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Friday, 1 February 2013

'विश्वरूपम' फिल्म रिव्यू : हंगामा है क्यों बरपा?....13713

'विश्वरूपम' फिल्म रिव्यू : हंगामा है क्यों बरपा?

- अवधि-165 मिनट

- *** तीन स्टार

भारतीय मिथक में 'विश्वरूप' शब्द कृष्ण के संदर्भ में इस्तेमाल होता है। कृष्ण ने पहले अपनी मां को बालपन में ही विश्वरूप की झलक दी थी। बाद में कुरूक्षेत्र में अर्जुन के आग्रह पर उन्होंने विश्वरूप का दर्शन दिया था और उन्हें इसे देखने योग्य दिव्य दृष्टि भी दी थी। कमल हासन की फिल्म 'विश्वरूप' में तौफीक उर्फ वसीम कश्मीरी उर्फ विश्वनाथ जैसे नामों और पहचान के साथ एक रॉ आफिसर का आधुनिक विश्वरूप दिखता है। वह एक मिशन पर है। इस मिशन को साधने के लिए वह विभिन्न रूपों को धारण करता है। कमल हासन अपनी फिल्मों में निरंतर भेष और रूप बदलते रहते हैं। इस मायने में वे बहुरूपिया कलाकार हैं। हर नई फिल्म में वे अपने सामने नए लुक और कैरेक्टर की चुनौती रखते हैं और उन्हें अपने अनुभवों एवं योग्यता से पर्दे पर जीवंत करते हैं।

'विश्वरूप' में उन्होंने आज के ज्वलंत मुद्दे आतंकवाद की पृष्ठभूमि में अपने किरदार को गढ़ा है। इस फिल्म की कथाभूमि मुख्य रूप से अफगानिस्तान और अमेरिका में है। फिल्म की शुरुआत में वे एक नर्तक के रूप में आते हैं। उन्होंने बिरजू महाराज के निर्देशन में अपनी इसी छवि को मांजा और विश्वसनीय तरीके से पेश किया है। एक नर्तक की कमनीयता को उन्होंने अच्छी तरह व्यक्त किया है। उनकी पत्‍‌नी निरूपमा (पूजा कुमार) जिंदगी से कुछ ज्यादा पाने की कोशिश में अपने बॉस दीपंकर चटर्जी पर प्रेम पाश फेंकती है। निर्दोष पति को धोखा देने के अपराधबोध से बचने के लिए उनकी कमजोरियों की जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से वह एक जासूस (अतुल तिवारी) की मदद लेती है। जासूस अतिरिक्त उत्साह में फंसता और मारा जाता है। यहां से कुछ नए तथ्य उद्घाटित होते हैं और हम फिल्म की असली कहानी पर आते हैं। फिर भी यह स्पष्ट नहीं हो पाता है कि भारतीय रॉ ऑफिसर इस मिशन से क्यों जुड़ा है?

कमल हासन की फिल्मों में उनका किरदार मुख्य और प्रबल होता है। वे अपनी योग्यता के विभिन्न पहलुओं को एक साथ पेश करने की हड़बड़ी में फिल्म की सभी घटनाओं और किरदारों को अपनी तरफ मोड़ लेते हैं। लिहाजा खास तरह का एकल आनंद देने के साथ उनकी फिल्में एकांगी हो जाती हैं। 'विश्वरूप' उनकी इस आदत से नहीं बच पाई है। इसके बावजूद फिल्म का वितान और विधान आकर्षित करता है। 58 की उम्र में भी उनकी गति और ऊर्जा विस्मित करती है। वे इस संदर्भ में वे देश के अनोखे और विरले कलाकार हैं। इस फिल्म का आनंद कमल हासन की अदाकारी और एक्शन में है। कमल हासन अपने प्रशंसकों को हरगिज निराश नहीं करते।

न जाने क्यों इस फिल्म के कुछ दृश्यों को लेकर इतना हंगामा मचा हुआ है? यह फिल्म तालिबान के कैंप की छवि पेश करती है, जिसमें दिखाया गया है इस्लाम की रूढि़यों का पालन करने के साथ इस्लाम के नाम पर वे किस तरह के कुकृत्य में शामिल हैं और कैसा समाज रच रहे हैं। फिल्म के एक दृश्य में आतंकवादी ओमर अफसोस करता है कि उसने अपने बेटे को डाक्टर बनने की इजाजत क्यों नहीं दी? 'विश्वरूप' निश्चित रूप से इस्लाम की कट्टर धारणाओं पर हल्की चोट करती है। कमल हासन का उद्देश्य संदेश देने से अधिक इस पृष्ठभूमि में दर्शकों का मनोरंजन करना है। वे इस उद्देश्य में सफल रहे हैं।

अपने छोटे से किरदार जासूस की भूमिका में अतुल तिवारी लुभाते हैं। कहीं उन पर और निर्देशकों की नजर न पड़े? एक उम्दा लेखक को हास्य कलाकार बनाने में उन्हें देर नहीं लगेगी। अतुल तिवारी के सटीक संवादों ने फिल्म को विशेष रूप से अर्थपूर्ण गहराई दी है। कमल हासन हमेशा की तरह खुद का विस्तार करते नजर आते हैं। सहयोगी भूमिकाओं में पूजा कुमार, शेखर कपूर और राहुल बोस ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। उनके लिए अधिक गुंजाइश नहीं थी।

-अजय ब्रह्मात्मज / जागरण

विवादों के बीच विश्वरूपम रिलीज, लखनऊ में प्रदर्शन !

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में भले ही विवादित फिल्म विश्वरूपम को रिलीज कर दिया गया है लेकिन यूपी की राजधानी लखनऊ में कुछ सिनेमाघरों के बाहर फिल्म के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं। कुछ मुस्लिम संगठन फिल्म में मौजूद कुछ दृश्यों की वजह से फिल्म पर पाबंदी लगाना चाहते हैं। इस बीच, उत्तर भारत समेत मुंबई में हिंदी में रिलीज हो गई है।

गौरतलब है कि गुरुवार को यूपी में फिल्म रिलीज को हरी झंडी मिल गई थी। वहीं लखनऊ में समय से प्रिंट न पहुंचने की वजह से फिल्म का सुबह का शो रद्द करना पड़ा था।

इससे पहले गुरुवार को यूपी के मुख्य सचिव ने ऐलान कर दिया था कि सूबे में विश्वरूपम पर रोक नहीं लगाई जाएगी। हालांकि बीते दिनों यूपी फिल्म रिलीज को लेकर असंमजस बरकरार था। लेकिन सपा नेता राम आसरे कुशवाहा और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने साफ कर दिया था कि फिल्म देखने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। इसके बाद यह साफ हो ही गया था कि फिल्म को वहां रिलीज किया जाएगा।

बीते दिनों विश्वरूपम बुरी तरह से विवादों में घिरी रही। हालांकि अभी भी तमिलनाडु में फिल्म को सहमति नहीं मिली है और मामला कोर्ट में फंसा हुआ है। इन सब से दुखी और नाराज फिल्म अभिनेता कमल हासन ने अपने बयान में कहा था कि वह और उनकी फिल्म राजनीति का शिकार हो रही है। यह फिल्म किसी भी देश की एकता को तोड़ने के लिए नहीं बनाई गई है। लेकिन कुछ मुस्लिम संगठनों की आपत्ति की वजह से फिल्म रिलीज में देरी हो रही है। हालांकि राज्य की मुख्यमंत्री जयललिता ने भी फिल्म पर लगी पाबंदी को जायज करार दिया है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि हासन से या फिल्म से उनकी कोई निजी दुश्मनी या बैर नहीं है। फिल्म की कहानी से भी उनको कोई दिक्कत नहीं है। अगर हासन मुस्लिम संगठनों के साथ फिल्म के कुछ सीन्स को लेकर कोई समझौता कर लेते हैं तो सरकार रोक हटा लेगी। इस पर कमल हासन ने जयललिता का धन्यवाद दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राच्य में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए फिल्म की रिलीज से रोका गया था। ये फिल्म राच्य के 524 थियेटरों में रिलीज होनी थी, लेकिन राच्य के पास इतने थियेटरों में सुरक्षा-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल नहीं है। उन्होंने कहा कि करीब सौ करोड़ की लागत से बनी इस फिल्म के बारे में उन्हें प्रतिबंध लगने के बाद ही जानकारी मिली। सरकार को फिल्म पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का अधिकार है लेकिन उनकी सरकार ने सिर्फ 15 दिन की पाबंदी लगाई है। ताकि मामला कुछ शांत हो और कमल हासन व मुस्लिम संगठन कोई समझौता कर सकें। उन्होंने कहा कि फिल्म पर पाबंदी आधारहीन नहीं है।

इससे पहले आंध्र प्रदेश और कर्नाटक आदि पड़ोसी राच्यों के साथ कतर, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका, मलेशिया और सिंगापुर आदि देशों में इस पर प्रतिबंध लग चुका है। शुरुआत में कमल हासन न तो फिल्म के दृश्य हटाने और न ही मुस्लिम संगठनों को इसे दिखाने के लिए तैयार नहंी थे। अगर उन्होंने ऐसा किया होता तो आज हालात यहां तक नहीं पहुंचते।

जयललिता के आश्वासन पर उनका धन्यवाद करते हुए कमल हासन ने मुंबई में कहा कि सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि मुख्यमंत्री की बात का असर तमिलनाडु में कितना होता है। उन्होंने कहा,एक दिन पहले मैंने गुस्से में आकर देश छोड़ने की बात की थी, लेकिन वह मैंने गुस्से में आकर कही थी। मेरा मसकद यहां के लोगों से मिले प्यार की बेअदबी नहीं करना था। न मेरा विश्वास देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था से डिगा है। लेकिन भविष्य में अगर ऐसा वाक्या दुबारा हुआ तो मैं यकीनन देश छोड़ दूंगा।

कमल ने प्रतिबंध के खिलाफ अपनी लड़ाई के लिए सभी को शुक्रिया देते हुए कहा कि यह सिर्फ मेरी लड़ाई नहीं रही। मैं इसमें अकेला नहीं लड़ रहा हूं। मीडिया, फैन और मुस्लिम समुदायों का भी मुझे समर्थन मिला है। सच्चे मुसलमान भाई मेरे साथ है। मैं महेश भट्ट साहब से लेकर सलमान खान और जीतू जी [जितेंद्र] का शुक्रिया अदा करना चाहूंगा, जो उन्होंने इस मुश्किल की घड़ी में मेरा साथ दिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में फिल्म के रास्ते में अड़चन आने पर वहां के नेताओं से भी मिलने के संकेत दिए। फिल्म को हो रहे नुकसान के सवाल पर कमल ने कहा, मेरे भाई की गणना के मुताबिक हमें अब 50 से 60 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो चुका है, लेकिन प्रशंसकों का साथ रहा तो उस घाटे की पूर्ति हो जाएगी। ता दें कि फिल्म तमिल और तेलुगु में बनी है। इसका हिंदी संस्करण शुक्त्रवार को देश के अन्य भागों में रिलीज हो रहा है।

करुणानिधि के खिलाफ केस करेंगी जयललिता

जयललिता ने द्रमुक प्रमुख करुणानिधि के उन आरोपों को खारिज कर दिया जिसमें फिल्म के निर्देशक और अभिनेता कमल हासन से उनकी निजी रंजिश की ओर इशारा किया गया था। 80 के दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन को कमल हासन के खिलाफ शिकायत करने के आरोपों पर उन्होंने करुणानिधि को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि उन्हें एमजीआर को पत्र लिखने की जरूरत नहीं थी क्योंकि उनसे उनकी मुलाकात प्रतिदिन होती थी। करुणानिधि ने यह भी कहा था कि पिछले दिनों एक कार्यक्रम में कमल हासन ने चिदंबरम की तारीफ करते हुए कहा था कि धोती पहनने वाले तमिल को प्रधानमंत्री बनना चाहिए। उनकी वर्तमान समस्या इसी की देन है। इस पर जयललिता ने कहा कि कमल हासन प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं करेंगे। उन्हें अपने विचार रखने का हक है। इस पर मुझे क्या दिक्कत होगी।

अन्नाद्रमुक प्रमुख ने उस आरोप से पल्ला झाड़ा जिसमें कहा गया कि अन्नाद्रमुक की समर्थक जया टीवी को फिल्म के अधिकार न बेचने के कारण यह कदम उठाया गया। उन्होंने कहा कि जया टीवी से उनका कुछ लेना-देना नहीं है। जयललिता ने इन आरोपों पर करुणानिधि और मीडिया के एक वर्ग के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराने की चेतावनी दी है।
विवादों के बीच विश्वरूपम रिलीज, लखनऊ में प्रदर्शन !

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में भले ही विवादित फिल्म विश्वरूपम को रिलीज कर दिया गया है लेकिन यूपी की राजधानी लखनऊ में कुछ सिनेमाघरों के बाहर फिल्म के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं। कुछ मुस्लिम संगठन फिल्म में मौजूद कुछ दृश्यों की वजह से फिल्म पर पाबंदी लगाना चाहते हैं। इस बीच, उत्तर भारत समेत मुंबई में हिंदी में रिलीज हो गई है।

गौरतलब है कि गुरुवार को यूपी में फिल्म रिलीज को हरी झंडी मिल गई थी। वहीं लखनऊ में समय से प्रिंट न पहुंचने की वजह से फिल्म का सुबह का शो रद्द करना पड़ा था।

इससे पहले गुरुवार को यूपी के मुख्य सचिव ने ऐलान कर दिया था कि सूबे में विश्वरूपम पर रोक नहीं लगाई जाएगी। हालांकि बीते दिनों यूपी फिल्म रिलीज को लेकर असंमजस बरकरार था। लेकिन सपा नेता राम आसरे कुशवाहा और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने साफ कर दिया था कि फिल्म देखने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। इसके बाद यह साफ हो ही गया था कि फिल्म को वहां रिलीज किया जाएगा।

बीते दिनों विश्वरूपम बुरी तरह से विवादों में घिरी रही। हालांकि अभी भी तमिलनाडु में फिल्म को सहमति नहीं मिली है और मामला कोर्ट में फंसा हुआ है। इन सब से दुखी और नाराज फिल्म अभिनेता कमल हासन ने अपने बयान में कहा था कि वह और उनकी फिल्म राजनीति का शिकार हो रही है। यह फिल्म किसी भी देश की एकता को तोड़ने के लिए नहीं बनाई गई है। लेकिन कुछ मुस्लिम संगठनों की आपत्ति की वजह से फिल्म रिलीज में देरी हो रही है। हालांकि राज्य की मुख्यमंत्री जयललिता ने भी फिल्म पर लगी पाबंदी को जायज करार दिया है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि हासन से या फिल्म से उनकी कोई निजी दुश्मनी या बैर नहीं है। फिल्म की कहानी से भी उनको कोई दिक्कत नहीं है। अगर हासन मुस्लिम संगठनों के साथ फिल्म के कुछ सीन्स को लेकर कोई समझौता कर लेते हैं तो सरकार रोक हटा लेगी। इस पर कमल हासन ने जयललिता का धन्यवाद दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राच्य में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए फिल्म की रिलीज से रोका गया था। ये फिल्म राच्य के 524 थियेटरों में रिलीज होनी थी, लेकिन राच्य के पास इतने थियेटरों में सुरक्षा-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल नहीं है। उन्होंने कहा कि करीब सौ करोड़ की लागत से बनी इस फिल्म के बारे में उन्हें प्रतिबंध लगने के बाद ही जानकारी मिली। सरकार को फिल्म पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का अधिकार है लेकिन उनकी सरकार ने सिर्फ 15 दिन की पाबंदी लगाई है। ताकि मामला कुछ शांत हो और कमल हासन व मुस्लिम संगठन कोई समझौता कर सकें। उन्होंने कहा कि फिल्म पर पाबंदी आधारहीन नहीं है।

इससे पहले आंध्र प्रदेश और कर्नाटक आदि पड़ोसी राच्यों के साथ कतर, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका, मलेशिया और सिंगापुर आदि देशों में इस पर प्रतिबंध लग चुका है। शुरुआत में कमल हासन न तो फिल्म के दृश्य हटाने और न ही मुस्लिम संगठनों को इसे दिखाने के लिए तैयार नहंी थे। अगर उन्होंने ऐसा किया होता तो आज हालात यहां तक नहीं पहुंचते।

जयललिता के आश्वासन पर उनका धन्यवाद करते हुए कमल हासन ने मुंबई में कहा कि सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि मुख्यमंत्री की बात का असर तमिलनाडु में कितना होता है। उन्होंने कहा,एक दिन पहले मैंने गुस्से में आकर देश छोड़ने की बात की थी, लेकिन वह मैंने गुस्से में आकर कही थी। मेरा मसकद यहां के लोगों से मिले प्यार की बेअदबी नहीं करना था। न मेरा विश्वास देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था से डिगा है। लेकिन भविष्य में अगर ऐसा वाक्या दुबारा हुआ तो मैं यकीनन देश छोड़ दूंगा।

कमल ने प्रतिबंध के खिलाफ अपनी लड़ाई के लिए सभी को शुक्रिया देते हुए कहा कि यह सिर्फ मेरी लड़ाई नहीं रही। मैं इसमें अकेला नहीं लड़ रहा हूं। मीडिया, फैन और मुस्लिम समुदायों का भी मुझे समर्थन मिला है। सच्चे मुसलमान भाई मेरे साथ है। मैं महेश भट्ट साहब से लेकर सलमान खान और जीतू जी [जितेंद्र] का शुक्रिया अदा करना चाहूंगा, जो उन्होंने इस मुश्किल की घड़ी में मेरा साथ दिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में फिल्म के रास्ते में अड़चन आने पर वहां के नेताओं से भी मिलने के संकेत दिए। फिल्म को हो रहे नुकसान के सवाल पर कमल ने कहा, मेरे भाई की गणना के मुताबिक हमें अब 50 से 60 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो चुका है, लेकिन प्रशंसकों का साथ रहा तो उस घाटे की पूर्ति हो जाएगी। ता दें कि फिल्म तमिल और तेलुगु में बनी है। इसका हिंदी संस्करण शुक्त्रवार को देश के अन्य भागों में रिलीज हो रहा है।

करुणानिधि के खिलाफ केस करेंगी जयललिता

जयललिता ने द्रमुक प्रमुख करुणानिधि के उन आरोपों को खारिज कर दिया जिसमें फिल्म के निर्देशक और अभिनेता कमल हासन से उनकी निजी रंजिश की ओर इशारा किया गया था। 80 के दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन को कमल हासन के खिलाफ शिकायत करने के आरोपों पर उन्होंने करुणानिधि को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि उन्हें एमजीआर को पत्र लिखने की जरूरत नहीं थी क्योंकि उनसे उनकी मुलाकात प्रतिदिन होती थी। करुणानिधि ने यह भी कहा था कि पिछले दिनों एक कार्यक्रम में कमल हासन ने चिदंबरम की तारीफ करते हुए कहा था कि धोती पहनने वाले तमिल को प्रधानमंत्री बनना चाहिए। उनकी वर्तमान समस्या इसी की देन है। इस पर जयललिता ने कहा कि कमल हासन प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं करेंगे। उन्हें अपने विचार रखने का हक है। इस पर मुझे क्या दिक्कत होगी।

अन्नाद्रमुक प्रमुख ने उस आरोप से पल्ला झाड़ा जिसमें कहा गया कि अन्नाद्रमुक की समर्थक जया टीवी को फिल्म के अधिकार न बेचने के कारण यह कदम उठाया गया। उन्होंने कहा कि जया टीवी से उनका कुछ लेना-देना नहीं है। जयललिता ने इन आरोपों पर करुणानिधि और मीडिया के एक वर्ग के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराने की चेतावनी दी है।
'विश्वरूपम' फिल्म रिव्यू : हंगामा है क्यों बरपा?

- अवधि-165 मिनट

- *** तीन स्टार


भारतीय मिथक में 'विश्वरूप' शब्द कृष्ण के संदर्भ में इस्तेमाल होता है। कृष्ण ने पहले अपनी मां को बालपन में ही विश्वरूप की झलक दी थी। बाद में कुरूक्षेत्र में अर्जुन के आग्रह पर उन्होंने विश्वरूप का दर्शन दिया था और उन्हें इसे देखने योग्य दिव्य दृष्टि भी दी थी। कमल हासन की फिल्म 'विश्वरूप' में तौफीक उर्फ वसीम कश्मीरी उर्फ विश्वनाथ जैसे नामों और पहचान के साथ एक रॉ आफिसर का आधुनिक विश्वरूप दिखता है। वह एक मिशन पर है। इस मिशन को साधने के लिए वह विभिन्न रूपों को धारण करता है। कमल हासन अपनी फिल्मों में निरंतर भेष और रूप बदलते रहते हैं। इस मायने में वे बहुरूपिया कलाकार हैं। हर नई फिल्म में वे अपने सामने नए लुक और कैरेक्टर की चुनौती रखते हैं और उन्हें अपने अनुभवों एवं योग्यता से पर्दे पर जीवंत करते हैं।

'विश्वरूप' में उन्होंने आज के ज्वलंत मुद्दे आतंकवाद की पृष्ठभूमि में अपने किरदार को गढ़ा है। इस फिल्म की कथाभूमि मुख्य रूप से अफगानिस्तान और अमेरिका में है। फिल्म की शुरुआत में वे एक नर्तक के रूप में आते हैं। उन्होंने बिरजू महाराज के निर्देशन में अपनी इसी छवि को मांजा और विश्वसनीय तरीके से पेश किया है। एक नर्तक की कमनीयता को उन्होंने अच्छी तरह व्यक्त किया है। उनकी पत्‍‌नी निरूपमा (पूजा कुमार) जिंदगी से कुछ ज्यादा पाने की कोशिश में अपने बॉस दीपंकर चटर्जी पर प्रेम पाश फेंकती है। निर्दोष पति को धोखा देने के अपराधबोध से बचने के लिए उनकी कमजोरियों की जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से वह एक जासूस (अतुल तिवारी) की मदद लेती है। जासूस अतिरिक्त उत्साह में फंसता और मारा जाता है। यहां से कुछ नए तथ्य उद्घाटित होते हैं और हम फिल्म की असली कहानी पर आते हैं। फिर भी यह स्पष्ट नहीं हो पाता है कि भारतीय रॉ ऑफिसर इस मिशन से क्यों जुड़ा है?

कमल हासन की फिल्मों में उनका किरदार मुख्य और प्रबल होता है। वे अपनी योग्यता के विभिन्न पहलुओं को एक साथ पेश करने की हड़बड़ी में फिल्म की सभी घटनाओं और किरदारों को अपनी तरफ मोड़ लेते हैं। लिहाजा खास तरह का एकल आनंद देने के साथ उनकी फिल्में एकांगी हो जाती हैं। 'विश्वरूप' उनकी इस आदत से नहीं बच पाई है। इसके बावजूद फिल्म का वितान और विधान आकर्षित करता है। 58 की उम्र में भी उनकी गति और ऊर्जा विस्मित करती है। वे इस संदर्भ में वे देश के अनोखे और विरले कलाकार हैं। इस फिल्म का आनंद कमल हासन की अदाकारी और एक्शन में है। कमल हासन अपने प्रशंसकों को हरगिज निराश नहीं करते।

न जाने क्यों इस फिल्म के कुछ दृश्यों को लेकर इतना हंगामा मचा हुआ है? यह फिल्म तालिबान के कैंप की छवि पेश करती है, जिसमें दिखाया गया है इस्लाम की रूढि़यों का पालन करने के साथ इस्लाम के नाम पर वे किस तरह के कुकृत्य में शामिल हैं और कैसा समाज रच रहे हैं। फिल्म के एक दृश्य में आतंकवादी ओमर अफसोस करता है कि उसने अपने बेटे को डाक्टर बनने की इजाजत क्यों नहीं दी? 'विश्वरूप' निश्चित रूप से इस्लाम की कट्टर धारणाओं पर हल्की चोट करती है। कमल हासन का उद्देश्य संदेश देने से अधिक इस पृष्ठभूमि में दर्शकों का मनोरंजन करना है। वे इस उद्देश्य में सफल रहे हैं।

अपने छोटे से किरदार जासूस की भूमिका में अतुल तिवारी लुभाते हैं। कहीं उन पर और निर्देशकों की नजर न पड़े? एक उम्दा लेखक को हास्य कलाकार बनाने में उन्हें देर नहीं लगेगी। अतुल तिवारी के सटीक संवादों ने फिल्म को विशेष रूप से अर्थपूर्ण गहराई दी है। कमल हासन हमेशा की तरह खुद का विस्तार करते नजर आते हैं। सहयोगी भूमिकाओं में पूजा कुमार, शेखर कपूर और राहुल बोस ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। उनके लिए अधिक गुंजाइश नहीं थी।


-अजय ब्रह्मात्मज / जागरण
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