Popads

Saturday, 23 February 2013

फिल्म समीक्षा :: दोस्ती का जोश 'काय पो छे'........22313


फिल्म समीक्षा :: दोस्ती का जोश 'काय पो छे'

**** चार स्टार

अवधि-126 मिनट

जराती भाषा का ‘काय पो छे’ एक्सप्रेशन हिंदी इलाकों में प्रचलित ‘वो काटा’ का मानी रखता है। पतंगबाजी में दूसरे की पतंग काटने पर जोश में निकला यह एक्सप्रेशन जीत की खुशी जाहिर करता है। ‘काय पो छे’ तीन दोस्तों की कहानी है। तीनों की दोस्ती का यह आलम है कि वे सोई तकदीरों को जगाने और अंबर को झुकाने का जोश रखते हैं। उनकी दोस्ती के जज्बे को स्वानंद किरकिरे के शब्दों ने मुखर कर दिया है। हारी सी बाजी को भी वे अपनी हिम्मत से पलट देते हैं।
‘काय पो छे’ चेतन भगत के बेस्ट सेलर ‘द 3 मिस्टेक्स ऑफ माई लाइफ’ पर आधारित है। ईशान (सुशांत सिंह राजपूत), ओमी (अमित साध) और गोविंद (राज कुमार यादव) गहरे दोस्त हैं। तीनों देश में आए आर्थिक उदारीकरण के बाद के युवक हैं। उनके पास उद्यमी बनने के सपने हैं। वे खुद भी मेहनती और समझदार हैं। तीनों के साझा सपनों की पतंग का मांझा परिस्थितियों के कारण उलझता है, पर उनके जज्बे और जोश में कमी नहीं आती। उनकी दोस्ती का धागा नहीं टूटता। तीनों मिलकर बिट्टू मामा की मदद से खेल के सामानों की दुकान खोलते हैं। ईशान क्रिकेटर है। वह क्रिकेट की कोचिंग भी देता है। उसकी नजर (दिग्विजय देशमुख) गोटीबाज अली हाशमी पर पड़ती है। अली को निखारने की कोशिश में वह उसके परिवार के करीब आता है। साथ काम करते हुए तीनों दोस्तों की प्राथमिकताएं बदलती हैं। राजनीति का भगवा उभार रेंगता हुआ उनकी दोस्ती में घुसता है। यहां हम देखते हैं कि भूकंप से कैसे सपनों में दरार पड़े। गोधरा कांड ने कैसे मानवता पर धर्माधों को हावी होने दिया।
इस फिल्म का अघोषित नायक अली हाशमी है। वह इन युवकों की संगत में पल्लवित होता है। लगन और प्रतिभा से वह देश की नेशनल क्रिकेट टीम में शामिल होता है। उसकी उपलब्धियों के सफर में तीनों दोस्तों का जोश भी है। अली हाशमी के बहाने हम सेक्युलर हिंदुस्तान को करीब से देखते हैं, जहां बंटवारे की भगवा कोशिशों के बावजूद कैसे एकजुटता से समान सपने साकार होते हैं।
निस्संदेह अनय गोस्वामी के फिल्मांकन, हितेश सोनिक के पाश्र्व संगीत, दीपा भाटिया के संपादन के सहयोग से अभिषेक कपूर ने ‘काय पो छे’ जैसी उत्कृष्ट और मनोरंजक फिल्म पेश की है। स्वानंद किरकिरे के गीत और अमित त्रिवेदी का संगीत फिल्म की अंतर्धारा है। ‘काय पो छे’ गुजरात की पृष्ठभूमि में एक खास समय की ईमानदार कथा है, जब प्राकृतिक और राजनीतिक रूप से सब कुछ तहस-नहस हो रहा था। फिल्म का परिवेश और उसका फिल्मांकन स्वाभाविक है। मुख्य कलाकारों के रूप में सुशांत सिंह राजपूत, अमित साध, राज कुमार यादव, अमृता पुरी और मानव कौल अपनी भूमिकाओं में रचे-बसे नजर आते हैं। ‘काय पो छे’ मनोरंजक होने के साथ प्रेरक भी है। यह फिल्म एक प्रांत की सच्चाई उजागर करते हुए देश के युवाओं की आकांक्षा जाहिर करती है।

निर्देशक- अभिषेक कपूर, कलाकार- राजकुमार यादव, अमित साध, सुशांत सिंह राजपूत,
गीत- स्वानंद किरकिरे, संगीत- अमित त्रिवेदी

~ अजय ब्रह्मात्मज
-->

No comments:

Post a Comment