देखकर निकलते हैं तो उन्हें इस बात का एहसास होता है कि उन्होंने हेल्दी इंटरटेन किया है जो मनोरंजन करने के साथ जीवन जीने की कई सारी फिलॉसिफी भी दे गया। यह फिल्म शाहरुख के लिए खतरे की घंटी है। 'रोमांस किंग' का एक टैग जो अभी तक शाहरुख के साथ चस्पा रहा है इस फिल्म के बाद वह रणबीर के पास शिफ्ट हो जाएगा। 'बर्फी' के बाद उन्होंने बिल्कुल अलग जॉनर की फिल्म में शानदार ऐक्टिंग की है।

कहानी कॅरियर और इश्क की

फिल्म की कहानी बनी (रणबीर कपूर) और नैना (दीपिका पादुकोण) के साथ उनके दो दोस्तों अवि (आदित्य रॉय कपूर) और अदिति (काल्की कोचलीन) की है। नैना और बनी की स्कूलिंग साथ में हुई है। वह कई सालों बाद अचानक उस ट्रेन के पास मिलते हैं जिस ट्रेन से बनी अपने दोनों दोस्तों के साथ मसूरी घूमने जा रहा होता है।
नैना भी साथ हो लेती है। हर पल को पूरा जी लेने और पैसे को हाथ का मैल समझने वाले बनी से नैना कब मोहब्बत करने लगती है यह वह भी नहीं जान पाती। वह कुछ बताने को तो होती है लेकिन उसी पल बनी उसे अपने न्यूयॉर्क जाने के अपने सपने के बारे में बताता है। अलग-अलग मुल्कों में जाकर लोगों की जिंदगी पर डाक्यूमेंट्री बनाने का उसका सपना होता है। (इस तरह का सीन हम कई फिल्मों में पहले भी देख चुके हैं)।
बनी चला जाता है। इस बीच उन दोनों के बीच में कोई संपर्क नहीं होता है। आठ साल के बाद जब वह अदित‌ि की शादी में लौटता है तो उसकी मुलाकात फिर से नैना से होती है। चूंकि दोनों के बीच प्यार था इसलिए वह फिर से करीब आ जाते हैं। फिल्म क्लाइमेक्स यह बताता है कि बनी अपने प्रेम को चुनता है या अपने सपने को।

अभिनय सभी का अच्छा

यह फिल्म पूरी तरह से रणबीर कपूर की फिल्म है। रणबीर के सपने, उसके कन्फ्यूजन, उनकी मोहब्बत, उनकी गलतियां और उनकी फैसले ही फिल्म का मूल ट्रैक है। रणबीर ने अपने हर उस कैरेक्टर को फिल्म में जिया है जो उन्हें पर्दे पर निभाना था। बिंदास रहकर खूबसूरती के साथ फ्लर्ट करने वाले किरदार में वह सबसे ज्यादा जमे हैं। रणबीर कपूर इस फिल्म में कहीं-कहीं राजकपूर की नकल करते दिखे।
दीपिका पादुकोण फिल्म में अच्छी लगी हैं, लेकिन ज्यादा अच्छे संवाद उनके हिस्से नहीं हैं। ज्यादातर उन्हें खामोश ऐक्टिंग करनी थी उसे उन्होंने किया है। डॉक्टरी की पढ़ाई कर अपने काम से काम रखने वाली चश्‍मिस नैना का किरदार उन्होंने उम्दा तरीके से निभाया है।
आदित्य राय कपूर की फिल्म 'आशिकी 2' अभी हाल ही में 100 करोड़ के क्लब में शामिल हुई है। तो आदित्य को इस बात का ख्याल रखना है कि उन्हें इस 100 करोड़ लाज बचानी है। उछलती-कूदती और धूम मचाती कल्की भी अच्छी लगी हैं।

निर्देशन अच्छा, लेकिन कई जगह 'कॉकटेल' भी

अयान मुखर्जी ने इस फिल्म के पहले सिर्फ एक फिल्म 'वेकअप सिड' डायरेक्ट की है। एक निर्देशक के रूप में वह लंबी तरक्‍की करते ‌हुए दिखते हैं। इस फिल्म में अयान मुखर्जी का सिनेमा कुछ-कुछ इम्तियाज अली के सिनेमा जैसा दिखता है। उन्हें यह बात सोचनी चाहिए कि इम्तियाज की नकल करके वह अपनी पहचान नहीं बना पाएंगे। एक निर्देशक के रूप में 'ये जवानी है दीवानी' को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है।
इंटरवल के पहले यह फिल्म अयान मुखर्जी की ही फिल्म लगती है। फिल्म की कॉमेडी भी और उसका रोमांस भी। लेकिन इंटरवल के बाद यह फिल्म कहीं यश चोपड़ा की, कहीं इम्तियाज अली की तो कहीं सूरज बड़ाताज्या की फिल्म लगने लगती है। फिल्म की गाने निश्चित ही फिल्म की यूएसपी हैँ लेकिन यह अच्छे होते हुए तब अखरने लगते हैं जब दर्शक गाने नहीं बल्कि कुछ जज्बाती सुनने के लिए खुद को तैयार कर चुके होते हैं।

गाने सुनिए भी गाइए भी

फिल्म का संगीत फिल्म की तरह की लाजवाब है। अलग-अलग पिच और फ्रीक्वेंसी के यह गाने मौके के मिजाज से मनोरंजन करते हैं। "बलम पिचकारी", "बदतमीज दिल", "कबीरा" और "घाघरा" गाने के बोल बहुत ही खूबसूरती के साथ लिखे गए हैं।
अमित भट्टाचार्या के लिखे हुए इन लिरिक्स पर प्रीतम ने बहुत ही मजेदार धुनें तैयार की हैं। फिल्म में गाने कुछ ज्यादा हैं। यह गाने म्यूजिक अल्बम में होने चाहिए लेकिन फिल्म में एक-आधे गाने कम करके इन्हें फिल्म के आखिरी या शुरुआत में दिखा देने चाहिए थे।

क्यों देखें...

मनोरंजन करने वाली एक परफेक्ट फिल्म के लिए। साथ ही कुछ लजवाब गानों के लिए भी।

क्यों न देखें...

यदि आप इस बात से नाराज हैं कि ब्रेकअप होने के बाद भी दीपिका ने रणबीर के साथ फिल्म आखिर की क्यों?

निर्देशक : अयान मुखर्जी
निर्माता : करन जौहर
संगीत : प्रीतम
कलाकार : रणबीर कपूर, दीपिका पादुकोन, आदित्य राय कपूर
लेखक : अयान मुखर्जी
समीक्षा :: ये जवानी है दीवानीः परफेक्ट और प्रैक्टिकल रोमांस 
रेटिंग :: तीन और हाफ स्टार 

'ये जवानी है दीवानी' एक परफेक्ट और प्रैक्टिकल रोमांटिक फिल्म है। इस रोमांस में ऐसी अड़चने हैं जो वाकई हो सकती हैं। यहां लड़की के पिता की क्रूरता या लड़के के बाप की अमीरी मोहब्बत की राह में रोड़ा नहीं हैं। धर्म और उम्र वाला मामला भी नहीं है। यहां 'अपने' और 'सपने' दो में से एक को चुनने वाला मामला है।
फिल्‍म की कहानी में कोई ऐसी बात नहीं है जो आपको चौंका या झकझोर दे। यहां तो आईलवयू में बहुत ही सामान्य तरीके से बोला जाता है खूबसूरती उन बातों में है जो बोली नहीं जाती हैं। जिन्हें पर्दे पर किरदार महसूस कर रहे होते हैं और सीट पर बैठे हुए दर्शक। यह रोमांटिक फिल्म अपने साथ खूब सारे खूबसूरत गाने, सुंदर लोकेशन और एक स्मार्ट किस्म की कॉमेडी भी रखती है। अर्से बाद कोई फिल्म ऐसी आयी है जो तीन घंटे की होते हुए भी उबाऊ नहीं लगती। 
दर्शक जब फिल्म देखकर निकलते हैं तो उन्हें इस बात का एहसास होता है कि उन्होंने हेल्दी इंटरटेन किया है जो मनोरंजन करने के साथ जीवन जीने की कई सारी फिलॉसिफी भी दे गया। यह फिल्म शाहरुख के लिए खतरे की घंटी है। 'रोमांस किंग' का एक टैग जो अभी तक शाहरुख के साथ चस्पा रहा है इस फिल्म के बाद वह रणबीर के पास शिफ्ट हो जाएगा। 'बर्फी' के बाद उन्होंने बिल्कुल अलग जॉनर की फिल्म में शानदार ऐक्टिंग की है। 

कहानी कॅरियर और इश्क की

फिल्म की कहानी बनी (रणबीर कपूर) और नैना (दीपिका पादुकोण) के साथ उनके दो दोस्तों अवि (आदित्य रॉय कपूर) और अदिति (काल्की कोचलीन) की है। नैना और बनी की स्कूलिंग साथ में हुई है। वह कई सालों बाद अचानक उस ट्रेन के पास मिलते हैं जिस ट्रेन से बनी अपने दोनों दोस्तों के साथ मसूरी घूमने जा रहा होता है। 
नैना भी साथ हो लेती है। हर पल को पूरा जी लेने और पैसे को हाथ का मैल समझने वाले बनी से नैना कब मोहब्बत करने लगती है यह वह भी नहीं जान पाती। वह कुछ बताने को तो होती है लेकिन उसी पल बनी उसे अपने न्यूयॉर्क जाने के अपने सपने के बारे में बताता है। अलग-अलग मुल्कों में जाकर लोगों की जिंदगी पर डाक्यूमेंट्री बनाने का उसका सपना होता है। (इस तरह का सीन हम कई फिल्मों में पहले भी देख चुके हैं)। 
बनी चला जाता है। इस बीच उन दोनों के बीच में कोई संपर्क नहीं होता है। आठ साल के बाद जब वह अदित‌ि की शादी में लौटता है तो उसकी मुलाकात फिर से नैना से होती है। चूंकि दोनों के बीच प्यार था इसलिए वह फिर से करीब आ जाते हैं। फिल्म क्लाइमेक्स यह बताता है कि बनी अपने प्रेम को चुनता है या अपने सपने को। 

अभिनय सभी का अच्छा

यह फिल्म पूरी तरह से रणबीर कपूर की फिल्म है। रणबीर के सपने, उसके कन्फ्यूजन, उनकी मोहब्बत, उनकी गलतियां और उनकी फैसले ही फिल्म का मूल ट्रैक है। रणबीर ने अपने हर उस कैरेक्टर को फिल्म में जिया है जो उन्हें पर्दे पर निभाना था। बिंदास रहकर खूबसूरती के साथ फ्लर्ट करने वाले किरदार में वह सबसे ज्यादा जमे हैं। रणबीर कपूर इस फिल्म में कहीं-कहीं राजकपूर की नकल करते दिखे। 
दीपिका पादुकोण फिल्म में अच्छी लगी हैं, लेकिन ज्यादा अच्छे संवाद उनके हिस्से नहीं हैं। ज्यादातर उन्हें खामोश ऐक्टिंग करनी थी उसे उन्होंने किया है। डॉक्टरी की पढ़ाई कर अपने काम से काम रखने वाली चश्‍मिस नैना का किरदार उन्होंने उम्दा तरीके से निभाया है। 
आदित्य राय कपूर की फिल्म 'आशिकी 2' अभी हाल ही में 100 करोड़ के क्लब में शामिल हुई है। तो आदित्य को इस बात का ख्याल रखना है कि उन्हें इस 100 करोड़ लाज बचानी है। उछलती-कूदती और धूम मचाती कल्की भी अच्छी लगी हैं। 

निर्देशन अच्छा, लेकिन कई जगह 'कॉकटेल' भी 

अयान मुखर्जी ने इस फिल्म के पहले सिर्फ एक फिल्म 'वेकअप सिड' डायरेक्ट की है। एक निर्देशक के रूप में वह लंबी तरक्‍की करते ‌हुए दिखते हैं। इस फिल्म में अयान मुखर्जी का सिनेमा कुछ-कुछ इम्तियाज अली के सिनेमा जैसा दिखता है। उन्हें यह बात सोचनी चाहिए कि इम्तियाज की नकल करके वह अपनी पहचान नहीं बना पाएंगे। एक निर्देशक के रूप में 'ये जवानी है दीवानी' को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है। 
इंटरवल के पहले यह फिल्म अयान मुखर्जी की ही फिल्म लगती है। फिल्म की कॉमेडी भी और उसका रोमांस भी। लेकिन इंटरवल के बाद यह फिल्म कहीं यश चोपड़ा की, कहीं इम्तियाज अली की तो कहीं सूरज बड़ाताज्या की फिल्म लगने लगती है। फिल्म की गाने निश्चित ही फिल्म की यूएसपी हैँ लेकिन यह अच्छे होते हुए तब अखरने लगते हैं जब दर्शक गाने नहीं बल्कि कुछ जज्बाती सुनने के लिए खुद को तैयार कर चुके होते हैं। 

गाने सुनिए भी गाइए भी

फिल्म का संगीत फिल्म की तरह की लाजवाब है। अलग-अलग पिच और फ्रीक्वेंसी के यह गाने मौके के मिजाज से मनोरंजन करते हैं। "बलम पिचकारी", "बदतमीज दिल", "कबीरा" और "घाघरा" गाने के बोल बहुत ही खूबसूरती के साथ लिखे गए हैं। 
अमित भट्टाचार्या के लिखे हुए इन लिरिक्स पर प्रीतम ने बहुत ही मजेदार धुनें तैयार की हैं। फिल्म में गाने कुछ ज्यादा हैं। यह गाने म्यूजिक अल्बम में होने चाहिए लेकिन फिल्म में एक-आधे गाने कम करके इन्हें फिल्म के आखिरी या शुरुआत में दिखा देने चाहिए थे। 

क्यों देखें...

मनोरंजन करने वाली एक परफेक्ट फिल्म के लिए। साथ ही कुछ लजवाब गानों के लिए भी। 

क्यों न देखें...

यदि आप इस बात से नाराज हैं कि ब्रेकअप होने के बाद भी दीपिका ने रणबीर के साथ फिल्म आखिर की क्यों?

निर्देशक : अयान मुखर्जी
निर्माता : करन जौहर
संगीत : प्रीतम
कलाकार : रणबीर कपूर, दीपिका पादुकोन, आदित्य राय कपूर
लेखक : अयान मुखर्जी
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