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Friday, 19 April 2013

झुनझुन कटोरा.................41713

दीवानी में है मॉन्युमेंट
यह मॉन्युमेंट दीवानी कचहरी की चाहरदीवारी के अंदर स्थित है. सिटी के बीचोंबीच स्थित झुनझुन कटोरा आगरा के राष्ट्रीय महत्व के मॉन्युमेंट्स की लिस्ट में सुमार है. इतिहास के जानने वालों की माने तो इस मॉन्युमेंट मुगलकाल में ही बनवाया गया था, लेकिन लंबे टाइम तक प्रॉपर देखभाल के बिना यह मॉन्युमेंट जर्जर हो गया था. बीते करीब सात साल पहले तत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद् केके मोहम्मद ने इसका जीर्णोद्धार कराया था. उस समय मॉन्युमेंट पर झुनझुन कटोरा का बोर्ड भी लगाया गया था. बोर्ड लगने से पहले इसके बारे में इतिहासकारों के अलावा शायद ही कोई जानता हो कि यह गुंबद सरीखी इमारत क्या है.
बना था एक दिन का बादशाह
इतिहासकार बताते हैैं कि शेरशाह सूरी से युद्ध में मुगल शासक हुमायंू बुरी तरह से हार गया था. वह अपनी जान बचाकर एक नदी को पार कर भाग रहा था, लेकिन नदी में पानी अधिक होने की वजह से उसका घोड़ा डूब गया. उस समय निजाम भिश्ती ने ही बादशाह को डूबने से बचाया था. हारे हुए बादशाह ने अच्छे दिन लौटने पर निजाम भिश्ती को इनाम देने का वचन दिया था. हुमायूं जब गद्दी पर दोबारा बैठा तो उसने जान बचाने वाले निजाम भिश्ती की खोज कराई. भिश्ती से इनाम मांगने को कहा गया तो उसने हुमायूं से एक दिन के लिए बादशाह की गद्दी मांगी थी. हुमायूं ने निजाम भिश्ती को एक दिन का बादशाह बना भी दिया था. एक दिन की सल्तनत मिलने पर निजाम भिश्ती ने राज्य में चमड़े का सिक्का चला दिया था. इसी निजाम भिश्ती की याद में मुगलकाल में ही सिटी में इस मॉन्युमेंट का निर्माण कराया गया था. ग्रेट अकबरनामा में भी निजाम भिश्ती के बारे में उल्लेख मिलता है.
इसे देखने नहीं आता कोई
सिटी में स्थित ताजमहल देखने के लिए तो हर दिन दस-बारह हजार इंडियन और फॉरेनर आते हैं. यह टूरिस्ट्स फतेहपुर सीकरी, एत्मादउद्दौला, आगरा किला, अकबर टॉम्ब, मरियम टॉम्ब, चीना का रोजा, ग्यारह सीढ़ी सहित तमाम मॉन्युमेंट्स को देखने के लिए भी पहुंचते हैं, लेकिन आश्चर्य की बात है कि मुगलकाल में ही बनवाया गया झुनझुन कटोरा एक ऐसा मॉन्युमेंट है जहां पिछले एक दशक में एक भी टूरिस्ट नहीं पहुंचा. झुनझुन कटोरा में एएसआई की ओर से ड्यूटी पर मुस्तैद अटेंडेंट मदन बताते हैं कि उन्हें इस मान्यूमेंट्स पर ड्यूटी करते दस साल हो गए, आज तक एक भी टूरिस्ट इसे देखने के लिए नहीं पहुंचा है.

क्यों पड़ा यह नाम?
 भिश्ती अपनी मसक में पानी भरकर चलते थे. साथ में पानी पिलाने के लिए सिल्वर का कटोरा रखते थे. पानी पिलाने के एवज में मिलने वाली कौडिय़ों को वे इस कटोरे में डालकर हिलाते रहते थे. इससे झुन-झुन जैसी आवाज निकलती थी. इसी के चलते इस मॉन्युमेंट का नाम पुरातत्व विभाग के रिकॉर्ड में झुन-झुन कटोरा रख दिया गया. वैसे भी दूर से देखने से इस मॉन्युमेंट की शक्ल उल्टे रखे किसी कटोरे से कम नहीं दिखती है.

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