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Wednesday, 6 February 2013

Collection of Hindi Jokes---अक्ल बादाम खाने से नहीं, बल्कि ठोकर खाने से ही आती है............. 15713

पत्नी
गुस्से में नज़र आयेतो समझना धरती फटने वाली है
और पत्नी
मुस्कुराती हुई दिखेतो समझना जेब कटने वाली है________अर्थात तकलीफ़ दोनों तरफ़ है ....हा हा हा हा हा हा

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 मैंने कहा ,

"गुड्डू की माँ !

ये गुड्डू हद कर रहा है.......

गधे पे बैठने की जिद कर रहा है ..."

वो बोली,

" तो क्या हो जाएगा,

कन्धे पे बिठालो,

अभी चुप हो जाएगा " हा हा हा हा .....

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 बड़ा शोर मचा था चुनाव के दिनों में । कोई कह रहा था ....समाजवाद आयेगा , कोई कह रहा था - राष्ट्रवाद आयेगा,कोई कह रहा था - राम राज आयेगा ....ये बात मेरी इकलौती पत्नीने सुन ली ।मज़ाक में बोली - क्यों रे ! अपने घर में राम राज कब आयेगा ?मैं बोला - कोई रावण तुझे ले के जायेगा और वापस ले केनहीं आयेगा .....तब आयेगा ..................हा हा हा हा हा हा हा
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हर आदमी को

अपनी माँ के हाथ की रोटियां पसन्द होती हैं,

मुझे भी है ।

मैंने कल अपनी पत्नी से कह दिया

- रोटियां मेरी माँ जैसी बना दिया कर ।

वो बोली - बना दूंगी.......

आटा अपने बाप जैसा गूँथ दिया कर

__हा हा हा हा हा हा हा

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रंगलाल
ने नंगलाल से कहा - बेटा नंगलाल !

रात बहुत हो गई है ...बत्ती बुझादे


नंगलाल - आप आंखें बन्द कर लो और बत्ती बुझ गई है

ऐसा समझ लो


रंगलाल - ठीक है, ये मेरा चश्मा वहां रख दे....


नंगलाल - चश्मा उतारो मत पापा, सोते समय चश्मा लगायेंगे

तो सपने साफ नज़र आयेंगे


रंगलाल - ठीक है बेटा ! पर अलार्म तो लगा दे.........

नंगलाल - पापा कुछ तो इन्साफ कीजिये,

दो बड़े बड़े काम मैंने किये हैं,

ये छोटा सा एक काम तो आप कीजिये

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नंगलाल - पापा, जब मैं बिजनैस करूँगा

तो अच्छों - अच्छों के हाथ में कटोरा पकड़ा दूंगा


रंगलाल - वो कैसे बेटा ?

नंगलाल - गोलगप्पे बेच कर ..........

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रंगलाल का बेटा नंगलाल शादी करने को उतावला है लेकिन
नंगलाल उसे उपदेश दे रहा है कि शादी कोई अच्छी चीज़ नहीं हैइससे आदमी बर्बाद हो जाता है वगैरह वगैरह
नंगलाल भड़क जाता है और बाप से पूछता है - पापा ! जब शादी
इतनी ही बुरी चीज़ है तो आपने क्यों की ? और आपसे भी पहले
आपके बाप ने क्यों की ?
रंगलाल उदास स्वर में कहता है - इसलिए बेटा नंगलाल ! क्योंकि अक्ल बादाम खाने से नहीं, बल्कि ठोकर खाने से ही
आती है ....हा हा हा

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रंगलाल का बेटा नंगलाल हुशियारी में अपने बाप का भी बाप है ।

उसे ज्ञान देना बड़ा मुश्किल है । लेकिन बाप कोशिश नहीं छोड़ता,

असफल प्रयास करता रहता है ।


अभी कल ही उसने माचिस की तीली जला कर पूछा - बताओ

नंगलाल ये आग कहाँ से आई ? नंगलाल की समझ में कुछ नहीं

आया तो उसने फूंक मार कर तीली बुझादी और बोला - पहले ये

बताओ की आग गई कहाँ ?

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रंगलाल का बेटा नंगलाल इक गदहे के साथ खिलवाड़ कर रहा था


बेटा - पापा ! अगर मैं इसकी पीछे वाली दोनों लातें पकड़ लूँ

तो आप क्या इनाम देंगे ?


बाप - मुझे देने की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी बेटा !

ये गदहा ख़ुद ही दे देगा ....हा हा हा हा

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ज़माना सचमुच बदल गया है ।

पहले लोग - बाग़ आपस में मिलते थे तो पूछते थे :

आपके बाल बच्चे कैसे हैं ?


जबकि आज कल पूछते हैं :

आपके बाल बचे कैसे हैं ?
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