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Friday, 29 March 2013

गुड फ्राइडे : प्रभु यीशु का बलिदान दिवस......34913

गुड फ्राइडे : प्रभु यीशु का बलिदान दिवस
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गुड फ्रायडे एक ऐसा दिन जब ईसा मसीह ने अपने भक्तों के लिए बलिदान देकर निःस्वार्थ प्रेम की पराकाष्ठा का उदाहरण प्रस्तुत किया। ईसा मसीह ने विरोध और यातनाएँ सहते हुए अपने प्राण त्याग दिए उन्हीं की आराधना और वचनों के माध्यम से इंसानियत की राह पर चलने का ज्ञान देने वाला दिन है गुड फ्राइडे।

ईश्वर के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने का हरेक का अंदाज अलहदा होता है। गुड फ्रायडे तक कोई ईसाई अनुयायी 40 दिन के उपवास रख रहा है तो कोई केवल शुक्रवार को व्रत रखकर प्रार्थना कर रहा है। प्रभु यीशु के वचनों को अमल करने का दिन है गुड फ्रायडे।

इस संबंध में बिशप चाको कहते हैं कि यह बड़ी विडंबना है कि आज भी बहुत से लोग गुड फ्रायडे व इसके महत्व से अनभिज्ञ हैं। इसकी एक वजह यह हो सकती है कि इसे कहा तो गुड फ्रायडे जाता है लेकिन यह सबसे दुखदयी दिन रहा जब प्रभु यीशु को क्रॉस पर चढ़ाया गया था और उन्होंने प्राण त्यागे थे।

इस दिन का महत्व प्रभु यीशु को दी गई यातनाओं को याद करने और उनके वचनों पर अमल करने का है। जहाँ तक प्रवचन देने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर फादर आदि को बुलाया जाता है तो इसकी वजह यही है कि लोग धर्म-आध्यात्म के प्रति रुचि लें।

रेवरेन्ट विश्वास पी. मसीह कहते हैं कि धर्म विज्ञान में उपवास को इतना महत्वपूर्ण नहीं बताया गया जितना सच्चाई को। मैं चालीस दिन उपवास करने के बजाए शुक्रवार को ही व्रत करता हूँ। उपवास के साथ प्रार्थना जरूरी है इस बात का विशेष ध्यान रखता हूँ। विडंबना तो यह है कि कई लोग हमें गुड फ्रायडे की बधाई देते हैं जबकि यह अनुचित है।

इस दिन यीशु को क्रॉस पर चढ़ाया गया था। यीशु के बलिदान देने की वजह से ही इस दिन को 'गुड' कहते हैं। इसी प्रकार ईस्टर ईसाइयों की नींव है। इस दिन प्रभु यीशु का पुनरुत्थान हुआ था।

टिबिन थॉमस बताते हैं कि उन्होंने करीब 25 दिन तक उपवास किए लेकिन इसके बाद वे इसे जारी नहीं रख सके। कार्य की अधिकता और सेहत का ध्यान रखते हुए उपवास छोड़ना पड़ा। वे कहते हैं कि उपवास करने से पहले यही सोच थी कि भोजन का मोह त्यागा जा सके। मैं भले ही उपवास नहीं कर रहा पर यह नियम लिया है कि इन दिनों दूध और माँसाहार का सेवन नहीं करूँगा।

समाजसेवी संजीव माइकल कहते हैं कि इस बार वे केवल शुक्रवार को ही व्रत कर रहे हैं। वे इसका उद्देश्य बताते हुए कहते हैं कि इस तरह से आत्ममूल्यांकन किया जा सकता है। यह चालीस दिन ही नहीं बल्कि सभी दिनों को मैं महत्व देता हूँ और यह सोचता हूँ कि परमेश्वर हमसे क्या चाहता है और उसके बताए मार्ग पर किस तरह चलकर उस तक कैसे पहुँचा जाए।
 
 
गुड फ्राइडे पर क्या किया जाता है
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गुड फ्रायडे के दिन ईसाई धर्म को मानने वाले अनुयायी गिरजाघर जाकर प्रभु यीशु को इस प्रकार याद करते हैं :-

ईसा मसीह के जन्म (क्रिसमस) का आनंद मनाने के कुछ ही दिन बाद ईसाई तपस्या, प्रायश्चित्त और उपवास का समय मनाते हैं। यह समय, जो 'ऐश वेडनस्डे' से शुरू होकर 'गुड फ्रायडे' को खत्म होता है, 'लेंट' कहलाता है।

जिस सलीब (क्रॉस) पर ईसा मसीह को 'क्रूसीफाई' किया गया था, उसके प्रतीक रूप में आस्थावानों की श्रद्धा स्वरूप लकड़ी का एक तख्ता गिरजाघरों में रखा जाता है।

ईसा अनुयायी एक-एक कर आकर उसे चूमते हैं।

इसके बाद दोपहर से तीन बजे तक सर्विस की जाती है। सर्विस में ईसाई सिद्धांतों (चार गोस्पेल्स) में से किसी एक का पठन किया जाता है।

तत्पश्चात समारोह में प्रवचन, ध्यान और प्रार्थनाएँ की जाती हैं। इन दौरान श्रद्धालु प्रभु यीशु द्वारा तीन घंटे तक क्रॉस पर भोगी गई पीड़ा को याद करते हैं।

इसके बाद आधी रात को सामान्य कम्यूनियन सर्विस होती है।

कहीं-कहीं काले वस्त्र पहनकर श्रद्धालु यीशु की छवि लेकर मातम मनाते हुए एक चल समारोह निकालते हैं और प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी किया जाता है।

चूँकि गुड फ्रायडे प्रायश्चित्त और प्रार्थना का दिन है अतः इस दिन गिरजाघरों में घंटियाँ (बेल) नहीं बजाई जातीं।
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