Friday, 28 June 2013

क्या केदारघाटी में सन 1882 में भी आई थी ऐसी ही तबाही ?.........................68613

क्या केदारघाटी में सन 1882 में भी आई थी ऐसी ही तबाही ?

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उत्तराखंड में हुई तबाही के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? एक सवाल और यहां पर रह-रहकर उठ रहा है कि जब केदारघाटी में सभी कुछ तबाह हो गया तो फिर केदारनाथ मंदिर कैसे अपनी जगह पर मजबूती के साथ खड़ा रहा? इन सवालों के जवाब में फिर से कई सवाल खड़े हो जाते हैं. गौरतलब है कि इस मंदिर में मौजूद पांडवों की मूर्ति भी यहां आई बाढ़ में बह गई, लेकिन यहां पर मौजूद शिवलिंग जस का तस बना रहा.

अब ऐसे तथ्य निकलकर सामने आ रहे हैं जिन्हें यदि स्वीकार नहीं किया जा सकता है तो नकारा भी नहीं जा सकता है। दरअसल उत्तराखंड में श्रीनगर स्थित धारी देवी को राज्य के लोगों एवं पर्यटकों की रक्षक माना जाता है। लोगों का मानना है कि धारी देवी उत्तराखंड के सभी धामों की रक्षक हैं। इसके अलावा वह यहां आने वाले श्रद्धालुओं की भी रक्षा करती हैं। मान्यता ये भी है कि हर दिन माता यहां तीन रूप में नजर आती हैं। इसमें पहला रूप कुमारी कन्या, दूसरा रूप युवती का और तीसरा वृद्ध माता का है। बताया जाता है कि माता के सिर पर छत लगाने की कई कोशिशें की गई लेकिन कभी लगाया नहीं जा सका। वर्तमान मंदिर के स्वरूप में भी माता की मूर्ति के ऊपर छत नहीं है। कहा ये भी जाता है कि जिस दिन धारी देवी को मूल स्थान से हटाया जा रहा था उस दिन भी भयानक तूफान आया था।

लेकिन श्रीनगर विद्युत परियोजना, उत्तराखंड के तहत बांध बनाने के लिए धारी देवी की मूर्ति को 16 जून 2013 को उस स्थान से हटा दिया गया जहां वे बरसों से देवभूमि की रक्षा कर रही थीं। संत समाज ने देवी की मूर्ति को वहां से हटाने का विरोध भी किया था और मूर्ति हटने की सूरत में आपदा आने की आशंका भी जताई थी. लेकिन उनके विरोध को नजरअंदाज करते हुए मूर्ति हटा दी गई और फिर इसके कुछ ही घंटों बाद ही उत्तराखंड में भारी मूसलधार बारिश और अचानक बाढ़ आनी शुरू हो गयी थी. इसके बाद वहां जो विनाशलीला देखने को मिली है, उससे हम सभी अनजान नहीं हैं। इस तबाही के बाद से यहां पर अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों की तादाद में लोग अभी लापता हैं। इस बाढ़ में बिजली का वह प्रोजेक्ट भी बह गया जिसके लिए धारी देवी की मूर्ति हटाई गई थी।







इससे पहले वर्ष 1882 में भी एक राजा ने धारी देवी के मंदिर के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की थी और उस समय भी केदारघाटी में इसी तरह का भयावह विनाश देखा गया था। इस संरक्षक देवी और केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के बीच कुछ अजीब और गहरा सम्बन्ध अवश्य है. इसलिए अब लोगों का कहना है कि ‘धारी देवी’ की प्रतिमा हटाये जाने के कारण ही यह तबाही हुई है।
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