Sunday, 5 May 2013

हनुमान धारा:- चित्रकूट...............49313

हनुमान धारा:- चित्रकूट



रामघाट से तीन किलोमीटर दूर पर्वत श्रेणी पर विराजमान हनुमान जी के हाथों से निकलने वाली धारा का दृश्य अत्यंत मनोहारी है।

इसके स्थान के ठीक ऊपर सीता रसोई है।
हनुमान धारा के नीचे नरसिंह धारा, पंचमुखी हनुमान मंदिर है।
रामघाट से हनुमान धारा जाने के बीच में ही वनदेवी नामक विलक्षण स्थान है।

पहाड़ी के शिखर पर स्थित हनुमान धारा में हनुमान जी की एक विशाल मूर्ति है।
मूर्ति के सामने तालाब में झरने से पानी गिरता है।
कहा जाता है कि यह धारा श्रीराम जी ने लंका दहन से आए हनुमान जी के आराम के लिए बनवाई थी।
यहां से चित्रकूट का सुन्दर नजारा देखा जा सकता है।

सोने की लंका का दहन करने के बाद जब पवनसुत हनुमान जी को उसके ताप से शांति नही मिली तो उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी से इसका उपाय पूछा।

श्री राम जी ने कहा कि जिस पर्वत पर आदि काल के ऋषियों के द्वारा लगातार तप कर भूमि को पवित्र किया गया हो ऐसे प्राकृतिक सुषमा से युक्त स्थान पर जाकर तप करो।
बजरंग बली ने आकर यहां पर श्री राम रक्षा स्त्रोत का पाठ 1008 बार जैसे ही पूरा किया उनके ऊपर से एक जल की धारा प्रकट हो गयी और उस धारा के निरंतर चलने के कारण यह स्थान हनुमान धारा के रूप में सुविख्यात हो गया।

जिस स्थान पर आकर पवनपुत्र हनुमान जी को शांति मिली थी वह स्थान हनुमान धारा के रूप में देश-देशान्तर में जाना जाता है।

विंध्य पर्वत श्रंखला की पहाडि़यों वाले इस मनोरम स्थान पर वैसे तो रोजाना ही भक्तों की आवाजाही भारी संख्या में लगी रहती है।

भाद्रपद माह के दूसरे मंगलवार को यहां पर विशाल मेले के साथ ही बुढ़वा मंगल मनाया जाता है।

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