Tuesday, 29 January 2013

संकटहरण श्रीगणेशचतुर्थी व्रत (सकट चौथ)........11613

भारतीय संस्कृति में गणेश जी को विघ्नहर्त्ता, विघ्नेश्वर, मंगलमूर्ति आदि नामों से पुकारते हैं। भगवान विनायक ऋषि, मुनि, देव सभी को कठिन परिस्थितियों से बाहर ले आते हैं। आप सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने में भी समर्थ हैं।
माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को ‘सकट चौथ’ कहा जाता है। वक्रतुण्डी चतुर्थी, तिलकुटा चौथ भी इसी चतुर्थी के नाम हैं। सकट चौथ के दिन श्री गणेश पूजन तथा व्रत रखने का विधान है।
सकट चतुर्थी के दिन सभी महिलाएं सुख सौभाग्य और सर्वत्र कल्याण की इच्छा से प्रेरित होकर विशेष रूप से इस दिन व्रत का पालन करती हैं।
पदम पुराण के अनुसार यह व्रत स्वयं भगवान गणेश ने मां पार्वती को बताया था।  इस व्रत की विशेषता है कि घर का कोई भी सदस्य इस व्रत को कर सकता है। प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी ‘गणेश चतुर्थी’ कहलाती है, परन्तु माघ मास की चतुर्थी ‘सकट चौथ’ कहलाती है। नियमित रूप से व्रत करने से बुद्घि, ऋद्घि एवं सिद्घि की प्राप्ति तो होती ही है, साथ ही समस्त विघ्न बाधाओं का नाश भी होता है। संतान को भगवान श्री गणेश सभी कष्टों से बचाते हैं। आज का पूजन छात्रों को अत्यन्त मेधावी बनाता है।
भगवान श्री गणेश को चतुर्थी का व्रत प्रिय है। चतुर्थी तिथि को भगवान श्री गणेश जी का जन्म हुआ था। इसी तिथि को कार्तिकेय जी के साथ पृथ्वी की परिक्रमा लगाने की प्रतिस्पर्धा में उन्होंने पृथ्वी की बजाय भगवान भोलेनाथ तथा मां पार्वती जी की सात बार परिक्रमा की थी। तब शिवजी ने प्रसन्न होकर देवों में प्रमुख मानते हुए उनको प्रथम पूजा का अधिकार दिया था। श्री गणेश विघ्नों का नाश करने वाले और ऋद्घि, सिद्घि के दाता हैं।



पूजा की विधि
प्रात:काल चौकी पर लाल वस्त्र बिछा कर भगवान श्री गणेश की सोने, चांदी, पीतल या मिट्टी से बनी मूर्ति स्थापित करें। उन्हें पीले वस्त्र तथा आभूषण धारण कराएं एवं बंदन पूजन करें। भगवान शिव एवं आदि शक्ति मां पार्वती का भी पूजन करें। दिन भर निर्जला व्रत रखें। सांय काल चन्द्रमा को विशेष अर्घ्य देकर पूजन करें। प्रात:काल पूजन में तिलों को गुड़ के साथ मिला कर तिलों का पहाड़ बनाया जाता है। उसके साथ ‘सकट माता’ का चित्र भी बनाते हैं। शुद्घ आसन पर बैठ कर सभी पूजन सामग्री चंदन, अक्षत, रोली, मौली, पुष्प माला, धूप, दीप एवं मोदक आदि से भगवान की पूजा की जाती है।
माताओं को बच्चों से भी भगवान श्री गणेश की पूजा करानी चाहिये। दूसरे दिन तिलकुट का प्रसाद सभी में वितरित किया जाता है। मोदक से श्री गणेश का भोग लगाएं तथा 21 दूर्वा दल भी अर्पित करें। आरती करें तथा वस्त्र, अन्न और फल का दान करें।
मंत्र-‘‘ऊँ  गं गणपतये नम:’’
‘‘वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ:,
निर्विघ्नं कुरूमें देव सर्व कार्येषु सर्वदा।’’
श्री गणेश जी के साथ ऋद्घि,सिद्घि का भी पूजन करते हैं, जिससे पूरे वर्ष घर में सुख-समृद्घि आये।
श्री गणेश स्त्रोत से विशेष फल प्राप्त होते हैं। आपका पूजन करते समय शुद्घ एवं सात्विक चित्त से ध्यान लगाना चाहिये। पूजन से प्रसन्न होकर भगवान अपने आराधकों को समस्त कार्यकलापों में सिद्घि प्रदान करते हैं एवं उनके संकट हर लेते हैं। इसीलिये आपका सिद्घि विनायक नाम सर्वत्र प्रसिद्घ है।

Point to remember-
When you are worshiping the Moon at night, do not look at the moon. Keep your eyes down and do not look at moon. It is very un-auspicious  to look moon at this time.
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