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Sunday, 17 March 2013

ताऊ से पंगा पड गया गया मंहगा---------30813

-------ताऊ से पंगा पड गया गया मंहगा---------
(**माई सेल्फ स्पेशल**)
-----दोस्तों कल शाम की बात है,मै अपने घर लौट रहा था,मेरे आगे एक ताऊ बैलगाड़ी ले कर चल रहे थे,मैंने कई बार होर्न दिया पर उन्होंने साइड नहीं दी,जब आधे घंटे बाद जब मैंने ओवर-टेक किया तो गुस्से में उनसे कहा ओए ताऊ थारे कान खराब हो गये हैं का अगर कहो तो कान में लाउड़-स्पीकर लगवा दू,ये सुनकर ताऊ बोले जे बात न है बेटा,मन्ने तो खरो सुनाई देवे है,बात जे है ये ससुरे बैल नालायक है,जब तक इनके कान में घुस के ना बोलो कुछ सुने ना हैं और साइड ना देवे हैं, फिर मैंने कहा तो आप ही बैल के कान में घुस के बोलो ,ताऊ बोले मन्ने बीच में काहे लावे है थारो को साइड चाहिए,मन्ने को थोड़ी ना चाहिए तू आ के बोल.

moral----अपने से अनुभबी व्यक्ति से आप जीत नहीं सकते,जितना आपने किताबों में पढ़ा है उससे कही अधिक उन्होंने अनुभव से सिखा है.

------- समस्या & सुझाब स्पेशल-----

समस्या----यदि कोई लडकी / महिला झूठी शिकायत करेगी तो भी उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकेगी ..... यानि लडकियों / महिलाओं को झूठी शिकायत करने का अधिकार.....पुरूष सच्ची शिकायत करेंगे तो भी कोई कार्यवाही नहीं होगी.....

बचाब के उपाय-----(भोले-भाले मासूम भाइयो के लिए)

१.गाय बन जाएँ,{ सीधे-साधे बन जाएँ}
२.कला चश्मा पहन कर निकलें.
३.प्रोपोस ना करे,वेट करे वो खुद आकार प्रोपोस करे!
४.प्रोपोस करने पर बात बन जाये तो सही है वरना दीदी-दीदी मजाक कर रहा था आदि का प्रयोग करें.
५.अगर अधिक खतरा महसूस हो तो बुरका पहन कर घर से बहार निकलें.
--------- एट लास्ट बट नोट लीस्ट-----
६.अपनी हरकतों से बाज आयें.

------------- कमीने दोस्त स्पेशल---------

दो दोस्त एक दिन नदी के पुल पर गए
देखा वहां लिखा था...
"डूबते को बचाने के 500 rs"
तब दोनों सलाह करते है की तू डूबने की एक्टिंग करना और में आकर तुझे बचा लूँगा दूसरा दोस्त ऐसा ही करता है ,जब वो डूबने लगता है तो अपने दोस्त को आवाज लगता है
लेकिन वो उसे नहीं बचाता है.
किसी प्रकार वो नदी से बाहर निकल आता है.अपनेदोस्त से पूछता है की तूने मुझे बचाया क्यों नहीं .
तब उसका दोस्त बोला की तूने वो बोर्ड तो पढ़ लिया जिस पर लिखा था...
"डूबते को बचाने के 500 rs"लेकिन उसके बराबर में जो बोर्ड था उसे नहीं पढ़ा उस पर लिखा था..
"लाश निकलने के 1000 rs"!!!

---------------कावेरी दीदी स्पेशल---------------

****
जीबन को जीने का हम आधार मांगते हैं!

भीक नहीं हम अपना अधिकार मांगते हैं!

कोर्ट के जज साहब सुन लो हमारी बात,हम तारिक नहीं neaye मांगते हैं!

वोट मत बनाओ युबाओं का बेबस तुम!

जल्दी से न्युक्ति सरकार से मांगते हैं!

पैसा कमाने को मजबूर हुए हम इतने,!

रख कर कलम को अब हम हथियार मांगते हैं !

तुम्हे तो विधायक और सांसद बना दिया हमने !

खुशहाल हम भी अपना परिबार मांगते हैं !

जो माँगा तुमने हमने हस कर दिया तुन्हें !

थोड़ी सी खुसी हम भी बस एक बार मांगते हैं......

*********
उठेंगे चलेंगे गिरेंगे-उठेगें, मगर आखिरी साँस तक हम लड़ेंगे.

अब जिंदगी तो मौत से हो गई है बत्तर,अब मौत से नहीं डरेंगे

हमें आम-इंसान कब तक कहोगे,फांस बनकर अगले इलेक्शन में चुभेंगे

तारीक के भरोसे न रहने वाले अब,हवाओ से आगे बढ़ेंगे

नहीं मरने वाले अब हम बेमौत,मारना है तो लड़ कर मरेंगे

जो हक है हमारा हमको दे दो, वर्ना छीन के हम रहेंगे.

-------------------------वैरी स्पेशल------------------

Lokendra Malik....-
हिचकियों से एक बात का पता चलता है,
कि कोई हमे याद तो करता है,
बात न करे तो क्या हुआ,
कोई आज भी हम पर कुछ लम्हे बरबाद तो करता है
ज़िंदगी हमेशा पाने के लिए नही होती,
हर बात समझाने के लिए नही होती,
याद तो अक्सर आती है आप की,
लकिन हर याद जताने के लिए नही होती
महफिल न सही तन्हाई तो मिलती है,
मिलन न सही जुदाई तो मिलती है,
कौन कहता है मोहब्बत में कुछ नही मिलता,
वफ़ा न सही बेवफाई तो मिलती है
कितनी जल्दी ये मुलाक़ात गुज़र जाती है
प्यास भुजती नही बरसात गुज़र जाती है
अपनी यादों से कह दो कि यहाँ न आया करे
नींद आती नही और रात गुज़र जाती है
उमर की राह मे रस्ते बदल जाते हैं,
वक्त की आंधी में इन्सान बदल जाते हैं,
सोचते हैं तुम्हें इतना याद न करें,
लेकिन आंखें बंद करते ही इरादे बदल जाते हैं
कभी कभी दिल उदास होता है
हल्का हल्का सा आँखों को एहसास होता है
छलकती है मेरी भी आँखों से नमी
जब तुम्हारे दूर होने का एहसास होता है............. ­.

------------------लैला-मंजनू स्पेशल--------------------------

तेरी आँखों की नमकीन मस्तियाँ
तेरे होठों की बेपरवाह गुस्ताखियाँ
तेरी जुल्फों की लहराती अंगडाईयां
नहीं भूलूंगा मैं ............... ­............... ­....जबतक है जान- जब तक है जान
तेरा हाथ से हाथ छोड़ना
तेरा सायों का रुख मोड़ना
तेरा पलट के फिर ना देखना
नहीं माफ़ करूँगा मैं ............... ­...........जब तक है जान- जब तक है जान
बारिशों में बेधड़क तेरे नाचने से
बात-बात में बेवजह तेरे रूठने से
छोटी -छोटी बचकानी बदमाशियों से
मोहब्बत करूँगा मैं ............... ­...........जब तक है जान- जब तक है जान
तेरे झूठे कसमों वादों से
तेरे जलते सुलगते ख्वाबों से
तेरी बेरहम दुवाओं से
नफ़रत करूँगा मैं ............... ­.............जब ­ तक है जान- जब तक है जान
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