Wednesday, 15 May 2013

प्रसिद्ध अभिनेत्री एवं कत्थक नृत्यांगना माधुरी दीक्षित & सुप्रसिद्ध हास्य अभिनेता जॉनी वॉकर..................54313

 सुप्रसिद्ध हास्य अभिनेता जॉनी वॉकर

 
जॉनी वॉकर (जन्म: 15 मई, 1923, इन्दौर-मध्य प्रदेश - निधन: 29 जुलाई, 2003, मुम्बई-महाराष्ट्र) भारत के एक सुप्रसिद्ध हास्य अभिनेता का नाम है। इनका असली नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन क़ाज़ी था। अपना नाम उन्होंने विस्की के एक लोकप्रिय ब्रैंड से उधार लिया था; लेकिन बाद में यह तय करना मुश्किल हो गया था कि दोनों में ज़्यादा लोकप्रिय कौन है?

पारिवारिक जीवन

जॉनी वॉकर की शादी नूरजहाँ से हुई थी। इन दोनों की मुलाक़ात 1955 में गुरुदत्त की फ़िल्म मिस्टर एंड मिसेज़ 55 के सेट पर हुई। जॉनी वॉकर और नूर के तीन बेटियाँ है: कौसर, तसनीम, फ़िरदौस और तीन बेटे है: नाज़िम, काज़िम और नासिर। नासिर एक प्रसिद्ध फ़िल्म और टीवी अभिनेता है। जॉनी वॉकर एक विनम्र आदमी थे।

ज़िन्दगी की शुरुआत

ज़िन्दगी की शुरुआत उन्होंने बस कंडक्टर के रूप में की। बस में यात्रियों से मज़ाकिया बातें करना उनका शगल था, जिसने बलराज साहनी को आकर्षित किया। बलराज साहनी ने इन्हें गुरु दत्त से मिलवाया और संवेदना और हास्य के दो शिखर एक हो गए, जिसने हिन्दी सिनेमा के लिए नई परिभाषाएं गढ़ीं।

सफलता

'बाज़ी', 'आर-पार' ', मिस्टर एंड मिसेज 55', 'सीआईडी', 'काग़ज़ के फूल', 'प्यासा' जैसी गुरु दत्त की फ़िल्मों की एक समानांतर पहचान बने जॉनी वॉकर। 'चोरी-चोरी', 'नया दौर', 'मधुमती', 'मेरे महबूब', 'आनंद' आदि फ़िल्मों में जॉनी वॉकर मीठी फुहार की तरह राहत देने आते थे, जब दर्शकों को फ़िल्म की गंभीरता से उबरना मुश्किल लगने लगता था। जॉनी वॉकर के अभिनय में इतनी ऊंचाई थी कि आमतौर पर हल्की-फुल्की मनोरंजक फ़िल्मों की जगह गंभीर फ़िल्मों की गंभीरता के बर्फ़ को तोड़ने की जवाबदेही मिली। हैरानी नहीं कि बरसों बाद भी कमल हासन के साथ जब वह 'चाची 420' में दिखे तो उतने ही जीवंत, उतने ही ताजा दम थे।

पुरस्कार

1959 फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार - मधुमती
फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता पुरस्कार - शिकार
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  प्रसिद्ध अभिनेत्री एवं कत्थक नृत्यांगना माधुरी दीक्षित 


 
माधुरी दीक्षित (जन्म: 15 मई, 1965) हिन्दी फ़िल्मों की एक प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं। माधुरी दीक्षित 1987 से 2003 के समय की प्रमुख नायिकाओं में से एक हैं। उनका जन्म शंकर तथा स्नेहलता के परिवार में हुआ था। वे एक प्रशिक्षित कत्थक नृत्यांगना भी हैं। माधुरी दीक्षित ने सन् 1984 में फ़िल्म 'अबोध' से अपने फ़िल्मी जीवन की शुरुआत की।

जीवन परिचय

15 मई 1967 मुंबई में मराठी परिवार में माधुरी दीक्षित का जन्म हुआ। पिता शंकर दीक्षित और माता स्नेहलता दीक्षित की लाडली माधुरी को बचपन से डॉक्टर बनने की चाह थी और शायद यह भी एक वज़ह रही कि माधुरी ने अपना जीवन साथी श्रीराम नेने को चुना जो कि पेशे से एक चिकित्सक हैं। माधुरी दीक्षित ने भारतीय हिन्दी फ़िल्मों में एक ऐसा मुकाम तय किया है जिसे आज के अभिनेत्रियाँ अपने लिए आदर्श मानती है।

शिक्षा

डिवाइन चाइल्ड हाई स्कूल से पढने के बाद माधुरी दीक्षित ने मुंबई यूनिवर्सिटी से स्नातक की शिक्षा पूरी की। बचपन से ही उन्हें नृत्य मे रूचि थी जिसके लिए माधुरी ने आठ वर्ष से ही प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। 80 और 90 के दशक मे इन्होने स्वयं को हिन्दी सिनेमा मे एक प्रमुख अभिनेत्री तथा सुप्रसिद्ध नृत्यांगना के रूप में अपने आपको स्थापित किया। उनके नृत्य और स्वाभाविक अभिनय का ऐसा जादू था माधुरी दीक्षित को आज पूरे देश की धड़कन बन गयी।

फ़िल्मी सफ़र

माधुरी दीक्षित ने सन् 1984 में फ़िल्म अबोध से अपने फ़िल्मी जीवन की शुरुआत की। अभिनेत्री के रूप में उनकी पहली फ़िल्म 'तेजाब' थी। 'तेजाब' फ़िल्म से ही उन्हें अपनी पहली सफलता मिली और वे बॉलीवुड की जानी मानी अभिनेत्रियों में गिनी जाने लगीं। माधुरी दीक्षित ने दयावान, राम लखन, दिल, साजन, बेटा, खलनायक, हम आपके हैं कौन आदि सफल फ़िल्मों में भी अभिनय किया है।

पुरस्कार

सन 2008 में उन्हे भारत सरकार के चतुर्थ सर्वोच्च नागारिक सम्मान पद्मश्री से सम्मनित किया गया। माधुरी दीक्षित को सन 2001 में नेशनल सिटीजन्स पुरस्कार की उपाधि से सम्मानित किया गया था।

कर्म-क्षेत्र
अभिनेत्री, कत्थक नृत्यांगना

मुख्य फ़िल्में
दयावान, राम लखन, दिल, साजन, बेटा, खलनायक, हम आपके हैं कौन, दिल तो पागल है, देवदास (2002) आदि

पुरस्कार-उपाधि
पद्मश्री, चार बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री फ़िल्मफेयर पुरस्कार

विशेष योगदान
माधुरी दीक्षित ने भारतीय हिन्दी फ़िल्मों में एक ऐसा मुकाम तय किया है जिसे आज के अभिनेत्रियाँ अपने लिए आदर्श मानती हैं।
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