Wednesday, 29 May 2013

Hindi jokes...................50 Hot Chutkules..................59613

सेठ जी (पत्नी से)- ‘कल तुम मायके गई थी कि रात घर में चोर घुस
आए। उन्होने मुझे खूब मारा-पीटा, यहां तक कि मुझे मुर्गा भी बना
दिया।‘
पत्नी - ‘क्या आपने शोर नहीं मचाया?‘
सेठ जी - ‘मैं कोई डरपोक था जो शोर मचाता।‘

.
.
.
.
.
.
.
पत्नी से तंग आकर रामलाल एक साधु के पास गया। रामलाल ने साधु से
कहा, ‘महाराज, बीवी ने परेशान कर रखा है। इसका कोई उपाय बताइए।‘
साधु (रामलाल से)- अबे, अगर बीवी से बचने का तरीका मालूम होता, तो
मैं ही साधु क्यों बनता।

.
.
.
.
.
.
मोहन लाल एक बुक देखते हुए बुरी तरह रोने लगा। तभी उसकी पत्नी आ
गई और बोली, ‘क्या हुआ इस तरह क्यों रो रहे हो, शर्म नहीं आती?‘
मोहन लाल (अपनी पत्नी से)- ‘कुछ नहीं हुआ दरअसल इस बुक का अंत
ही इतना दुखदाई है कि मैं अपनी रुलाई न रोक सका।‘
पत्नी तेजी से बोली, ‘कौन सी बुक है जी?‘
मोहन लाल ने धीरे से कहा, - ‘पासबुक।‘


.
.
.
.
.
.

पत्नी (पति से) - कुछ साल पहले तुमने मुझसे कहा था कि तुम स्वर्ग में
मेरे बिना रहने की बजाय मेरे साथ नर्क में रहना पसद करोगे।
पति (पत्नी से) - बदकिस्मती से मेरी इच्छा पूरी हो गई।

.
.
.
.
.
.
पति (पत्नी से) - शादी से पहले मैं काफी आवारागर्दी किया करता था।
क्या तुम भी ऐसा ही करती थी?
पत्नी (पति से) - ‘अब बिना गुण मिले शादी थोड़े ही होती है।‘ पत्नी
शरमाते हुए बोली।

.
.
.
.
.
.
पत्नी (पति से) - आप नींद में बहुत बोलते है इस वजह से मेरी नींद
खराब हो जाती है।
पति (पत्नी से) - तो क्या अब मैं अब नींद में भी नहीं बोल सकता, उसमें
भी केवल तुम्हारी सुनूं। 
.
.
.
.
.
पति (पत्नी से)- तुम इतनी अच्छी रोटियां नहीं बना सकती, जितनी अच्छी
मेरी मां बनाती थी।
पत्नी (पति से)- और तुम भी उतना अच्छा आटा नहीं गूंथ सकते, जितना
अच्छा मेरे पिताजी गूंथते थे।

.
.
.
.
.
.
.
.
पत्नी (पति से) - शादी के पहले तो तुम कहा करते थे कि मैं तुम्हारे लिए
आसमान से तारे तोड़कर ला दूंगा। अब लाकर क्यों नहीं देते।
पति (पत्नी से) - अब आसमान के तारे कहां से ला सकता हूं। शादी के
बाद सारे तारे गर्दिश में जो चले गए।

.
.
.
.
.
.
.
एक कंजूस व्यक्ति की पत्नी मरणासन्न अवस्था में थी। इतने में घर की
बत्ती चली गई। कंजूस व्यक्ति शिकायत दर्ज करवाने बिजली घर गया।
जाते-जाते पत्नी से बोला, ‘मैं बाहर जा रहा हूं, यदि तुम मरने लगो, तो
मोमबत्ती बुझा देना।‘

.
.
.
.
.
.
.
मियां-बीवी में धन-दौलत की मिल्कियत को लेकर जबरदस्त कहा-सुनी हो
गई। बीवी ने गुस्से से कहा, ‘तुम्हारा इस घर में है क्या, जो कुछ है, सब
मेरे पिता ने दहेज में दिया है।‘
संयोगवश उसी रात घर में चोर घुस गए। बीवी की आंख खुल गई। वह
मियां को जगाने लगी, ‘जल्दी उठो, घर में चोर घुस आए है।‘
मियां ने करवट बदलते हुए कहा, ‘मैं क्यों उठूं, मेरा इस घर में है ही
क्या?‘

.
.
.
.
.
.
.
पत्नी (पति से)- ‘शादी पर जो तुमने सोने की अंगूठी दी थी, वह आज
कही गिर गई।‘
पति (पत्नी से)- ‘आज ही मेरे कोट की जेब से सौ रूपए चोरी हुए, खैर
कोई बात नहीं।‘
पत्नी (पति से)- क्यों?
पति (पत्नी से)- तुम्हारी अंगूठी मिल गई।
पत्नी (खुश होकर)- सच कहां मिली?
पति (पत्नी से)- उसी जेब में से, जिसमें से सौ रूपए गायब हुए है।


.
.
.
.
.
.

एक साहब ने कैमिस्ट से दवाइयां खरीदते समय उससे कहा, ‘दवाइयो को
अलग-अलग लिफाफे में रखकर उस पर लिख दीजिए कि कौन सी मेरी
बीवी की है और कौन सी मेरे कुत्ते की।
मैं नहीं चाहता कि दवाएं बदल जाएं और मेरे कुत्ते को कुछ हो जाये।‘
.
.
.
.
.


एक बार शर्मा जी के पेट के ऊपर से चूहा निकल गया तो वह उठकर
चिल्लाने लगे।
शर्मा जी की पत्नी (पति से)- ‘इसमें इतना चिल्लाने की क्या बात है?‘
शर्मा जी (पत्नी से)- ‘आज तो चूहा गुजरा है। कल हाथी, घोड़े, बैल, मोटर
सभी गुजरेगे। इस तरह तो मेरा पेट आम रास्ता बन जाएगा।‘


.
.
.
.
.
.
.
.

पति-पत्नी शॉपिंग के लिए बाजार गये तो पत्नी बोली- कितनी अजीब सी
बात है कि मेरे पास साड़ी का बार्डर है पर साड़ी नहीं, शीशी है पर सैट
नहीं, अंगूठी है पर नेकलेस नहीं।
यह सुनकर शांत स्वभाव से पति महोदय ने कहा- मेरा भी यही हाल है।
मेरे पास पर्स है पर पैसे नहीं।

.
.
.
.
.
.
.
पत्नी (पति से)- ‘वह कौन सी चीज है जो औरतों को पसंद नहीं पर मर्दो
को पसंद है?
पति (पत्नी से)- ‘खामोशी।'
.
.
.
.
.
.

तेज-तर्रार पत्नी ने पति से पूछा- यदि तुम साड़ी पहनकर घर में रहो तो
क्या होगा?
दब्बू पति का जवाब था- कुछ भी नहीं।
पत्नी ने आंखे तरेर कर पूछा- क्यों?
पतिदेव ने जरा धीरे से कहा- क्योंकि मैं घर के कपड़े और बर्तन आज भी
धोता हूं और तब भी धोऊंगा।

.
.
.
.
.
.
.
पति (पत्नी से)- पिछले एक घंटे से चाय का इंतजार कर रहा हूं। इतनी देर
तक तुम बालकनी में क्या कर रही थी?
पत्नी (पति से)- पड़ोस वाली मिसेज शर्मा से बातें कर रही थी।
पति (पत्नी से)- इतनी देर तक जब बात करनी थी तो उन्हें घर ही क्यों
नहीं बुला लिया?
पत्नी (पति से)- मैंने उनसे कहा था, पर वह बोली मेरे पास समय नहीं है।
.
.
.
.
.
.
.
पत्नी (पति से)- इस बस के कन्डक्टर ने मेरी बेइज्जती की है।
पति (पत्नी से)- भला वह कैसे?
पत्नी (पति से)- जब मैं बस से उतरी तो कंडक्टर ने कहा, तीन सवारियां
इस सीट पर आ जाए।

.
.
.
.
.
.
.
पत्नी ने अपने पिता को घर आया देख पति से पूछा, क्यों जी मेरे पिताजी
अचानक घर कैसे आ गए कही आपने तो नहीं बुलाया।
पति (पत्नी से)- नहीं।
पत्नी (पति से)- तो फिर क्यों आए है?
पति (पत्नी से)- मैंने कुछ दिन पहले आपके घर जो पत्र लिखकर डाला था,
उसे पढ़वाने के लिए क्योंकि मेरी लिखाई मेरे अलावा कोई नहीं पढ़
सकता।

.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
एक व्यक्ति थाने आया और थाना इंचार्ज से बोला- जी, मेरी लड़ाकू बीवी
एक साल पहले कही गुम हो गई थी। उसी की रिपोर्ट लिखानी है।
एक साल पहले? और आप अब रिपोर्ट लिखा रहे है? थाना इंचार्ज ने
आश्चर्यचकित होकर पूछा।
‘जी, वास्तव में मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि मैं इतना भाग्यवान
भी हो सकता हूं।‘ व्यक्ति ने जवाब दिया।

.
.
.
.
.
.
पत्नी (पति से)- ‘आप बहुत देर से घर आए हो।‘
पति ने भी पत्नी पर इल्जाम लगाते हुए कहा, ‘और तुम इतनी रात तक
जाग कर क्या कर रही हो।
पत्नी (पति से)- मैं पांच घंटे से आपके इंतजार में जाग रही थी।
पति (पत्नी से)- और मैं पांच घंटे से इसी इंतजार में बाहर खड़ा था कि
तुम सो जाओ तो मैं अंदर आऊं।
.
.
.
.
.
.
.

.
.
पत्नी (पति के हाथ से एक पैकेट छीनते हुए)- ‘अच्छा तो तुम इस पैकेट
में सोने की चीज लाए हो। जरा देखूं तो तुम मेरे लिए क्या बनवा कर
लाए हो?‘
पति (झल्लाकर)- ‘अरे भाग्यवान। इसमें सोने की गोलियां है। सोने के
जेवर नहीं।‘

.
.
.
.
.
.
राकेश खाना खाते वक्त अचानक रुक गया और अपनी पत्नी से पूछने लगा,
‘आज का खाना क्या तुम्हारी मां ने बनाया है?‘
पत्नी खुश होकर बोली, ‘हां, खाना बड़ा स्वाद बना है ना?‘
राकेश (पत्नी से)- ‘नहीं रोज खाने में काले बाल मिलते थे लेकिन आज
सफेद मिल रहे है।‘

.
.
.
.
.
.
पति (पत्नी से)- ‘अभी मीना की शादी की क्या जल्दी है? बहुत समय पड़ा
है। जब तक कोई अच्छा लड़का न मिले तब तक हमें बाट देखनी चाहिए।'
पत्नी (पति से)- ‘बाट भी कब तक देखी जा सकती है? जब मैं शीला की
उम्र की थी तो मेरे घरवालों ने ही अच्छा लड़का मिलने का इंतजार कहां
किया था?'


.
.
.
.
.
.
.

पति (गुस्से से)- मैं पूछना चाहता हूं कि इस घर में मेरा हुक्म चलता है
या तुम्हारा?
पत्नी (पति से)- यह बात न ही पूछे तो अच्छा है क्योंकि इसका जवाब
सुन कर आपको कोई खास खुशी नहीं मिलेगी।
एक साहब नशे में चूर रात को तीन बजे घर पहुंचे। घर पहुंचते ही वे
देखते है कि उनकी पत्नी किसी दूसरे आदमी के साथ बैठी बातें कर रही है।
वे कुछ बोलते उससे पहले ही पत्नी उन पर बरस पड़ी। ‘कहां थे अब तक?
ये कोई घर आने का समय है? आवारागर्द कही के ।'
पति (पत्नी से)- ‘लेकिन तुम्हारे साथ ये आदमी कौन है?'
पत्नी (पति से)- ‘चुप रहो, टॉपिक बदलने की कोशिश मत करो।'

.
.
.
.
.
.
.
अपनी नवविवहिता पत्नी से पति ने पूछा- शादी से पहले कितने आदमियों
से तुम्हारी दोस्ती थी?
पत्नी की खामोशी देखकर पति ने फिर पूछा- क्या उत्तर नहीं दोगी।
मैं अभी गिन ही रही हूं- पत्नी ने जवाब दिया।

.
.
.
.
.
.
आपके शो-केस में जो साड़ी टंगी है, क्या आप इसे मेरे लिए निकाल सकते
है? एक युवक ने दुकानदार से कहा।
दुकानदार- ‘क्यों नहीं, मैं अभी निकलवाकर आपके लिए पैक करवा देता
हूं।'
युवक - ‘जी, पैक करवाने के लिए नहीं, मैं तो वहां से निकलवाने के लिए
कह रहा था। दरअसल जब भी हम यहां से गुजरते है मेरी पत्नी उस साड़ी
को खरीदने की जिद करने लगती है।'


.
.
.
.
.
.
.

मंजीत ने मोहिनी को पुरानी बातें याद दिलाते हुए कहा, ‘तुम तो कहा
करती थी कि शादी के बाद तुम मेरे जीवन में हरियाली ला दोगी।'
मोहिनी - अरे, ‘वही तो कर रही हूं।' ये जो ढेर सारे गमले मैं लाई हूं, वे
सब हरियाली के लिए ही तो है।


.
.
.
.
.
.

एक सज्जन ने अपने मित्र से पूछा- बताओ, शादी के बाद चैन की नींद
कौन सोता है- पति य पत्नी?
मित्र - दोनो। फर्क सिर्फ इतना सा है कि पत्नी घर में सोती है और पति
ऑफिस में।


.
.
.
.
.
.
.

ज्योतिषी ने एक खूबसूरत युवती का हाथ देखकर कहा- तुम्हारी शादी एक
ऐसे युवक से होगी, जो सुंदर तो होगा ही साथ ही, पैसे वाला भी होगा।
यह सुनकर युवती खुश होकर बोली- अब यह भी बता दीजिए कि मैं अपने
वर्तमान पति से छुटकारा कैसे पा सकती हूं।


.
.
.
.
.
.
.
.
एक लेखक की शादी हो गई। पत्नी थी संपादक। कुछ समय बाद पत्नी
मायके चली गई। लेखक ने पत्नी को पत्र लिखा और साथ में टिकट लगा
लिफाफा भी भेज दिया। लेखक का एक मित्र यह सब देख रहा था। उसने
पूछा- ‘पत्र के साथ यह लिफाफा क्यों भेजा है?'
लेखक महोदय बोले- ‘आप नहीं जानते, पत्र के साथ टिकट लगा लिफाफा
न लगा हो, तो संपादक जवाब नहीं देते।'


.
.
.
.
.
.
.
.

पति (अपनी नवविवाहिता पत्नी से)- प्रिय जरा अपना चंद्रमा रूपी चेहरा तो
दिखाओ।
चेहरा देखते ही पति आग बबूला हो गया और गुस्से से बोला- अरे तुम्हारे
चेहरे पर तो काले धब्बे और गड्डे है। तुम्हारे मां-बाप ने हमें धोखा दिया
है।
पत्नी (पति से)- डियर, नई खोजे चंद्रमा का यही रूप सामने लाई है।


.
.
.
.
.
.
.

मृत पति की कब्र पर पत्नी ने संगमरमर का पत्थर लगवाया और उस पर
खुदवाया- ‘शांति से सोओ।'
परंतु दो दिन बाद जब वसीयत खुली तो पत्नी को पता चला कि पति
उसके नाम कुछ नहीं छोड़ गया है। तब वह कब्रिस्तान गयी और पत्थर
पर आगे खुदवाया- ‘जब तक मैं नहीं आती।'


.
.
.
.
.
.

हेमा (राकेश से)- शादी से पहले तो तुम कहा करते थे कि मैं तुम्हारे लिए
आसमान के तारे तक तोड़ कर ला दूंगा, अब लाकर क्यों नहीं देते?
राकेश (हेमा से)- अब आसमान के तारे तोड़ कर कैसे ला सकता हूं? शादी
के बाद सारे तारे गर्दिश में जो चले गए है।.
.
.
.
.
.
पत्नी (ताना मारते हुए)- ‘मैं यदि न होती तो आपकी यह फटी कमीज
कौन सिलता?'
पति (पत्नी)- ‘तब इसकी जरूरत ही नहीं पड़ती। मैं ढेर सारी कमीजें
सिलवा लेता।'


.
.
.
.
.
.
.
.

पत्नी (पति से)- मैं तुमसे जो भी कहती हूं, तुम एक कान से सुनकर दूसरे
कान से निकाल देते हो।
पति (पत्नी से)- किंतु मैं जो तुमसे कहता हूं वो तुम दोनो कानो से
सुनकर मुंह से निकाल देती हो।

.
.
.
.
.
.
पति (पत्नी से)- ‘तुम हमेशा मुझे बेकार की चीजे खरीदने का ताना देती
हो। मैंने ऐसी क्या चीज खरीदी है, जो बेकार है?'
पत्नी (पति से)- ‘पिछले साल आग बुझाने का सिलेंडर लाए थे वो अभी
तक बेकार ही तो पड़ा है।'


.
.
.
.
.
.

पति-पत्नी चाय की चुस्कियों के साथ अखबार पढ़ रहे थे। पत्नी को एक
चटपटी खबर दिखी तो उसने पति से कहा, ‘देखो खबर छपी है कि एक
अस्सी साल के कुंवारे बूढ़े ने शादी कर ली।'
पति ठंडी सांस भरते हुए बोला, ‘बेचारे ने लगभग पूरी जिंदगी समझदारी
दिखाई पर बुढ़ापे में बेवकूफी कर ही दी।'


.
.
.
.
.
.

पत्नी (शर्माते हुए)- सुनो जी! तुम्हें मुझमें सबसे ज्यादा क्या अच्छा लगता
है? मेरा खूबसूरत चेहरा या मेरी अक्लमंदी।
पति (पत्नी को देखते हुए)- मुझे तो तुम्हारी मजाक करने की आदत
ज्यादा अच्छी लगती है।


.
.
.
.
.
.

झगड़े के आखिर में पत्नी ने थककर कहा, ‘मैं कितनी बड़ी मूर्ख थी कि
मैंने तुमसे शादी की।'
पति ने शांत भाव से कहा, ‘हां! पर मैं तुम्हारे प्यार में इतना पागल था
कि यह भी न देख पाया।'

.
.
.
.
.
.
.
पत्नी मर रही थी। उसने पति को अपने पास बुलाया और भर्राए स्वर में
बोली- प्राणनाथ, मैं जा रही हूं। मैंने ही आपके सेफ से दस हजार रूपये
चुराये थे। मैं आपके दोस्त से छुप-छुपकर मिला करती थी। मैंने ही आपके
काले धन की सूचना इनकम टैक्स विभाग को दी थी। मैंने ही......।
पति (प्यार से)- छोड़ो डार्र्लिंग, अब बीती बातों को बिसार दो। जो हो
गया सो हो गया। वैसे, मैंने ही तुम्हें जहर दिया है जिसकी वजह से तुम
मर रही हो।

.
.
.
.
.
.
.
पति - ‘ऐसे जीवन से तो अच्छा है कि मैं मर जाऊं प्रभु, तू मुझे उठा
ले।'
पत्नी - ‘भगवान इनसे पहले मुझे उठा ले।'
पति - ‘प्रभु, तू इसकी सुन, मैं अपनी अर्जी वापस लेता हूं।'


.
.
.
.
.
.
.

राकेश (मनोवैज्ञानिक से)- ‘कोई ऐसा उपाय बताइए कि मेरा और मेरी
पत्नी की आपस में कहां सुनी न हो।'
मनोवैज्ञानिक (राकेश)- ‘इसका सबसे अच्छा उपाय यह है कि आपकी बीवी
जो कहती रहे आप उसे सुनते रहिए।
.
.
.
.
.
.
नवविवाहिता ने अपने पति से पूछा- आपने पड़ोसियों से यह क्यों कहा कि
मेरे अच्छा खाना बनाने की वजह से ही आपने मुझसे शादी की, मुझे तो
ठीक से चाय बनानी भी नहीं आती है।
‘प्रिय, कोई न कोई वजह तो बतानी ही थी न।' पति महोदय गंभीर होकर
बोले।


.
.
.
.
.
.
.
.

एक कुएं के बारे में मशहूर था कि उसमें एक सिक्का डालने से मन की
मुराद पूरी होती है। पति-पत्नी भी उस कुएं पर जा पहुंचे। सबसे पहले पति
ने एक सिक्का डाला और कुएं में झांककर कुछ बुदबुदाया।
फिर पत्नी सिक्का डालकर ज्यों ही झुकी, संतुलन बिगड़ने के कारण कुएं में
जा गिरी। पति शांत स्वर में बोला, ‘हे भगवान, ऐसी मान्यताओं पर मुझे
तो विश्वास ही नहीं था, पर अब करना पड़ रहा है।'


.
.
.
.
.
.
.

ज्योतिषी ने खूबसूरत रमा का हाथ देखकर कहा- तुम्हारी शादी एक ऐसे
युवक से होगी, जो सुंदर तो होगा ही साथ ही, पैसे वाला भी होगा।
यह सुनकर रमा खुश होकर बोली- अब यह भी बता दीजिए कि मैं अपने
वर्तमान पति से छुटकारा कैसे पा सकती हूं।


.
.
.
.
.
.
.

अब तो मुझे पक्का यकीन हो गया है कि आपको मुझसे पहले जैसी
मोहब्बत नहीं रही। पत्नी ने पति से शिकवा किया।
पति (पत्नी से)- ‘तुम्हें यह गलतफहमी कैसे हुई?'
पत्नी (पति से)- ‘गलतफहमी नहीं असलियत है। पहले जब आप खाना
खाने बैठते थे तो खुद कम खाते थे और मुझे ज्यादा खिलाते थे लेकिन
अब.....'
पति (पत्नी से)- ‘बात दरअसल यह है कि अब तुम पहले जैसा बे-स्वाद
खाना नहीं बनाती।'


.
.
.
.
.
.

पत्नी (वकील पति से)- तुम इतने सालों से वकालत कर रहे हो। मुझे
बताओ कि उम्रकैद से बड़ी सजा क्या होती है?
वकील पति (पत्नी से)- वही तो काट रहा हूं।


.
.
.
.
.
.

पति ने पत्नी को समझाते हुए कहा- ‘प्रिये! देखो, इस बार अपने जन्मदिन
पर सामान कम मंगवाना। महंगाई बहुत बढ़ गई है। इसलिए हमें अपने
खर्चो में कमी करनी चाहिए।'
पत्नी (पति से)- ‘आपने तो मेरे मुंह की बात छीन ली। मैं भी यही सोच
रही हूं कि इस बार जन्मदिन पर मोमबत्तियां कुछ कम मंगवाऊं।'


.
.
.
.
.

 
.
.
.
.
.

पत्नी (पति से)- सुनो जी, तुम मेरा नाम मत लिया करो, मुन्ना भी मुझे
नाम लेकर पुकारने लगा है।
पति (पत्नी से)- इसका मतलब, क्या मैं तुम्हें मम्मी कहकर पुकारूं?
-->

No comments:

Post a Comment