Tuesday, 14 May 2013

Jokes............Modern मुल्ला नसरूद्दीन के चुटकुले..........2.........53713

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भरपूर युवा और खूबसूरत युवती ने मुल्ला से कहा कि वो मुल्ला से प्यार करती है और उससे शादी करना चाहती है.
मुल्ला ने उसका कोमल हाथ उतनी ही कोमलता से अपने हाथों में लिया और पूछा - प्रिये! क्या तुमने अपने मम्मी पापा को मेरे बारे में बता दिया है कि मैं एक 'ब्लॉगर-कवि' हूँ?
'अभी तो नहीं बताया है प्रिये', उसने प्यार उंडेलते हुए कहा - 'अभी तो मैंने तुम्हारे जुआ खेलने और दारूबाजी की आदतों के बारे में ही बताया है. वो क्या है ना, सभी चीजें एक साथ बता देने में खतरा थोड़ा खतरा है'
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मुल्ला नसरूद्दीन ग्रीटिंग कार्ड की दुकान पर पहुँचा और कार्ड देखने लगा.
सेल्सगर्ल पास आई और बोली सर, किसके लिए चाहिए कार्ड?
अपनी प्रेमिका के लिए - नसरूद्दीन ने कहा.
सेल्सगर्ल ने एक कार्ड निकाला और मुल्ला को दिखाते हुए कहा - ये देखिये, इसमें कितना सुंदर लिखा है - मेरी एकमात्र प्रेमिका के लिए जिसे मैं जी जान से चाहता हूँ...!
वाह! ये तो बढ़िया है - एक दर्जन दे दो - मुल्ला ने कहा.
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"तुम आज फिर मुल्ला से झगड़ा कर रही थी..."
"हाँ, उसने आज फिर से मुझे प्रपोज़ किया था..."
"अरे! तो इसमें आखिर समस्या क्या है..."
"मैंने उसका प्रपोजल तीन दिन पहले ही स्वीकार कर लिया था..."
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"तुम अपने पुराने प्रेमपत्रों को वापस लेकर आखिर करोगे क्या?" मुल्ला नसरूद्दीन की भूतपूर्व प्रेमिका ने आगे पूछा - "मैंने पहले ही हीरे की अंगूठी और महंगे उपहार तुम्हें वापस कर दिए हैं. क्या तुम सोचते हो कि मैं इन पत्रों से भविष्य में तुम्हें ब्लैकमेल करने का नीच काम करूंगी?"
"नहीं नहीं," मुल्ला ने प्रतिवाद किया - "ये बात नहीं है. मैं ऐसा कैसे सोच सकता हूँ. दरअसल मैंने इन पत्रों को एक अच्छे लेखक से लिखवाने में अच्छे खासे पैसे खर्च किये हैं, तो मैं इनका पुनर्प्रयोग करना चाहता हूँ."
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"क्यों न आज कुछ अलग सा करें?" बगीचे में हाथों में  हाथ डाले मुल्ला ने अपनी प्रेमिका से पूछा.
"ठीक है," प्रेमिका ने कहा - "तुम्हीं बताओ."
"तुम मुझे किस करने की कोशिश करो, " मुल्ला ने आगे कहा - "और मैं तुम्हें झापड़ मारता हूँ!"
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"इस बेदर्द दुनिया में तो न्याय जैसी चीज कहीं नहीं है" मुल्ला ने अपने मित्र से अपना दुखड़ा रोया.
"तुम ऐसा कैसे कह सकते हो" - मित्र ने प्रतिवाद किया.
"एक समय मैं 70 किलो का सींकिया पहलवान हुआ करता था तो जब मैं बीच पर जाता था तो 120 किलो का एक पहलवान मेरे चेहरे पर रेत उड़ा कर मेरा मजाक उड़ाता था. तो मैंने जिम ज्वाइन किया, वेट लिफ़्टिंग की और देखते ही देखते 130 किलो का पहलवान बन गया."
"अरे वाह, फिर क्या बात हुई?" मित्र ने पूछा.
"बात हुई क्या खाक, अब जब मैं अपनी प्रेमिका के साथ बीच पर जाता हूँ तो 170 किलो का पहलवान मेरे चेहरे पर रेत फेंक कर मेरा मजाक उड़ाता है"
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"डोरोथी, तुम्हारा प्रेमी मुल्ला नसरूद्दीन तो बड़ा शर्मीला है..." माँ ने अपनी बेटी से कहा.
"शर्मीला? शायद आपको गलतफहमी हो गई है. मेरा अनुभव तो इसके ठीक विपरीत है माँ" - बेटी ने जवाब दिया.
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"तुम सबको पता है कि मैं हीरो हूँ", मुल्ला ने अपने दोस्तों के सामने डींग मारी.
"तुम ऐसा कैसे बोल सकते हो कि तुम हीरो हो" - एक ने पूछा.
"कल मेरी प्रेमिका का जन्मदिन था",  मुल्ला ने बताया - "उसने मुझसे पहले कहा था कि यदि मैं उसके जन्मदिन पर कोई तोहफा लेकर दूंगा तो वो खुशी के मारे मर ही जाएगी."
"तो?" - एक मित्र ने पूछा.
"तो क्या, मैंने उसे कोई तोहफा नहीं देकर उसका अनमोल जीवन बचा लिया." मुल्ला ने स्पष्ट किया.
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"हालांकि यह मात्र औपचारिकता है, मगर फिर भी शादी करने के लिए मैं आपसे आपकी पुत्री का हाथ मांगने आया हूँ" मुल्ला ने अपनी प्रेमिका के पिता से कहा.
"अच्छा, और तुम्हें यह आइडिया कहाँ से मिला कि मेरी परमीशन सिर्फ औपचारिकता मात्र है?" - प्रेमिका के पिता ने पूछा.
"आपकी पत्नी से सर!" - मुल्ला ने खुलासा किया.
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मृत्यु शैय्या पर पड़े अपने पिता के पास मुल्ला नसरूद्दीन खड़ा था. पिता ने मरते स्वरों में मुल्ला को ज्ञान देना चाहा - "बेटे, हमेशा ध्यान रखना कि धन से सुख नहीं मिलता है.."
"जी पिता जी मैं ध्यान रखूंगा", मुल्ला ने सहमति दर्शाई - "परंतु धन से दुख की मात्रा अपने अनुरूप की जा सकती है"
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