Tuesday, 12 February 2013

वेल- इन-टाइम or Valentine..................... 18113

           दूर  नहीं वेलेंटाईन डे अब  , डिअर  रहो  तुम  वेल- इन-टाइम 
           देर  डिअर  न  होने  पाए तुमसे, कहलायेगा   यह  एक  क्राइम 

           इधर  उधर की  तुम  मत  सोचो ,कर दो एक  खूबशूरत क्राइम
           दिखे अगर वो कहीं भी तुमको कर लेना तुम किस एक फ्लाइंग        

           तुम  तो  मॉडर्न हो गए, कह, कह, कह, कर केवल  वेलेंटाईन 
            हम  बने  रह   गए  गाँव -गवारूं , नहीं  कह  सके  वेलेंटाइन  

          रहे  जिन्दगी  भर  संग जिसके , कभी  नहीं था वो  इन टाइम 
          फिर  भी  रोज  मनाते  हम  मिल, शर्मा -शर्मा  कर वेलेंटाइन  

           बुक  कर लो  तुम आज  ही पार्लर,सज धज  रहना  इन टाइम
           मूँछ पूँछ  सब   साफ  करा  कर बन जाना  तुम लाइफ टाइम

          माँ  की  गर   दवा   हो  लानी ,  कहना  आज   नहीं   है  टाईम 
          डिअर,  तुम   हंस-  हंस   कहना  ,  माम  आज  है   वेलेंटाइन 

          कितना  भी  तुम  शोर  मचा लो , चाहे पी लो  कितने इंजाइम
          नहीं , भरोसा  तुम पर, उस पर,रोज करो तुम मिल किच्चाइन

          करो  रोज  तुम  अपने  मन  की,  हुए  आज  हम आउट टाइम
           हो  तुम्हे  मुबारक   वैलेंटाईन ,   हमें   मुबारक  अपना  टाइम

           बड़े  मूड  में  शौहर जी  थे , कहा  शर्म  से जरा सुन  वेलेंटाइन
           मैंने  कहा  आउटडेटेड  जी , क्यों  नहीं  मना  घर में वेलेंटाइन
          
           सुन  लो  मेरी  बात  ध्यान  से,  तुम  खूब  मनाओ  वेलेंटाइन 
           उसकी एक नहीं कितनी  डेटे हैं,  नहीं  मिलेगी  वो राईट टाइम 
            बड़ा  बहादुर  बनता  है  तूँ ,क्यों  बना  न पाया  लाइफ  टाइम
            लिव -इन  से  तो  बेहतर  है  बना लो  उसको  अब फुल टाइम
            रोज -रोज  तुम, "रोज "ढूढ़ते, कह  न  सके  "इलू" इन टाइम
            साठ  साल के हो  गए अब तुम, निकल  गया अब तेरा टाइम 
            
                "रोज"= गुलाब  ;   इलू = आई लव यू ; डेटे =फिक्स्ड डेट्स 
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 सखी  रखना  जरा  तुम ध्यान ,  चुनर  उड़ने  न पाए 
          झोके    हवा   के  बड़े   तेज  ,  दुपट्टा   गिरने  न  पाए 

         मर्दों  की नज़रों से बचना  सखी, पाँव फिसलने न पाए 
         सखी  रहना  बहुत  होशियार  , रस्ता  भटकने  न पाए

         माहिर बहुत बात करने में  होते, दिल मचलने न पाए
        रखना   बहुत  अपना  ध्यान,  नज़रें  बहकने  न पाए 

         धोखेबजी  में  इनका  शानी  नहीं,कजरा बहने न पाए 
         पाँव रखना बहुत तुम सम्हाल ,बिंदियाँ गिरने न पाए 

         जात  मर्दों  की  भोली लगती बहुत ,भूल  होने  न  पाए 
         रहना,  इनसे  बहुत, तुम    दूर ,  आँसूं   छलने  न पाए

         समझना, परखना  इन्हें  गौर से ,बाँहे  खुलने  न  पाए
         कसना  कसौटी  पे  पहले   इन्हें ,  धोखा   होने न पाए

         बहाने बनाने में, ए  हैं बड़े शातिर ,दिल धड़कने न पाए 
         सखी  सुनना   इन्हें  चुप -चाप ,बात आगे बढ़ने न पाए  
  
          रखना  नज़र ,इनकी  नज़रों  पे तुम ,कहीं लड़ने न पाए 
          सखी   रहना, बहुत  होशियार , मुक़दमा   होने  न पाए   

           झाँक -ताक में माहिर बहुत ए , खिड़की  खुलने न पाए   
           लम्बा  घूघट  तूँ  कर ले सखी  , चेहरा   दिखने  न पाए                      

          बाग -बगीचे  में  चक्कर  लगाते ,चक्कर चलने न पाए 
          सखी रहना  बहुत ही सम्हल कर ,  हल्ला  होने न पाए  

          ए   होते  बहुत  मक्कार  , रंग  बसन्ती  चढ़ने  न  पाए     
          दिल को रखना पकड़ दोनों  हाथो में ,राज खुलने न पाए 

           ठिठोली  हसीं  इनकी  फितरत में  हैं ,हँसीं डसने न पाए 
           बंद  रखना तूं दिल की  किवाड़ ,दरवाज़ा  खुलने न पाए 
           गर दिल तेरा न माने  सखी ,भूल से भी ए रोने  न पाए
           पायल  अपना तूँ रखना सम्हाल , कहीं  बजने न पाए 

           नजरें मोहल्ले  की  तुम  पर लगी हैं ,खबर  उड़ने  न पाए 

           जरा रखना  धीरे -धीरे तुम  पाँव ,मोहल्ला जगने न पाए  
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हाथ  में  दारू  की बोतल , अक्ल  पर ताला रहे 

    रहनुमा   हमारे  देस  का,  पी  के  मतवाला रहे 
   
    आँख  पर  पट्टी  बंधी  हो ,  दुम  कटी  वाला रहे 
    बेटा  पार्टी  अध्यक्ष  हो  , या  जीजा , साला रहे 

    बदलता पार्टी   हर साल हो, लंबी मूँछ वाला रहे 
    हों हाथ में दो चार कट्टे,गले में फूल की माला रहे 

     वीवियाँ  हों दर्जनों  , मुजरे और कोठे वाला रहे 
     शातिर  चोर   हो , या  फिर  चम्बल   वाला रहे 

     नाग के विष से बुझा हो,क़त्ल करने वाला रहे 
     रिश्वत का मसीहा हो,शातिर घोटाले वाला रहे 
   
    झूठ  का  मर्मंग्य हो , दिल  का  पूरा  काला रहे
    ए  ख़ुदा  इस  मुल्क  का  ऐसा  ही रखवाला रहे

     बन कभी प्रतिभूति का एक नया  घोटाला  रहे
    आँख का अँधा भी हो,और नयन सुख  वाला रहे 
    मक्कारी में हो वह लोमड़ी गिद्ध दृष्टि वाला रहे 
    गिरगिट  का  रंग  हो ,  अक्ल   में  दीवाला रहे 
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by madhu singh

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