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Sunday, 17 February 2013

ऐसी वाणी बोलिए, कि जमके झगड़ा होए........19913

At the end of the tax year, the Australian Tax Office sent an
inspector to audit the books of a local hospital. While the ATO agent
was checking the books he turned to the CEO of the hospital and said,
"I notice you buy a lot of bandages. What do you do with the end of
the roll when there's too little left to be of any use?"

"Good question," noted the CEO. "We save them up and send them back to
the bandage company and every now and then they send us a free box of
bandages."

"Oh," replied the auditor, somewhat disappointed that his unusual
question had a practical answer. But on he went, in his obnoxious way.

"What about all these plaster purchases? What do you do with what's
left over after setting a cast on a patient?"

"Ah, yes," replied the CEO, realising that the inspector was trying to
trap him with an unanswerable question. "We save it and send it back
to the manufacturer and every now and then they send us a free
package of plaster."

"I see," replied the auditor, thinking hard about how he could fluster
the know-it-all CEO. "Well," he went on, "What do you do with all the
leftover foreskins from the circumcisions you perform?"

"Here, too, we do not waste," answered the CEO. "What we do is save
all the little foreskins and send them to the Australian Tax Office
office and about once a year they send us a complete dick!"
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आप लोगो से एक राय लेनी है
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ताजमहल री-सेल में लेना उचित है
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या
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नया ही बनवा लू?
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एक शेर, एक गाय, एक नेता और एक गधा मरने
के बाद यमलोक पहुँचे । यमदूत ने तीनोँ से उनके
मरने का कारण पूँछा ।
पहले शेर बोला"अब धरती पर जंगल तो बचे
नहीँ हैँ इसलिए मैँ खाने की तलाश मेँ भटकता-
भटकता शहर पहुँच गया । वहाँ लोगोँ नेमुझे देखते
ही गोली मार दी और मैँ मर गया ।"
गाय ने कहा"हमारे
यहाँ सारा चारा तो नेता खा गये इसलिए हम भूख
के कारण मर गये ।"
नेताजी बोले"मैँने ढ़ेर सारेघोटाले किए जैसे
चारा घोटाला, मनरेगा घोटाला, एन आर एच एम
घोटाला और दूरसंचार घोटाला । इन घोटालोँ से
ढ़ेर सारा रुपया पैसा इकट्ठा किया लेकिन एक
दिन आयकर विभाग का छापा पड़ा और
सारा रुपया जब्त कर लिया गया । इस सदमेँसे
मुझे दिल का दौरा पड़ा और मेरी मृत्यु हो गयी ।
अब मेरी बीवी और बच्चे भी जेल मेँ सड़रहे हैँ
और दिन- रात मुझे गंदी-गंदी गालियाँ देकर
कोसते रहते हैँ ।"
गधा बोला "धरती पर लोग नेताओँ को गधा बोलने
लगे हैँ इसलिए शरम के मारे मैँने आत्महत्या कर
ली ।"
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एक ताजा क्रोधमयी रचना

क्रूर और भयानक आज व कल लिखूँगा ।
प्रियसी के गालोँ पर न अब गजल लिखूँगा ।।
नफरत,द्वेष और ईर्ष्या के कीचड मेँ मर चुका,
अब मैँ बो दास्तान-ए-कमल लिखूँगा ।।

करते कुछ न,बस लोगोँ को उपदेश देते देखा है ।
रिमझिम-2 बरसातोँ मेँ छप्पर को मरते देखा है ।।
अब और नही चाहिये संग मुझे अपनोँ का,
अपनोँ के खंजर से लोगोँ को मरते देखा है ।।
बहुत लिखे दुख,दर्द लोगोँ के पन्नोँ पर,
अब दर्द को भूल एक करारा हल लिखूँगा ।।
प्रियसी के गालोँ पर न अब गजल लिखूँगा ।।

संसद देखो तो लगता जैसे सब्जी मण्डी बन गयी है ।
राजनीति की बात करुँ क्या,ये रण्डी बन गयी है ।।
दिशा,दशा देख देश की आजाद,भगत दुख मेँ कहते होँगे,
देखो अपनी दिल्ली भी अब राबलपिण्डी बन गयी है ।।
इसीलिये अब मैँ घर से क्रुद्द होकर निकला हूँ,
आँखोँ से जो बरसा,अब बो बादल लिखूँगा ।।
प्रियसी के गालोँ पर न अब गजल लिखूँगा ।।

ये बो धरा है जहाँ दुश्मन शीश काट ले जाते है ।
फिर भी सत्ता बाले चुपचाप खून का घूँट पी जाते है ।।
याद दिलाओ उन्हे इन्दिरा जैसे सत्ता साहस की,
कि कराँची,लाहौर मेँ भी तिरंगा गड जाते है ।।
हमारी चुप्पी से जहाँ क्यारियोँ मेँ खून पडा,
"भानू" अब मै बो घाटी घायल लिखूँगा ।।
प्रियसी के गालोँ पर न अब गजल लिखूँगा ।।

रचनाकार-sonu sharma-bhanu
copyrights reserved
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I dialed a number and got the following recording:
"I am not available right now, but
Thank you for caring enough to call.
I am making some changes in my life.
Please leave a message after the
Beep. If I do not return your call,
You are one of the changes."
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आज करै सो काल कर,
काल करै सो परसों,
इतनी जल्दी काहे की,
जीना अभी है बरसों|

ऐसी वाणी बोलिए,
कि जमके झगड़ा होए,
और उनसे मत लड़िये,
जो आपसे तगड़ा होए|

बुरे समय को देखकर,
गंजे तू क्यों रोए,
किसी भी हाल मे तेरा,
बाल ना बाँका होए|

दोहों को स्वीकारिये,
या दीजै ठुकराए,
जैसे हमसे बन पड़ा,
वैसे दिये बनाए|
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घोडा रेस में बिक रहा है,
वकील केस में बिक रहा है,

अदालत में जज बिक रहा है,
वर्दी में फर्ज बिक रहा है !

यहाँ सब कुछ बिक रहा है.......

मज़बूरी में इंसान बिक रहा है,
जुल्म का हैवान बिक रहा है,

पैसों कि खातिर ईमान बिक रहा है,
गरीबों का प्राण बिक रहा है !

यहाँ सब कुछ बिक रहा है.......

फिल्मों में गाना बिक रहा है,
गरीब बच्चों का दाना बिक रहा है,

स्कूल का मास्टर बिक रहा है,
अस्पताल का डाक्टर बिक रहा है !

यहाँ सब कुछ बिक रहा है.......

सड़कों पर मन बिक रहा है,
ब्यूटी पार्लरों में तन बिक रहा है,

गरीबों का गुर्दा बिक रहा है,
शर्म-हया का पर्दा बिक रहा है !

यहाँ सब कुछ बिक रहा है.......

सर्कस का जोकर बिक रहा है,
बैंक का लाकर बिक रहा है,
अखबार का हाकर बिक रहा है,
कोठी का नोकर बिक रहा है !

यहाँ सब कुछ बिक रहा है.......

गेट का संत्री बिक रहा है,
पार्टी का मंत्री बिक रहा है,

खिलाडी खेल में बिक रहा है,
कानून जेल में बिक रहा है !

यहाँ सब कुछ बिक रहा है......

दोस्ती में दोस्त बिक रहा है, बच्चों का गोश्त बिक रहा है,

पत्थर मिला दाल बिक रहा है,
हर मोड़ पर दलाल बिक रहा है..

क्या आज ऐसी ही हालत हो चुकी है हमारे भारत की ..आप क्या सोचते है ?
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1 comment:

  1. Boss , lovely blog and I am copying some of this in my own blog . Thank you boss !

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