Popads

Saturday, 23 March 2013

सुनाते हैं तुम्हें किस्सा किया जब प्यार होली में......33013

दोस्तों मेरे एक प्रिय मित्र  श्री राजकुमार जयसवाल जी, जिनका स्वर्गवास हो चुका है,
एक बहुत ही सीधे-सादे, मृदुल स्वभाव के व्यक्ति थे, वे एक बहुत अच्छे कवि भी थे,
उनकी एक हास्य रचना मैं यहाँ आप सभी के लिये लिख रहा हूँ ः-

सुनाते हैं तुम्हें किस्सा किया जब प्यार होली में,
लगाया रंग गालों  पर पड़ी थी मार होली में.
जानते थे वो जलता है – मगर इतना, न सोचा था,
के उनके भाई ने हमसे निकाली, खार होली में.
ले उड़ा था उस हसीना को मैं सभी के बीच से,
मोहल्ले के सभी लड़के हुए खूंखार होली में.
पिटता देख कर मुझको सभी ने हाथ थे धोये,
कर रहे थे जैसे वे इस पल का इन्तजार होली में.
कब्र में पैर थे जिनके पड़े थे खाट पर दददू ,
उठते ही उन्होंने भी जड़ दिये दो-चार होली में.
कोई बोला, जनाजा है ये आशिक का, निकालो धूम से इसको,
बना दो इस कम्बखत की मजार होली में.
जिस्म को इस तरह कुटा कि हर हिस्सा मेर टुटा,
पिटते-पिटते लगा जैसे छोड़ चला मैं संसार होली में.
बताएं क्या-क्या तुम्हें, फजीयत हुई थी कितनी,
घुमाया था पुलिस ने भी सरे बाजार होली में.
के दो दिन बाद छुटे थे जुर्माना भर अदालत से,
अदालत बन्द क्यूँ रखती है, ये सरकार होली में.
देते हैं हम हिदायत उन्हें, करे जो प्यार होली में,
तो नोट रखना फिर जमानत के लिये तैयार होली में.
-->

No comments:

Post a Comment