Friday, 22 March 2013

बोलो जय प्रिंसिपल मैया ……32513

प्रिय दोस्तो जब स्कुल की प्रिन्सीपल ने बच्चे के admission के लिये कई चक्कर लगवाए
और मुझे इतना  तंग कर डाला कि पैसे देकर ही दाखिला कराना पड़ा, तब यह पैरोडी लिखी गई
तो पैरोडी का आनन्द ले ओम जय जगदीश भजन की तर्ज मे ः-
ओम जय प्रिंसिपल मैया- बोलो जय प्रिंसि मैया
तुमने करा दी हमारी -तुमने करा दी हमारी- दैया रे दैया
बोलो जय प्रिंसिपल मैया ……
जो पहले ही आवे - वो एडमिशन पावे- मैया वो एडमिशन पावे
चाहे कछु नाही आवे -चाहे कछु नाही आवे-
पर नोट तो वो चढावे
बोलो जय प्रिंसिपल मैया ……
क्या-क्या तुमका चाही हमसे तो बोलो- 
मैया हमसे तो बोलो
क्या-क्या है तुम्हे चाहत- क्या-क्या है तुम्हे मान्गत-
मुंह तो जरा खोलो
बोलो जय प्रिंसिपल मैया ……
घन्टी कितनी बजाए-peon भी है घबराए-
मैया peon भी घबराए
कितना डरते सारे - बार बार डांट मारे- दिल बैठा जाए
बोलो जय प्रिंसिपल मैया ……
बच्चा तो होशियार है - पढ़ने मे चातुर- मैया पढ़ने मे चातुर
येस तो तुम जरा कर दो- एडमिशन फार्म भर दो - 
हम है बडे आतुर
बोलो जय प्रिंसिपल मैया ……
कितना कुछ हम सहते-अश्रु आँख से बहते- 
आंसू मेरे  पोंछो- 
मैया आंसू मेरे  पोंछो
आम आदमी पिसता-जुता चप्पल घिसता -
कुछ तो जरा सोचो
बोलो जय प्रिंसिपल मैया ……
तुम हो सबकी सवाली-दाखिला करने वाली- -सब कुछ हो जो चाहो-
मैया सब कुछ हो जो चाहो
पैसा झुक नही सकता- दाखिला रुक नही सकता- 
एक जो तेरी हाँ हो
बोलो जय प्रिंसिपल मैया ……
चाहे घन्टा चार किया-तोहरा इन्तजार किया- 
मैया तोहरा इन्तजार किया
अब तो काम करा दो-नैया पार लगा दो- 
कितना ऐतबार किया
बोलो जय प्रिंसिपल मैया ……
प्राण  हमारे ले लिये अब क्या और लोगी- 
मैया अब क्या और लोगी
स्टोरी क्या हम सुनाये- किसी को क्या बतलाऍ- 
हम है भुक्त-भोगी
बोलो जय प्रिंसिपल मैया ……
हम है तुम्हरे नौकर-चाहे मारो ठोकर- रोज है हम आवत- 
मैया रोज है हम आवत
नीन्द न आवे रतिया- सुन लो हमरी बतिया- करेंगे तोहरी दावत
बोलो जय प्रिंसिपल मैया ……
चक्कर हमका कटावत-बार बार है बुलावत 
-जैसे हम खाली- 
मैया जैसे हम खाली
हमका नाही तु भुलवा-हम बगिया के फुलवा- 
तुम हो हमार माली
बोलो जय प्रिंसिपल मैया ……
चीफ मिनिस्टर जी का लैटर- जो कोई नर लावे- 
मैया नोट सहित लावे
कहता जी सी मेह्ता- कहता जी सी मेह्ता - वही एडमिशन पावे
बोलो जय प्रिंसिपल मैया ……
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गुरचरन मेह्ता 
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खल नेताजी की कमाई ।

चले न चले संसद पर, कमाई रहती जारी है ।
संसद से सड़क तक देख, लड़ाई होती भारी है ।
१.
इटली कि किटली जब, चूल्हे पे चढ़ जाती है..!
अच्छे अच्छों को उनकी, नानी याद दिलाती है ।
चले न चले संसद पर, कमाई रहती जारी है ।
२.
चमचें हाज़िर है कई, पुरखों की लाज रखने को ।
हंगामा मचाने बस, एक इशारा ही काफ़ी है ।
चले न चले संसद पर, कमाई रहती जारी है ।
३.
नेताजी की देख सारी, हमदर्दी भी जाली है ।
बुरी नज़रवाले तेरी, जुबान कितनी काली है..!
चले न चले संसद पर, कमाई रहती जारी है ।
४.
सब्र कर, सपनों में तेरे, नानी तेरी भी आयेगी ।
बाप के बाद अब, बेटे ने भी बाँह चढाई है ।
चले न चले संसद पर, कमाई रहती जारी है ।
५.
वोट का है मोल क्या, जनता भोली कब जानेगी?
तब तक, खल नेताओं की, जेबें रहनी भारी है ।
चले न चले संसद पर, कमाई रहती जारी है ।
………………………………………..मार्कण्ड दवे
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